![]()
रांची विवि की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि पीएचडी एडमिशन में जिस तरह नियमों की अनदेखी हुई है, उसका पूरे भारत में कहीं उदाहरण नहीं मिलता। बुधवार को अंग्रेजी, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा और भूगोल के शोधार्थी अपनी समस्याएं लेकर कुलपति से मिले। छात्रों ने कहा- कोर्स वर्क का शुल्क जमा किया, पढ़ाई की, परीक्षा दी और अब एडमिशन की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। इस पर कुलपति ने दो टूक कहा- पूरे भारत में मुझे एक एग्जांपल दीजिए, जहां नियम की अनदेखी कर ऐसे एडमिशन होता हो। नहीं होता है ना? यहां पर यहीं के लोगों ने पीएचडी को तमाशा बना दिया है। वीसी स्कॉलरों से कहा- केवल नेट पास करने से किसी विवि के पीएचडी कोर्स में एडमिशन का अधिकार नहीं मिल जाता।आपका राइट नहीं बनता कि हमने नेट किया है तो आरयू एडमिशन दे दे। नेट करने वाला छात्र देशभर में आवेदन कर सकता है, लेकिन संबंधित विवि अपने नियमों पर ही एडमिशन देने या नहीं देने का निर्णय करता है। कुलपति ने कहा- पूरे भारत में मुझे एक एग्जांपल दीजिए, जहां ऐसे एडमिशन होता हो, नहीं होता है ना? 8-6-4 का नियम पता था, फिर क्यों लिया अधिक शोधार्थियों का एडमिशन? कुलपति ने पीएचडी में शोध निर्देशक की अधिकतम सीमा का जिक्र करते हुए छात्रों से सवाल किया कि जब यूजीसी का 8-6-4 नियम पता था तो नियम से अधिक शोधार्थियों का एडमिशन क्यों कराया गया। इफ यू आर एस्पायरिंग कि हम असि.प्रोफेसर इसके बेसिस पर बनेंगे, तो आप इतने इग्नोरेंट कैसे हो सकते हैं? पूरी दुनिया को पता है, पूरे भारत की हर यूनिवर्सिटी में पता है… फिर आप लोगों ने क्यों किया? वीसी बोलीं- आपको पता था कि गलत कर रहे हैं कुलपति ने छात्रों की स्थिति की तुलना अतिक्रमण के उदाहरण से की। उन्होंने कहा कि पहले नियम के खिलाफ काम कर लिया जाता है और बाद में उसे नियमित कराने की मांग की जाती है। छात्रों से उन्होंने पूछा- आप लोगों का यही हो रहा है ना? उन्होंने कहा- पीएचडी इंट्रेंस के शुल्क वापस किए जा रहे हैं, क्या आप लोगों को मालूम नहीं है? सख्ती के बीच राहत का दिया भरोसा कुलपति ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं और समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं। 9 सितंबर के दीक्षांत समारोह के बाद पीएचडी का मामला उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने संबंधित विभागाध्यक्ष और अधिकारियों के साथ बैठकर रास्ता निकालने की बात कही। राज्यपाल का आदेश, यूजीसी के पत्र का हवाल कुलपति ने कहा- राज्यपाल की ओर से निर्देश दिया गया है कि यूजीसी 2022 के नियमों का पालन किया जाए। यूजीसी की ओर से भी पत्र आया है। कुलपति ने कहा, उन्हें पहले यह जानकारी नहीं थी कि इतने छात्रों का कोर्स वर्क पूरा हो चुका है। अब वह ऐसे रास्ते की तलाश कर रही हैं, जिससे छात्रों का समय बर्बाद न हो। बोलीं- प्रूफ दीजिए, कार्रवाई होगी छात्रों ने पीएचडी एडमिशन में पारदर्शिता नहीं होने और पैसे के लेन-देन का आरोप लगाते हुए विजिलेंस जांच की मांग की। इस पर कुलपति ने कहा कि केवल आरोप से कार्रवाई नहीं होगी। ‘कोई एक पैसा भी अगर मांगे… गिव मी प्रूफ’ कहते हुए उन्होंने प्रमाण देने को कहा। छात्रों ने कहा- लेन-देन बिचौलियों के माध्यम से होता है। पहले के वीसी भी कह चुके रांची यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो. अजीत कुमार सिन्हा भी विवि की व्यवस्था से परेशान थे। 14 जुलाई 2022 को उन्होंने कहा था कि यहां डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल (डीआरसी) लिबरल है। रिसर्च के लिए यह अच्छी बात नहीं है। पीएचडी डिग्री को भूंजा की तरह नहीं बांटें। पीएचडी अवार्ड मिलने के बाद रिसर्च का काम आगे नहीं बढ़ता। मुझे मालूम है कि आप अपने नाम से पुस्तक, रिसर्च पेपर पब्लिकेशन कराकर लेक्चरर भी बन जाएंगे। लेकिन, इससे सोसाइटी को क्या लाभ मिलेगा। बड़ा सवाल… इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन रांची विवि में पीएचडी दाखिलों में नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने दो टूक कहा कि नियमों की अनदेखी कर सीटें बांटी गईं। छात्रों का कहना है कि उनके एडमिशन को अवैध ठहराने का जिम्मेदार कौन है? पूर्व वीसी प्रो. अजीत कुमार सिन्हा भी डीआरसी पर सवाल उठा चुके हैं। अब सवाल है कि छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन है?
Source link
रांची विश्वविद्यालय में नियमों की अनदेखी:कोटा से अधिक लिया जा रहा एडमिशन, वीसी प्रो. सरोज शर्मा बोलीं- पीएचडी एडमिशन को बना दिया है ‘तमाशा’
