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मथुरा के प्रसिद्ध ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर के विधि और मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि गोस्वामी डॉक्टर वागीश कुमार जी महाराज के निर्देश पर 15 दिनों से तैयारियां चल रही थीं, जो पूरी हो गईं। जन्मोत्सव के दिन सुबह 6 बजे मंगला के दर्शन खुले और 6:15 बजे बंद हो गए। इसके बाद सुबह 6:30 बजे ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर के मुखिया सुधीर कुमार ने दूध, दही, घी, बूरा और शहद से यह अभिषेक कराया। इसके बाद ठाकुर जी का भव्य श्रृंगार हुआ और श्रद्धालुओं को ग्वाल व राजभोग की झांकियों के दर्शन कराए गए। शाम 7:30 बजे उत्यापन के दर्शन खुलेंगे। इसके बाद भोग, संध्या आरती और शयन की सेवा होगी। रात 10 बजे जागरण की पहली झांकी खुलेगी। रात 11:45 बजे भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव होगा। जन्म के समय ठाकुर जी का फिर से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के प्राकट्य के साक्षी बनेंगे और जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठेगा। मंदिर के मीडिया प्रभारी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय की परंपरा के अनुसार रामनवमी, नृसिंह जयंती और वामन जयंती जैसे कई जन्मोत्सवों पर ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया जाता है। जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था। देश-विदेश से आए श्रद्धालु एक-दूसरे को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाई देते दिखे। मंदिर परिसर में सुबह से ही नौबत, शहनाई और कई तरह के वाद्य यंत्रों की धुन गूंजती रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मुख्य द्वार से प्रवेश और दूसरे द्वारों से निकासी की व्यवस्था की गई। पुरुष और महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं। मंदिर परिसर में लगातार घोषणाएं की गईं और एलईडी स्क्रीन से भी श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। जन्मोत्सव के अगले दिन सुबह 10 बजे नंदोत्सव होगा। इसके बाद नियमित सेवा जारी रहेगी।
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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव:रात 11:45 बजे प्राकट्य उत्सव मनेगा, ठाकुर जी का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा
