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14 मिनट पहले
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सवाल- मैं 27 साल की हूं। करीब तीन साल से मेरा एक बॉयफ्रेंड था। पिछले साल उसने अचानक कहा कि उसे इस रिश्ते में अपना भविष्य नहीं दिखता और ब्रेकअप कर लिया। शुरुआत में लगा कि कुछ समय बाद मैं संभल जाऊंगी, लेकिन छह महीने बाद भी मैं उस दुख से बाहर नहीं निकली हूं।
मैं पहले बहुत मिलनसार थी, लेकिन अब दोस्तों से मिलने का मन नहीं करता। ऑफिस से घर लौटने के बाद घंटों अकेली बैठी रहती हूं। कई बार उसका पुराना मैसेज पढ़कर रोने लगती हूं और सोचती हूं कि आखिर मुझमें ऐसी क्या कमी थी कि उसने मुझे छोड़ दिया। सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि अब मुझे कभी वैसा प्यार नहीं मिलेगा। मैं इस रिश्ते से बाहर ही नहीं निकल पा रही हूं। क्या करूं?
एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।
सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। तीन साल का रिश्ता खत्म होने पर दुख होना स्वाभाविक है। यह किसी बेहद अपने को खोने जैसा अनुभव हो सकता है। इसके बाद मन में खालीपन, उदासी और बहुत सारे सवाल भी आ सकते हैं।
लेकिन आपकी परेशानी में एक बात खास है। रिश्ता अचानक खत्म हुआ। आपको पूरा कारण भी नहीं पता। उसने कहा कि उसे रिश्ते में अपना भविष्य नहीं दिखता। लेकिन इसका मतलब क्या था?
क्या वह शादी को लेकर परेशान था? क्या बच्चों को लेकर उसकी सोच अलग थी? क्या करियर या रहने की जगह को लेकर मतभेद थे? क्या परिवार से जुड़ी कोई और परेशानी थी? या वह खुद इस रिश्ते में खुश नहीं था?
सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या उसने अपनी परेशानियां पहले कभी आपके साथ खुलकर साझा की थीं?
अगर नहीं, तो आपके मन को बात समझने का मौका ही नहीं मिला। फैसला उसने लिया। लेकिन उसका दर्द आपको भी सहना पड़ा। ऐसे में मन बार-बार उसी सवाल पर लौटता है।
“आखिर ऐसा क्या हुआ?”
यहीं से खुद को दोष देने का सिलसिला शुरू हो सकता है और ब्रेकअप के बाद मन में तरह–तरह के बुरे ख्याल आ सकते हैं।

क्या ये PGD है?
यहां एक चिकित्सकीय सावधानी भी जरूरी है। ‘प्रोलॉन्ग्ड ग्रीफ डिसऑर्डर’ (PGD) एक डायग्नोसिस है। औपचारिक रूप से इसका इस्तेमाल मुख्यतः किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद होने वाले दुख या पीड़ा के लिए होता है। इसलिए रोमांटिक ब्रेकअप को तकनीकी रूप से PGD कहना ठीक नहीं होगा। फिर भी ब्रेकअप के बाद लंबे समय तक ग्रीफ जैसे लक्षणों का दिखना रूमिनेशन और डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। ग्रीफ और डिप्रेशन एक-दूसरे से जुड़े होते हुए भी अलग साइकोलॉजिकल प्रोसेस हो सकते हैं।
छह महीने बाद भी आप सामाजिक रूप से कटी हुई हैं, घंटों अकेले रहती हैं और बार-बार पुराने मैसेज पढ़कर रोती हैं। इसलिए आपके लॉस को गहराई से समझना और मैनेज करना जरूरी है।

ब्रेकअप का दुख है या डिप्रेशन?
करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट
यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले दो हफ्तों को ध्यान में रखकर नीचे दिए सवालों का जवाब दें। नीचे ग्राफिक्स में दो सेक्शन में कुल 15 सवाल हैं। पहले सेक्शन में ‘ब्रेकअप स्ट्रेस’ से जुड़े सवाल हैं और दूसरे सेक्शन में डिप्रेशन से जुड़े सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘लगभग रोज’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपना स्कोर टोटल करें। स्कोर की एनालिसिस भी नीचे ग्राफिक के बाद दी गई है।

