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लुधियाना के रहने वाले भारतीय सेना के जवान सिकंदर सिंह का दिल्ली में ड्यूटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। शुक्रवार सुबह जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गगड़ा लाया गया। पार्थिव शरीर को देखते ही पत्नी और बेटी रोने लगे। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ा। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें भाई ने मुखाग्नि दी। सिकंदर भारतीय सेना की 5 सिख लाइट इन्फैंट्री में तैनात थे। वह अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी से लास्ट बार 4 दिन पहले बात हुई थी। तब उन्होंने कहा था कि सीने में दर्द हो रहा है। वह बेटियों से भी बात नहीं कर पाए थे। अंतिम यात्रा के PHOTOS… पत्नी बोलीं- 4 दिन पहले ही फोन पर बात हुई सिकंदर की पत्नी रमनजीत कौर ने बताया कि उन्हें अपने पति पर बेहद गर्व है। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी परवरिश और पढ़ाई को लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। जनवरी में वह 45 दिन की छुट्टी पर घर आए थे और मार्च में फिर ड्यूटी पर लौट गए। चार दिन पहले उनकी आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। पत्नी ने आगे बताया – आखिरी बातचीत के दौरान उन्होंने सिर्फ इतना कहा था- मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मुझसे बोला नहीं जा रहा। इसके बाद वह बच्चों से भी बात नहीं कर पाए। पति ने शादी बाद एमए-बीएड तक पढ़ाया पत्नी ने बताया कि उनके पति ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनकी पढ़ाई पूरी करवाई। पति ने शादी के बाद मुझे एमए और बीएड तक पढ़ाया। आज मुझे अपने पति की शहादत पर गर्व है। बस सरकार से यही गुजारिश है कि मेरे बच्चों के सिर पर हमेशा अपना हाथ रखे और उनके भविष्य का सहारा बने। पढ़िए जवान के बारे में… सिकंदर सिंह ने 16 साल देश की सेवा की जगराओं के पास स्थित गांव गगड़ा निवासी नायक सिकंदर सिंह (33) करीब 16 वर्ष पहले एक बेहद साधारण मजदूर परिवार से निकलकर भारतीय सेना में भर्ती हुआ थे। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। तीन भाइयों में सबसे बड़े थे सिकंदर सिकंदर सिंह ने छोटी उम्र से ही बड़ी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। तीन भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते सिकंदर सिंह ने बहुत ही कम उम्र में पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक संबल दिया था। पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को उठाया। करीब 5 साल पहले ही सिकंदर सिंह का विवाह हुआ था। दो बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। उनकी एक ढाई साल की और एक आठ महीने की बेटी है।
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फौजी के आखिरी शब्द- बहुत दर्द हो रहा…:बेटियों से बात तक नहीं कर पाए, लुधियाना में भाई ने मुखाग्नि दी
