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MLA छीलने लगे लौकी, प्रत्याशी ने बांट दी 'गोभी':रिछपाल मिर्धा बोले-क्या पता 'घोडे़-गधे' बनें; प्रचार के दौरान 'घर वापसी'




नमस्कार, प्रत्याशी के प्रचार के लिए विधायक जी को लौकी भी छीलनी पड़े तो छीलेंगे। चूरू में प्रत्याशी को चुनाव चिह्न गोभी का फूल मिला तो दावा कर दिया कि ये कमल के फूल से भारी है। बाड़मेर में RLP कार्यकर्ता की प्रचार के दौरान ही भाजपा में ‘घर वापसी’ हो गई। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. लौकी छीलने लगे विधायकजी जनता का मौसम चल रहा है। इन दिनों जनता ही माई-बाप है। जनता जो कहेगी नेताजी वही करेंगे। जनता नहीं कहेगी तब भी करेंगे। जनता को लुभाना है। वोट पाना है। दौसा के बांदीकुई में चुनावी जोर में विधायक जी वार्ड 22 के भाजपा प्रत्याशी मोतीलाल के लिए वोट मांगने निकले। एक बुजुर्ग महिला खाट पर बैठकर लौकी छील रही थी। विधायक जी पास पड़ी कुर्सी पर टिक गए। खाट के पास हुजूम लग गया। विधायक जी बूढ़ी काकी के हाथ से चाकू लिया और लौकी छीलने लगे। बूढ़ी काकी ने कई चुनाव देखे होंगे। विधायक जी को नसीहत दी- बेटा जी काम करोगे तभी तो खाओगे। हुजूम ने नारा लगाया- भारत माता की जय। चूरू के सुजानगढ़ में वार्ड 26 से निर्दलीय प्रत्याशी करणीदान ने प्रचार में गोभी फूंक दी। उन्हें चुनाव चिह्न मिला- गोभी का फूल। अब सारी दुनिया को यह बताते घूम रहे हैं कि गोभी का फूल कमल के फूल पर भारी पड़ेगा। इतना ही नहीं, वे घर-घर गोभी के फूल बांट रहे हैं। लोग चुनाव जिताएं या न जिताएं, लेकिन एक वक्त की सब्जी का इंतजाम तो प्रत्याशी जी कर ही रहे हैं। यानी टक्कर जोर की देंगे। चुनावी सीजन में एक अजब-गजब खबर अजमेर से आ रही है। सुना है यहां मंडी से आलू और प्याज के बोरे चोरी हो गए। चोर सीसीटीवी में दिख रहा है। पुलिस को इस एंगल से भी जांच करनी पड़ेगी कि कहीं किसी कैंडिडेट का चुनाव चिह्न आलू-प्याज तो नहीं है। कहीं फ्री बांटने के चक्कर में… 2. RLP कार्यकर्ता की भाजपा में ‘घर वापसी’ चुनाव में नेताजी का दिमाग दोगुनी रफ्तार से चलने लगता है। बाड़मेर भाजपा जिलाध्यक्ष महोदय चुनाव में सब इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले तो उन्होंने नामांकन वापसी के दिन आरएलपी के कैंडिडेट का नाम वापस कराया। हालांकि एसडीएम ऑफिस के बाहर काफी महाभारत हुई और आरएलपी के पदाधिकारियों ने अपने कैंडिडेट की गर्दन दबोचकर नाम वापसी रोकने की भरसक कोशिश की। लेकिन जिलाध्यक्ष महोदय ने ठान लिया था। ऐसे में कैंडिडेट ने अपनी गर्दन छुड़ाई और भागते हुए कार्यालय पहुंच गया। उसके अंदर घुसते ही गेट बंद कर दिए गए और अंदर से निकलते ही भाजपा के द्वार आरएलपी कार्यकर्ता के लिए खोल दिए गए। दूसरा मौका चुनाव प्रचार के दौरान सामने आया। जब खारा साहब अपने प्रत्याशी को लेकर वार्ड नंबर 8 की गली-गली घूम रहे थे। ऐसे में गले में आरएलपी का पटका डाले अशोक आचार्य जी टकरा गए। अशोक आचार्य वार्ड 8 से आरएलपी के प्रत्याशी। स्वरूप सिंह जी ने उन पर भी डोरे डाले। दुखती रग पकड़ी। खारा