सनी गुप्ता, संभल3 मिनट पहले
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संभल की कल्कि नगरी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद सोमवार को छठी बायरी उत्सव के रूप में फूलडोल शोभायात्रा निकाली गई। सुबह 9:30 बजे शुरू हुई शोभायात्रा शाम 4 बजे तक शहर के करीब आधे हिस्से का भ्रमण कर चुकी थी। रात 11 बजे भगवान की आरती के साथ मनोकामना तीर्थ मंदिर पर शोभायात्रा का समापन होगा। इस दौरान ढोल-ताशों की धुन से शहर का माहौल भक्तिमय बना रहा।
फूलडोल शोभायात्रा की परंपरा करीब 136 साल पुरानी बताई जाती है। आयोजकों के अनुसार, यह परंपरा अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही है और इतने लंबे समय बाद भी इसका स्वरूप नहीं बदला है। शोभायात्रा में भगवान मंदिर में विराजमान होकर शहर के 1,000 से अधिक घरों और दुकानों तक पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपने घर और प्रतिष्ठानों पर भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

नगर पालिका के वार्ड संख्या 18 स्थित मोहल्ला ठेर निवासी गुरु परिवार ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर शोभायात्रा की शुरुआत की। यात्रा शिव मंदिर से शुरू होकर नई सराय, बाजार गंज, महमूद खां सराय और सर्राफा बाजार से होकर आगे बढ़ी।
इसके बाद शोभायात्रा कोतवाली संभल, शेर खां सराय, टंडन तिराहा और डाकखाना रोड से गुजरी। इसके बाद मोहल्ला कोट पूर्वी और कल्कि मंदिर होते हुए रात 11 बजे मनोकामना मंदिर पहुंचकर इसका समापन होगा।

1890 का रिकॉर्ड मौजूद
नगर हिंदूसभा अध्यक्ष और शोभायात्रा आयोजक कमलकांत तिवारी ने बताया कि उनके पास इस परंपरा से संबंधित वर्ष 1890 का रिकॉर्ड मौजूद है। हालांकि, इससे पहले यह शोभायात्रा किस तरह निकलती थी या इसका आयोजन कौन करता था, इसकी जानकारी नहीं है।
उन्होंने बताया कि अष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसके बाद एकादशी पर सनातन पद्धति के अनुसार छठी बायरी का आयोजन होता है। इसी अवसर पर भगवान का शहर में भ्रमण कराया जाता है।
कमलकांत तिवारी ने बताया कि भगवान के भ्रमण के लिए पहले से ही स्थान निर्धारित हैं। भगवान उन्हीं मार्गों से होते हुए घर-घर और दुकान-दुकान पहुंचते हैं और वहां विराजमान होते हैं। इसी कारण शोभायात्रा सुबह शुरू होकर रात तक चलती है।
शोभायात्रा में निशिकांत तिवारी, रजनीकांत तिवारी, प्रतीक तिवारी, लकी शर्मा, अमरीश गुप्ता, अनुराग गुप्ता, बबलू शर्मा, कुलदीप गुप्ता, नवनीत कुमार, अतुल अग्रवाल और शोभित गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

