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छत्तीसगढ़ में जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसके लिए जनगणना निदेशालय, छत्तीसगढ़ की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। सबसे पहले प्रगणकों का प्रशिक्षण और उन्हें दूसरे चरण के लिए तैयार किया जाएगा। देश में करीब 96 साल बाद जनगणना के आंकड़ों में जातीय संरचना का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार जाति की जानकारी को नियमित जनगणना के आंकड़ों का हिस्सा बनाया जाएगा। इस दौरान घर-घर पहुंचने वाले प्रगणक परिवार के प्रत्येक सदस्य की जानकारी दर्ज करेंगे। खास बात यह है कि जाति के साथ पहली बार माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी जुटाई जाएगी। जनगणना से केवल जनसंख्या का आंकड़ा ही सामने नहीं आएगा, बल्कि जातिवार जानकारी से राज्य की सामाजिक संरचना की तस्वीर भी ज्यादा स्पष्ट होगी। अलग-अलग जातियों की संख्या और उनका सामाजिक वितरण भविष्य में नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। लोगों की बताई जानकारी पर होगी जाति गणना जनगणना में व्यक्ति अपनी जाति जो बताएगा, उसे उसी आधार पर दर्ज किया जाएगा। इसके लिए जाति प्रमाणपत्र या कोई अन्य दस्तावेज दिखाना अनिवार्य नहीं होगा। एससी और एसटी के लिए संबंधित राज्य की सूची के अनुसार विकल्प उपलब्ध होंगे, जबकि अन्य जातियों की जानकारी अलग कॉलम में दर्ज की जाएगी। यानी जनगणना में दर्ज होने वाला जातीय आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद जाति प्रमाणपत्रों की संख्या के बजाय व्यक्ति द्वारा बताई गई जानकारी पर आधारित होगा। 2011 में 45 हजार से ज्यादा जातियों के नाम आए थे
2011 की सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना में लोगों से उनकी जाति पूछी गई थी। इसमें देशभर में 45 हजार से अधिक अलग-अलग जातियों और समुदायों के नाम सामने आए थे। इतनी बड़ी संख्या में सामने आए नामों को व्यवस्थित करना बड़ी चुनौती बनी थी। इस बार डिजिटल तकनीक और एआई की मदद से जाति संबंधी आंकड़ों को व्यवस्थित कर अलग-अलग श्रेणियों में रखने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण इसलिए: छत्तीसगढ़ के लिए फरवरी 2027 इसलिए अहम होगा क्योंकि इसी चरण में राज्य की सामाजिक तस्वीर का नया डेटा तैयार होगा। 1931 के बाद पहली बार जाति संबंधी जानकारी जनगणना के आंकड़ों में शामिल होने से आने वाले वर्षों में सरकारी नीतियों और सामाजिक योजनाओं के लिए नया डेटा आधार तैयार हो सकता है। माता-पिता की जन्म जानकारी क्यों महत्वपूर्ण?
इस बार जनगणना में माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। यह प्रावधान अहम माना जा रहा है, क्योंकि जन्मस्थान और जन्म संबंधी विवरण भविष्य में नागरिकता से जुड़े मामलों में उपयोगी हो सकते हैं। व्यक्ति को जितनी जानकारी सही-सही मालूम होगी, वही दर्ज की जाएगी। आधार स्वैच्छिक, पासपोर्ट नंबर की जानकारी संभव
जनगणना में आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा। जिन लोगों के पास पासपोर्ट है, उनसे पासपोर्ट नंबर लिए जाने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर रहेगा। दूसरे चरण से पहले लोगों को अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का विकल्प भी दिया जाएगा।
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जनगणना-2027:जाति , माता-पिता की जन्म तिथि व स्थान भी पूछेंगे, दस्तावेज नहीं सिर्फ बताना होगा
