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रेवाड़ी में अगस्त माह में पशुओं के हमले में दो लोगों की जान गई और एक घायल हुआ। मरने वालों में एक रिटायर कैप्टन भी शामिल है। पांच दिन में दो मौतों से प्रशासन ने सक्रियता दिखाई। डीसी से डीएमसी तक शहर को कैटल फ्री बनाने के दावे किए। तीन पशु पालकों पर शहर थाना में एफआईआर भी हुई, पर पशु पालकों की दबंगई नहीं रूकी। कर्मचारियों को धमकी देकर सरेआम पशु छुड़वाते रहे। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी नहीं टूटी। पशु पालकों की दबंगई और अधिकारियों की खामोशी के खिलाफ शनिवार को एक बार फिर विभिन्न संगठन नेहरू पार्क में एकत्रित होकर अपनी आवाज उठाएंगे। 17 को FIR-30 को गिरफ्तारी 11 अगस्त को माता चौक गायों के हमले में प्रताप सिंह यादव की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने ठेकेदार देवेंद्र की शिकायत पर तीन पशुपालकों के खिलाफ शहर थाना में एफआईआर दर्ज की। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 30 अगस्त को दो को गिरफ्तार किया। मामले में नामजद एक पशुपालक की अभी तक भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। दो मौतों के बाद 28 अगस्त की देर शाम पुरानी सब्जी मंडी में एक व्यक्ति पर गाय के हमले के बाद गिरफ्तारी हुई थी। हमले में किसी काम से गांव से शहर आए धनौरा निवासी 56 वर्षीय अजीत सिंह घायल हो गए थे। जानिए क्या है यह पूरा मामला सेक्टर-4 निवासी रिटायर कैप्टन जगराम यादव 5 अगस्त की शाम को स्कूटी पर सब्जी लेकर घर आ रहे थे। इसी दौरान गाय और सांड ने उसे टक्कर मार दी। हमले में घायल कैप्टन को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। 11 अगस्त की सुबह माता चौक निवासी प्रताप सिंह यादव घर से टहलने के लिए निकले थे। इसी दौरान गायों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। हमले में घायल होने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 28 अगस्त को गांव धनौरा निवासी 56 वर्षीय अजीत सिंह किसी काम से शहर आए थे। शाम को जब वह पुरानी सब्जी मंडी पहुंचे तो गाय ने उन पर हमला कर दिया। आसपास के लोगों ने उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया। जिससे कैटल कैप्चर अभियान को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। दबंगई दिखाकर छुड़वाए पशु प्रशासन ने 13 अगस्त को ठेकेदार ने शहर में दोबारा पशु पकड़ने का अभियान शुरू किया। पशु पालकों ने कर्मचारियों द्वारा बांधी गई रस्सी काटकर पशुओं को मुक्त करवा लिया। पशु पालकों की दादागिरी यहीं नहीं रूकी। इइसके बाद एक दिन वैन का शटर खोलकर तो एक दिन कर्मचारियों को धमकाकर अपने पशुओं को छुड़वाकर ले गए। दो मौतों के बाद सख्ती दिखाने वाला प्रशासन इस पर कोई एक्शन नहीं ले पाया। एक के बाद एक पशु छुड़वाने की 3 घटनाओं से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए। प्रताप सिंह की मौत पर केस दर्ज धवाना निवासी देवेंद्र ने 17 अगस्त को पुलिस को शिकायत दी। जिसमें बताया कि उसने पशु पकड़ने का टेंडर लिया है। उसकी टीम जब भी पशु पकड़ने जाती है, तो पशु पालक जबरदस्ती पशुओं को छुड़वा ले जाते हैं। प्रताप सिंह यादव पर हमला आवारा नहीं, बल्कि पालतु गायों ने की थी। जिन्हें दुध निकालकर शहर में खुला छोड़ देते हैं। शहर पुलिस ने गुर्जरवाड़ा निवासी इन्द्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और परसा गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज किया था। 13 दिन बाद दो आरोपी परस राम उर्फ परसा और मलखान को गिरफ्तार किया है। इंद्र गुर्जर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। 13 अगस्त को दिया था ज्ञापन नगर परिषद के रिटायर ईओ मनोज यादव ने कहा कि विभिन्न संगठनों ने दो मौतों के बाद 13 अगस्त को डीसी को ज्ञापन दिया था। आज भी कार्रवाई के नाम पर लीपापोती हो रही है। पशुपालक बेखौफ होकर अपने पशुओं को शहर में खुला छोड़ रहे हैं, पकड़े जाने पर उन्हें छुड़वा भी रहे है। इन सबके बावजूद प्रशासन पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। आज एक बार फिर विभिन्न संगठन डीसी को अपना मांगपत्र देंगे।
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रेवाड़ी में एक माह में तीन हमले- 2 की मौत:FIR बेअसर- पशुपालकों की दबंगई के आगे प्रशासन बेबस; आज मंथन करेंगे संगठन
