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चंडीगढ़ | हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने के एक दिन बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा व सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्रियों ने कहा कि पंजाब में कई श्रेणियों के कर्मियों का टेक-होम वेतन केंद्रीय कर्मियों से अधिक है, इसलिए सिर्फ डीए प्रतिशत की तुलना सही नहीं है। कर्मचारी यदि केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन व डीए चाहते हैं तो सरकार इस पर विचार करने को तैयार है। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब में वेतन और डीए पंजाब सिविल सर्विस रिवाइज्ड-पे रूल्स, 2021 और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत नियंत्रित होते हैं। इन नियमों में केंद्रीय इंडेक्स, ऑटोमैटिक फॉर्मूला या केंद्र सरकार की दरों को अनिवार्य रूप से लागू करने का कोई प्रावधान नहीं है। राज्य सरकार डीए की दरें तय करती है। गुजरात से 28% ज्यादा वेतन: बेसिक पे और डीए मिलाकर पंजाब के कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी हरियाणा, राजस्थान, यूपी, एमपी व गुजरात से 28% तक अधिक है। क्लर्क, ड्राइवर, शिक्षक और पुलिसकर्मियों का वेतन केंद्र के समकक्ष पदों से भी बेहतर है। राजस्व का 51% हिस्सा कर्मियों पर : देश में अन्य राज्य अपने कुल राजस्व का औसतन 38% कर्मचारियों पर खर्च करते हैं, पंजाब में यह आंकड़ा 51% तक पहुंच चुका है। पंजाब सिविल सर्विस रूल्स के तहत ही तय होता है डीए प्रेस कॉन्फ्रेंस करते वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा , डॉ. बलजीत कौर
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केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन+डीए देने को तैयार: चीमा
