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गिरिडीह में गर्भवती को 4 किमी खाट पर ढोया:सड़क नहीं होने से गांव तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस, ग्रामीणों ने कहा-पहले भी हो चुका है ऐसा




गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड की मधुबन पंचायत के उत्तरी पारसनाथ टोला में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर सामने आई है। सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लादकर लगभग चार किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। जानकारी के अनुसार, कुरुआतांड निवासी संतोष मुर्मू की पत्नी लोगो टुडू को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को खाट पर लिटाकर दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा गया, जहां पीरटांड़ के एक निजी अस्पताल में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। प्रशासन ने क्षेत्र का सर्वेक्षण भी कराया था ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। लगभग एक माह पहले भी इसी तरह एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा था। उस घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र का सर्वेक्षण भी कराया था, लेकिन सड़क निर्माण की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। 10 जुलाई को ग्रामीणों ने डीसी से की थी मुलाकात इससे पहले, शुक्रवार को कुरुआतांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा सहित नौ गांवों के 100 से अधिक महिला-पुरुष समाहरणालय पहुंचे थे। उन्होंने गिरिडीह डीसी रामनिवास यादव को ज्ञापन सौंपकर सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग की थी। ग्रामीणों ने डीसी को बताया था कि प्रशासन द्वारा पूर्व में सर्वेक्षण किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी विकास कार्य की शुरुआत नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि आगामी बुधवार को वे स्वयं गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे। उग्र आंदोलन करने की चेतावनी ग्रामीण बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू सहित अन्य लोगों ने कहा कि पिपराडीह तक सड़क बनी है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क नहीं बन सकी। बारिश के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो वे समाहरणालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।



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