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क्या राजस्थान में फैल रहा खतरनाक वायरस:अचानक बढ़े स्वाइन फ्लू के केस, मंत्री किरोड़ीलाल भी चपेट में आए थे, कितना बड़ा रिस्क‌?




राजस्थान में अगस्त के महीने में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों ने रफ्तार पकड़ ली। जनवरी से जुलाई तक जहां कुल 91 केस मिले थे, वहीं अकेले अगस्त में 56 मरीज सामने आ चुके हैं। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की तबीयत बिगड़ने की खबर ने भी स्वाइन फ्लू को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। क्या राजस्थान में कोई नया या ज्यादा खतरनाक वायरस फैल रहा है? क्या हर बुखार स्वाइन फ्लू हो सकता है? किसे ज्यादा खतरा है? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राजस्थान में स्वाइन फ्लू की अभी क्या स्थिति है और केस कितने बढ़े? जवाब: राजस्थान में जनवरी से अगस्त 2026 तक स्वाइन फ्लू के 147 केस सामने आ चुके हैं। अकेले अगस्त में 56 मरीज मिले हैं। यह 2026 में किसी एक महीने में सामने आए सबसे ज्यादा केस हैं। शुरुआती महीनों में मामले कम थे, लेकिन अगस्त में अचानक केस बढ़ गए। इसके बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल संस्थानों को स्क्रीनिंग, इलाज और जरूरत पड़ने पर मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश जारी किए। हालांकि, अभी किसी नए या ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा बढ़ोतरी को फिलहाल नए वायरस के रूप में नहीं देखा जा रहा है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस से संक्रमित पाए गए। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा था। उनकी सेहत में सुधार के बाद उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। सवाल-2: केस बढ़ने की वजह क्या है? क्या मौसम का भी कनेक्शन है? जवाब: डॉ. कृष्ण कांत शर्मा के मुताबिक इन्फ्लुएंजा का प्रसार मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के साथ बदलता रहता है। राजस्थान जैसे गर्म इलाके में फ्लू साल के अलग-अलग समय में फैल सकता है। WHO के मुताबिक गर्म क्षेत्रों में इन्फ्लुएंजा पूरे साल मौजूद रह सकता है। कुछ समय में इसका प्रसार बढ़ जाता है। मौसम बदलने के दौरान बंद कमरों में ज्यादा समय बिताना, भीड़भाड़, स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों में नजदीकी संपर्क जैसे कारण संक्रमण को फैलने का मौका दे सकते हैं। वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बात करने या सांस लेने से निकलने वाले छोटे कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कुछ हिस्सों में H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी के बीच राजस्थान ने भी निगरानी बढ़ाई है। लेकिन सिर्फ मौसम को इसकी एकमात्र वजह मानना सही नहीं होगा। सवाल-3: स्वाइन फ्लू क्या है और सामान्य फ्लू से कितना अलग है? जवाब: जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, वह इन्फ्लुएंजा ए के H1N1 वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हो सकते हैं। यह सांस से जुड़ी बीमारी है और इसके लक्षण दूसरे मौसमी फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं। अचानक बुखार आना, सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, बदन और मांसपेशियों में दर्द और काफी कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं। सिर्फ इन लक्षणों से यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को H1N1 ही है। दूसरे वायरल संक्रमणों में भी इसी तरह की परेशानी हो सकती है। ज्यादातर लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर होकर निमोनिया जैसी बीमारी कर सकता है। खासकर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में सावधानी जरूरी है। सवाल-4: किसे ज्यादा खतरा है और संक्रमण घर के दूसरे लोगों तक कैसे पहुंचता है? जवाब: डॉ. कृष्णकांत शर्मा के मुताबिक, H1N1 किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके गंभीर होने की आशंका ज्यादा रहती है। इनमें गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग शामिल हैं। डायबिटीज, फेफड़ों या हृदय की बीमारी और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को भी ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए। H1N1 खांसने, छींकने, बात करने या सांस लेने के दौरान निकलने वाले संक्रमित कणों से फैल सकता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। घर में किसी को फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उससे ज्यादा करीब जाने से बचें। हाथ साफ रखें, खांसते या छींकते समय मुंह ढकें और कमरे में हवा का आवागमन बना रहे। सवाल-5: क्या हर बुखार में टेस्ट जरूरी है? जवाब: हर बुखार में H1N1 टेस्ट जरूरी नहीं होता। मरीज के लक्षण, हालत और जोखिम को देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि जांच की जरूरत है या नहीं। H1N1 की पुष्टि के लिए नाक या गले से सैंपल लिया जा सकता है। प्रयोगशाला में रियल टाइम RT-PCR जैसे टेस्ट से वायरस की पहचान की जाती है। केंद्र सरकार के क्लिनिकल प्रोटोकॉल में भी RT-PCR को पुष्टि की प्रमुख जांचों में शामिल किया गया है। भारत में NCDC ने इसके लिए अलग तकनीकी गाइडलाइन जारी की हैं। बिना सलाह के हर वायरल बुखार में टेस्ट कराने की बजाय मरीज की स्थिति देखकर डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा उचित है। सवाल-6: राजस्थान सरकार ने बढ़ते मामलों के बाद क्या तैयारी की? जवाब: मामलों में बढ़ोतरी के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में अलर्ट जारी किया है। हालांकि शुरुआती तौर पर विभाग की ओर से इसमें देरी की गई। जिसकी वजह से अचानक अगस्त के महीने में केसों की संख्या में काफी उछाल देखने को मिला। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के अनुसार, मेडिकल संस्थानों को मरीजों की स्क्रीनिंग, उपचार और जरूरत पड़ने पर रेफरल के लिए तैयार रहने को कहा गया है। विभाग स्थिति पर निगरानी रख रहा है। सवाल-7: राजस्थान में पहले स्वाइन फ्लू का ट्रेंड कैसा रहा है? क्या यह नया खतरा है? जवाब: नहीं। राजस्थान में स्वाइन फ्लू (H1N1) कोई नया या अचानक सामने आया खतरा नहीं है, बल्कि यह राज्य में एक ‘एंडैमिक’ यानी स्थानीय स्तर पर बार-बार लौटने वाला मौसमी संक्रमण बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रदेश में H1N1 वायरस के मामले लगातार दर्ज होते रहे हैं। राजस्थान में पहले के ट्रेंड पर नजर डालें तो अमूमन यह माना जाता था कि स्वाइन फ्लू केवल कड़ाके की ठंड (दिसंबर से फरवरी) के महीनों में ही फैलता है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों के आंकड़ों ने इस पुराने पैटर्न को बदल दिया है। अब मानसून और उसके तुरंत बाद (अगस्त से अक्टूबर) के महीनों में भी H1N1 का वायरस तेजी से सक्रिय होता देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग हर साल इसके केसों की निगरानी और ट्रेसिंग करता है।



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