स्कोर इंटरप्रिटेशन
ऊपर का ग्राफिक और उसके सवाल कोई डाइग्नोस्टिक स्केल नहीं हैं। लेकिन यह पैटर्न महत्वपूर्ण है। यदि आपका तनाव मुख्यतः उस व्यक्ति, ब्रेकअप और अनुत्तरित सवालों के आसपास घूम रहा है और अन्य परिस्थितियों में आप अभी भी खुशी अनुभव करती हैं, तो यह ‘ग्रीफ एडजेस्टमेंट’ का प्रोसेस हो सकता है। इसके उलट, यदि-
- आपकी उदासी और खुशी महसूस न होना जीवन के लगभग हर हिस्से में फैल गया है।
- साथ में नींद, भूख का पैटर्न बिगड़ रहा है।
- शरीर में ऊर्जा नहीं रहती, ब्रेन फोकस नहीं होता।
- निराशा होती है, अपना सेल्फ व्यर्थ लगता है।
ऐसी स्थिति में यह डिप्रेसिव एपिसोड है। यहां प्रोफेशनल हेल्प जरूरी है।
खुद को दोष देना बंद करें
अब सबसे जरूरी काम है– खुद को दोष देना बंद करना
आप बार-बार सोच रही हैं, “मुझमें क्या कमी थी?”
इस सवाल को बदलना होगा। इसलिए खुद से पूछें—
“क्या मेरे पास यह मानने का कोई ठोस कारण है कि रिश्ता मेरी कमी की वजह से खत्म हुआ?”
हो सकता है रिश्ते में आपकी भी कुछ गलतियां रही हों। हर रिश्ते में ऐसा होता है। उन्हें पहचानना अच्छी बात है। लेकिन रिश्ते का खत्म होना हमेशा एक व्यक्ति की गलती नहीं होता। अगर उसने अपनी परेशानियां समय रहते नहीं बताईं, तो आप उन्हें कैसे सुधार सकती थीं? इसलिए सबसे पहले तो खुद को दोष देना बंद करें और ब्रेकअप के बाद ये 7 काम बिल्कुल न करें-

चार सप्ताह का CBT बेस्ड रिकवरी प्लान
सप्ताह 1
“उसने मुझे क्यों छोड़ा?” को सही सवाल में बदलें।
एक कागज पर तीन कॉलम बनाएं:
- जो मैं जानती हूं।
- जो उसने वास्तव में कहा।
- जो मैं अनुमान लगा रही हूं।
उदाहरण:
फैक्ट: उसने कहा कि उसे “रिलेशनशिप में फ्यूचर नहीं दिखता।”
अनुमान: “इसका मतलब मुझमें कोई कमी थी।”
दोनों एक बातें नहीं हैं। अब आप तीन साल के रिश्ते की ईमानदार समीक्षा करें।
- आपने क्या अच्छा किया?
- आपकी क्या गलतियां कीं?
- क्या आपने उसकी जरूरतों को सुना?
- क्या आपने असहमति की स्थितियों को अवॉइड किया?
- क्या कोई ऐसा बिहेवियर था, जिसे आप अगली रिलेशनशिप में बदलना चाहेंगी?
इस एक्सरसाइज का मकसद खुद को निर्दोष साबित करना नहीं है। इसका मकसद सही जिम्मेदारी तय करना है। अपनी गलतियों, कमजोरियों को समझना है, लेकिन खुद को दोष देना और जिम्मेदार ठहराना नहीं है।
सप्ताह 2
सेल्फ ब्लेम को चुनौती दें
हर बार जब आपके मन में विचार आए-
“मुझमें क्या कमी थी?”
तो उसकी जगह खुद से पूछें:
“मैं ऐसा क्यों सोच रही हूं। इस सोच के पीछे क्या प्रमाण है?”
- अगर वह महीनों से परेशान था, तो उसे अपनी परेशानी आपको बतानी चाहिए थी।
- अगर उसने अपनी चिंताएं और भविष्य को लेकर उम्मीदें नहीं बताईं, तो आप उस समस्या को कैसे सुधार सकती थीं?
- हो सकता है कि उसकी कुछ चिंताएं वाजिब भी रही हों।
- लेकिन अगर उसने रिश्ते में रहते हुए उन पर कभी बात ही नहीं की और आखिर में सिर्फ अपना फैसला बता दिया, तो इसमें आपकी क्या गलती है।
- यह उसकी दिक्कत है। उसमें कम्युनिकेशन स्किल की कमी हो सकती है।
- हो सकता है कि उसे कॉन्फ्लिक्ट का सामना करना और उसे मैनेज करना न आता हो। हालांकि उस पक्ष को जाने बिना हम उसके इरादों या स्वभाव के बारे में पक्का निष्कर्ष नहीं निकाल सकते।
फिलहाल आप अपने साथ ये 6 जरूरी काम करें-
- पुराने मैसेज बार-बार पढ़ना बंद करें।
- मैसेज डिलिट करना जरूरी नहीं है।
- फिलहाल उन मैसेज को कहीं अलग रख दें।
- अपने लिए एक लक्ष्य तय करें कि अगले 7 दिन तक आप वो मैसेज खोलकर नहीं देखेंगी।
- इस एक्सरसाइज का मकसद पुरानी यादों को मिटाना नहीं है।
- इससे बार-बार पुरानी बातें सोचने और उसी लूप में फंसे रहने का सिलसिला टूटेगा।
सप्ताह 3
जीवन को रिलेशनशिप से बड़ा बनाइए
जीवन की ये कुछ जरूरी बुनियादी बातें समझना जरूरी है कि-
- हमारा जीवन और अस्तित्व रिलेशनशिप से बड़ा है।
- इसलिए अपने जीवन का दायरा बड़ा करें।
- हर सप्ताह दो दोस्तों से फोन पर बात करें।
- कम से कम किसी एक दोस्त से मुलाकात करें।
- अपने शरीर का ख्याल रखें। सप्ताह में 3 दिन 30 मिनट कोई फिजिकल एक्टिविटी करें।
- एक ऐसी एक्टिविटी करें, जो रिलेशनशिप से पहले भी आप करती थीं। जो आपका शौक और आपकी पहचान थी।
- एक नई एक्टिविटी करें, जिससे उस व्यक्ति की कोई मेमोरी जुड़ी न हो।
- रविवार को अगले पूरे वीक की प्लानिंग करें।
- मन होने का इंतजार न करें। पहले एक्टिविटी होती है, मोटिवेशन कई बार उसके बाद ही आता है।

