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बड़े तालाब की सीमा तय करने के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने फिर वैज्ञानिक सर्वे के आदेश दिए हैं। 11 सदस्यीय कमेटी को फुल टैंक लेवल (एफटीएल) पर ड्रोन-सैटेलाइट समेत वैज्ञानिक तकनीकों से 15 दिन में सीमा तय करनी होगी। पुराने मुनार-पिलरों की जियो-टैगिंग, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग और वीडियोग्राफी भी होगी। अतिक्रमण की जांच वेटलैंड रूल्स 2022 से नहीं, 2017 से होगी। तब से हुए अतिक्रमण और अवैध निर्माण चिह्नित कर वेटलैंड, बफर और प्रभाव क्षेत्र से 3 माह में हटाने होंगे। नई सीमा के बाद शहरी क्षेत्र में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर तक स्थायी-अस्थायी निर्माण नहीं हो सकेगा। मंगलवार को जारी आदेश के मुताबिक, भोज वेटलैंड का एफटीएल पहले गैर-बरसाती मौसम में तय हुआ था। अभी तालाब फुल टैंक लेवल पर है, इसलिए पूरा जलस्तर मिलने पर ही अंतिम सीमांकन होगा। तब तक जल संसाधन विभाग को पानी एफटीएल से ऊपर जाने तक गेट नहीं खोलने के निर्देश हैं। नियम विरुद्ध निर्माण की मंजूरी देने या रोकने में नाकाम अफसरों की भूमिका भी जांची जाएगी। आदेश जस्टिस एसके सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने आर्या श्रीवास्तव और राशिद नूर खान की याचिका पर दिया। राशिद की ओर से हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। बड़े तालाब की हद तय करने में ‘हद’ कर दी 30 साल से यही खेल, सर्वे सीढ़ी चढ़ा, ‘ठंडे बस्ते’ का सांप नीचे लाता रहा
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अब एक और सर्वे:2017 से कब्जे चिह्नित कर 3 माह में हटाने होंगे
