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एसआईआर; रांची के 6.44 लाख वोटरों को नोटिस:मैपिंग के बाद भी नोटिस, अब कागजात लेकर दौड़ लगा रहे वोटर




विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)- 2026 के तहत 5 अगस्त को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद राजधानी रांची सहित पूरे जिले में लाखों मतदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिले के सभी सातों विधानसभा क्षेत्रों में मैपिंग का काम पूरा होने के बाद जब ड्राफ्ट जारी हुआ, तो लाखों ऐसे नाम सामने आए जिनकी मैपिंग ही नहीं हुई या उनके जमा दस्तावेजों से उनकी पहचान पुख्ता नहीं हो सकी। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए रांची जिला प्रशासन ने सातों विधानसभा क्षेत्रों के कुल 6,44,071 मतदाताओं को नोटिस जारी किया है। इसमें 2,08,801 वोटरों को मैपिंग नहीं होने और 4,35,270 वोटरों के नाम-उम्र, परिवार से उनका मिलान नहीं होने पर नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में मतदाताओं को तय तारीख और स्थान पर पहुंचकर पहचान के दस्तावेज जमा कराने का निर्देश दिया गया है। वोटरों का कहना है कि मैपिंग अभियान के दौरान उन्होंने वर्ष 2003 से जुड़े अपने परिवार व रिश्तेदारों के वोटर कार्ड नंबर, मतदान केंद्र और पते का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराया था। इसके बावजूद उन्हें नोटिस थमा दिया गया। अब मतदाता घंटों धूप और कतार में खड़े होकर अंचल और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में वही दस्तावेज दोबारा जमा करा रहे हैं, जो वे पहले ही बूथ स्तर पर दे चुके थे। अचानक मिले नोटिस के बाद हजारों मतदाता अपनी पहचान साबित करने के लिए अंचल कार्यालयों और समाहरणालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मैपिंग नहीं होने और उम्र-नाम में अंतर होने पर जारी किया गया नोटिस भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार वैसे वोटरों को नोटिस दिया जा रहा है, जिनकी डिजिटल मैपिंग अभी तक नहीं हुई है या जिनके नाम, उम्र या उनके परिवार के वोटर लिस्ट का मिलान नहीं हो रहा है। ऐसे वोटरों को ‘नो-मैपिंग’ की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा मैपिंग में अशुद्धि की श्रेणी में 4,35,270 वोटरों को रखा गया है। इन वोटरों को बीएलओ द्वारा फोन पर नोटिस की सूचना दी जा रही है और उन्हें बूथ पर बुलाया जा रहा है। नोटिस में निर्धारित तिथि, स्थान पर संबंधित कागजात लेकर बुलाया जा रहा है। हटिया में सबसे अधिक 1.38 लाख लोगों को नोटिस, सिल्ली में सबसे कम सत्यापन के लिए 83 पदाधिकारी तैनात रांची जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में स्थित कुल 3072 मतदान केन्द्रों के मतदाताओं के सत्यापन की जिम्मेदारी 83 पदाधिकारियों को दी गई है। इसमें वरीय अधिकारियों से लेकर बीडीओ-सीओ, नगर निगम सहित अन्य विभागों के पदाधिकारियों को भी प्रतिनियुक्त किया गया है। ऐसे में नगर निगम से लेकर प्रखंड से अंचल कार्यालयों का काम प्रभावित हो रहा है। नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने, अंचलों में जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र बनाने सहित अन्य कार्य लगभग ठप पड़े हुए हैं। क्योंकि, सभी पदाधिकारी वोटरों के सत्यापन में लगे हैं। केस स्टडी… बीएलओ की गलती, सत्यापन कराने के लिए वोटर हो रहे परेशान 1: संगीता देवी ने बताया कि 27 अगस्त को बीएलओ ने फोन कर बताया कि मेरा एसआईआर नहीं हुआ है। 29 अगस्त को मैं सुनवाई स्थल पर पहुंची। वहां सुनवाई कर रहे अधिकारी से मैंने कहा कि बीएलओ द्वारा मुझे पहले ही रसीद दी गई है, जिसमें बताया गया है कि मेरी मैपिंग हो चुकी है। वहां सत्यापन में पता चला कि मेरी मैपिंग नहीं हुई है। 2: नमीता देवी ने बताया कि वह पंडरा में रहती हैं। नोटिस मिलने के बाद हेहल अंचल में सत्यापन के लिए आई हूं। एसआईआर के दौरान बीएलओ को सारे कागजात दिए थे। मैपिंग भी हो गई थी। इसके बावजूद नोटिस भेजा गया कि मैपिंग नहीं हुई है। यहां आने के बाद फिर वही प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह मतदाताओं को परेशान करने वाली बात है।



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