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9 साल पुराने होमगार्ड हत्याकांड में बड़ा फैसला:सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा, कोर्ट 20-20 हजार जुर्माना भी लगाया




सिद्धार्थनगर में करीब नौ साल पहले ड्यूटी पर जाते समय होमगार्ड की दिनदहाड़े हुई हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एएसजे) बांसी अशोक कुमार सिंह की अदालत ने सात आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 27 दिसंबर 2017 को हुई थी। बांसी कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले होमगार्ड उदयराज मौर्य अपने घर से बांसी कोतवाली ड्यूटी करने जा रहे थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे उनके पटीदारों ने उन पर हमला कर दिया। धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से किए गए इस हमले में उदयराज मौर्य की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने हत्या, दंगा तथा आपराधिक साजिश समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों में राजू मौर्य निवासी घूसड़े सगरा थाना सोनहा (बस्ती), जयश्री मौर्य निवासी सुड़िया थाना त्रिलोकपुर, बिंद्रा उर्फ बिंद्रावती पत्नी रामउजागिर निवासी पटखौली, श्यामनारायण उर्फ श्यामप्रकाश उर्फ चिनकू निवासी पटेलनगर तथा जगदीश, विजय और भोलू उर्फ गोलू निवासी पटखौली थाना बांसी शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों को हत्या एवं आपराधिक साजिश के अपराध में आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा, दंगा करने के अपराध में दो वर्ष तथा घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास की भी सजा सुनाई गई है। इस मामले में शासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ईश्वरचंद्र चंद्र दुबे ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन की सशक्त दलीलों के आधार पर अदालत ने सभी सात आरोपियों को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई।

करीब नौ वर्ष तक चले इस मुकदमे के फैसले को जिले के चर्चित आपराधिक मामलों में अहम माना जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से एक बार फिर यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं है और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को अंततः सजा मिलती है।



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