जी जानते थे कि आचार्य साहब संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं। लालच में आकर दूसरे पाले में कूद गए हैं। वहीं प्रचार के दौरान ही खारा जी ने आचार्य जी को ऐसा शीशे में उतारा कि आरएलपी का पटका गले में से उतारकर बीजेपी का दुपट्‌टा धारण कर लिया। चहुंओर भारत माता की जय के नारे लग गए। ब्यावर में वार्ड 50 से खड़ीं प्रत्याशी कविता तिवारी जी ने मासूमियत में घोलकर ईमानदारी दिखा दी। सभा को संबोधित करते हुए बोलीं- आप लोग मुझे जानते नहीं होंगे। मैं घर से कम ही निकलती हूं। अलबत्ता मेरे पति को आप लोग अच्छे से जानते हैं। हो सकता है पतिदेव घर में कम ही आते हों। चुनाव चीज ही ऐसी है। इस वक्त पति देवताओं की परीक्षा है। बाकी, पतिदेव की शान में कशीदे तो कोटा से भाजपा प्रत्याशी सोमा अहलूवालिया ने खूब गढ़े। कहा- मेरे पति ने पार्षद के तौर पर जी-जान से काम किया। जो काम रह गए होंगे, वो मैं करवाऊंगी। लगे हाथ उन्होंने एक जूस की दुकान पर जूस निकालकर कार्यकर्ता को पिला दिया। 3. चलते-चलते… रिछपाल मिर्धा जी नागौर की राजनीति के पुराने चावल हैं। वे अगर नेता नहीं होते तो गजब के किस्सागो होते। किस्से सुनाने की कला में उनका कोई सानी नहीं। प्रत्याशी के लिए प्रचार करते हुए वे सभा को संबोधित कर रहे थे। बोले- मैं रिछपाल मिर्धा। ये रेवंतराम डांगा। ये पुखराज जी हैं। आगे पता नहीं हम घोड़े बनें, गधे बनें या कुत्ते बनें। किसे पता। अभी हम लोग हैं तो आपके लिए काम करेंगे। मिर्धा जी ने भैंस का उदाहण दिया। बताया कि दूध तो ब्यावली भैंस ही देती है। फिर उन्होंने अपने पहले चुनाव का किस्सा सुनाया। बोले- मैं चौपासनी के स्कूल में 3 साल पढ़ा। जवानी थी। राजपूत समाज के नेता कल्याण सिंह कालवी ने मुझे विधानसभा का पहला टिकट दिया था। तब नाथूराम मिर्धा जी ने कहा था कि परिवारवाद का आरोप लगेगा, मैं इसे टिकट नहीं दूंगा। लेकिन कालवी जी अड़ गए। मैं तो गाड़ी चलाता था। मेरा गुजारा चल रहा था। राजनीति में आने की दरकार नहीं थी। लेकिन जब जीता तो 22-23 हजार वोटों से जीता। तब से 4 बार विधायक का चुनाव लड़ चुका हूं। यहां हर आदमी कह सकता है कि चेयरमैन बनूंगा। लेकिन क्षमता होनी चाहिए। मुझे ऑफर दिया गया कि घरवाली को वार्ड का चुनाव लड़ा दूं। मैंने कहा- मैं चार बार का एमएलए, इसका (पत्नी) का बेटा एमएलए रह गया, अब इसको वार्ड का चुनाव लडाऊं? नहीं। मैं तो किसी गांव वाले को ही लड़ाऊंगा। एक वार्ड से शिकायत आ रही है कि राशन का गेहूं नहीं मिला। आचार संहिता हटने दो ब्याज समेत गेहूं दिलाऊंगा। गेहूं न मिले तो मुझसे कहना। उन्होंने विधायक रेवंतराम डांगा से कहा- लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अभी 34 महीने हैं। 9 महीने में तो बच्चा हो जाता है। अभी बहुत समय है। जुट जाओ। इनपुट सहयोग- लोकेश पाठक (बांदीकुई, दौसा), नरेश भाटी (चूरू), भरत मूलचंदानी (अजमेर), विजय कुमार (बाड़मेर), नितिन शर्मा (कोटा), प्रकाश तंवर (नागौर) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।



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