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N Raghuraman Column: Success Tips for Career Growth & Expert Networking


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43 मिनट पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

अगर आप ऐसे व्यक्ति हैं, जिसने 17 साल की उम्र में कोई नेशनल या इंटरनेशनल प्रतियोगिता जीती है तो आप अपने कॅरिअर-पाथ और उस यूनिवर्सिटी को चुनने में काफी सावधानी बरतेंगे, जिसमें पढ़कर आप उस डोमेन एरिया के एक्सपर्ट बनना चाहते हैं, जिसमें आपने प्राइज जीता है। 17 साल की उम्र में उन्होंने चीन के नेशनल एंड ओलंपियाड इन इंफॉर्मेटिक्स में हिस्सा लिया।

उनका दाखिला शिंगहुआ यूनिवर्सिटी में हुआ, जो चीन के कई शीर्ष एआई रिसर्चर्स के लिए अमेरिका की विभिन्न यूनिवर्सिटीज तक पहुंचने का अहम लॉन्चपैड रहा है। एक अंडरग्रेजुएट के तौर पर उन्होंने ड्रम बजाए, रॉक बैंड बनाया और गाने लिखे। उन्हें कंप्यूटर और एआई का इतना जुनून था कि उन्होंने अपने बैंड का नाम ‘स्प्ले ट्री’ रखा, जो कंप्यूटर साइंस में डेटा स्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल होने वाली टर्म है।

उन्होंने अपने मेंटर के तौर पर प्रोफेसर टैंग जी को चुना और उनके अधीन अपनी पढ़ाई की। टैंग जी के साथ उन्होंने मशीन लर्निंग पर रिसर्च पेपर लिखे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया। किसी अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट के लिए यह असामान्य है। वे अकसर अपनी बुद्धिमत्ता से साथियों को प्रभावित करते और कॉलेज में काफी चर्चित हो गए थे।

उन्होंने 2015 में पीएचडी के लिए अमेरिका की कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी को चुना। वहां ऐसी समस्याएं होती थीं, जिन्हें सुलझाने में लोग कई हफ्ते लगा देते थे और अकसर समाधान तक नहीं पहुंच पाते थे। लेकिन वे समस्या के बारे में कुछ भी सोचे बिना सीधे ब्लैकबोर्ड पर समाधान लिख देते थे।

कार्नेगी मेलॉन में अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में उन्होंने गूगल ब्रेन में इंटर्नशिप करने का फैसला किया। वहां उन्होंने गूगल ब्रेन के संस्थापक सदस्य क्वोक-वी-ले के साथ मशीन लर्निंग पर दो रिसर्च पेपर लिखे, जिनके आज 20 हजार से ज्यादा साइटेशन दिए जा चुके हैं।

किसी पीएचडी छात्र के लिए ऐसे पेपर पब्लिश करना बेहद असामान्य है। इलॉन मस्क के एआई वेंचर ‘एक्स-एआई’ के को-फाउंडर और बहुत-से स्टूडेंट्स को मेंटर कर चुके जिमी बा जैसे प्रोफेसर भी कहते हैं कि यह लड़का उन सभी में बेहद प्रतिभाशाली था।

लेकिन वह लगातार अपने सभी प्रोफेसरों से कहते रहते थे कि अगर कोई उन्हें पैसे दे दे तो वे चीन वापस जाकर अपनी कंपनी शुरू करेंगे। क्योंकि उन्हें भरोसा था कि उनका प्रोडक्ट ओपनएआई से लेकर गूगल तक के सभी एआई मॉडल्स को पीछे छोड़ सकता है। इसीलिए उन्होंने कभी भी अमेरिका में ठीक से जॉब नहीं ढूंढी।

तो मिलिए 33 साल के यांग झिलिन से, जिनकी कंपनी ने हाल ही में एक पॉवर एआई मॉडल जारी करके दुनियाभर के बाजारों में हलचल मचा दी। वे मूनशॉट एआई के को-फाउंडर हैं, जिसे चीन की शीर्ष एआई लैब्स में से एक माना जाता है। उनके स्टार्टअप के ताजा प्राइवेट फंडिंग राउंड में इसकी वैल्यूएशन 50 अरब डॉलर आंकी गई है। हाल ही में उन्होंने हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में आईपीओ के लिए आवेदन किया है।

इसमें बड़ी सीख यह है कि कॉलेज महज वो जगह नहीं, जहां स्टूडेंट डिग्री हासिल करें। यहां वे अपना इंटेलेक्चुअल इकोसिस्टम तैयार करते हैं। एक बार स्टूडेंट को अपनी मंजिल पता चल जाए तो उसकी हर चॉइस उसे मंजिल के करीब ले जाने वाली होनी चाहिए। मसलन, मुझे किसके साथ बैठना चाहिए? किसके साथ आइडिया डिस्कस करने चाहिए? किसके साथ कॉलेबरेट करना चाहिए?

सिर्फ मजे करने और मूवी देखने के लिए दोस्त चुनने के बजाय ऐसे लोगों को चुनें, जिनके साथ आप कुछ बना सकें, कोई पेपर लिख सकें, किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकें या कोई मुश्किल समस्या हल कर सकें। साथियों का सही ग्रुप किसी स्टूडेंट को नए आइडिया, मेंटर्स, अपॉर्च्युनिटी और यहां तक कि वैश्विक पहचान तक भी पहुंचा सकता है।

हो सकता है कि आप तत्काल बेस्ट न बन पाएं, लेकिन सबसे बेहतरीन दिमागों से घिरे रहना आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। सफलता के लिए गोल शीट तय करना और मंजिल को लेकर मेनिफेस्ट करना जरूरी है, जैसे यांग चाहते थे कि वे ओपनएआई और गूगल को पीछे छोड़ें।

फंडा यह है कि यूनिवर्सिटी में सबसे बेहतर बनने की कोशिश करने में कुछ गलत नहीं है, लेकिन आपको सोच-समझकर सबसे बेहतर लोगों के साथ रहना भी चुनना चाहिए। क्योंकि कई बार आप जिन लोगों की कंपनी में रहते हैं, वही तय करते हैं कि आपकी महत्वाकांक्षा कितनी दूर तक जा सकती है।

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