सप्ताह 4
अगली रिलेशनशिप के लिए सबक
अब आपके लिए सवाल यह नहीं होना चाहिए-
“अगली बार मैं ऐसी कैसे बनूं कि कोई मुझे छोड़े नहीं?”
सही और जरूरी सवाल ये है-
“अगली बार हम दोनों ये कैसे सुनिश्चित करेंगे कि प्रॉब्लम्स छिपी न रहें? हम उन पर कैसे खुलकर बात करेंगे?”
भविष्य के साथी के साथ रिश्ता गंभीर होने पर कुछ जरूरी बातों पर खुलकर चर्चा करें।
- पूछें, “हमारे बीच मतभेद होंगे तो हम उन्हें कैसे सुलझाएंगे?”
- पूछें, “अगर हममें से कोई इस रिश्ते से खुश नहीं होगा, तो क्या वह अपनी फीलिंग शेयर करेगा?”
- शादी, बच्चे, नौकरी और रहने की जगह को लेकर दोनों की सोच पर बात करें।
- यह भी देखें कि क्या आप दोनों मुश्किल बातों से बचते हैं या उनका सामना करते हैं।
- इस ब्रेकअप की सबसे जरूरी सीख यह है कि आपको खुद को बदलने की जरूरत नहीं है।
- एक अच्छे रिश्ते में प्यार के साथ-साथ मुश्किल बातों पर बात करने की क्षमता होना भी जरूरी है।
प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?
अगर उदासी लगातार बनी हुई है, काम और रिश्तों पर असर पड़ रहा है, या आप अकेले इससे नहीं निकल पा रही हैं, तो मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करें।

अंतिम बात
हर रिश्ता अपनी मंजिल तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं। कुछ रिश्ते यह समझाने के लिए भी आते हैं कि हमें अपने लिए क्या चाहिए और क्या स्वीकार नहीं करना है।
इसलिए किसी के चले जाने को अपनी कीमत का पैमाना न बनाएं। एक व्यक्ति का फैसला आपकी पूरी कहानी तय नहीं करता। आगे भी आपकी जिंदगी में नए रिश्ते, नए अनुभव और नई खुशियां आ सकती हैं। आपको उसके लिए खुद को तैयार करना है।

