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Controlling Partner Signs Vs Future Loneliness; Boundaries Suffocating


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21 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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सवाल- मैं 33 साल की अविवाहित महिला हूं। पिछले तीन साल से एक रिलेशनशिप में हूं। मेरे पार्टनर का स्वभाव बहुत कंट्रोलिंग है। वो मेरे कपड़ों, दोस्तों और रोजमर्रा की हरेक चीज में दखल देता है। ये भी तय करता है कि मुझे किससे बात करनी है, किससे नहीं।

कई बार रिश्ता खत्म करने का मन करता है, लेकिन फिर डर लगता है कि मेरी उम्र बढ़ रही है। इसके बाद मुझे कोई नहीं मिलेगा। परिवार की तरफ से भी शादी का बहुत प्रेशर है।

मैं समझ नहीं पा रही कि इस रिश्ते को एक और मौका दूं या इससे बाहर निकल जाऊं। क्या अकेले रहना किसी ऐसे रिश्ते में रहने से बेहतर है, जिसमें हर समय घुटन हो?

एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। वैसे एक लाइन में कहूं तो आपके सवाल की आखिरी लाइन में ही जवाब छिपा है।

क्या अकेले रहना किसी ऐसे रिश्ते में रहने से बेहतर है, जिसमें हर समय घुटन महसूस हो?

जी हां, अकेले रहना घुट-घुटकर रहने से बेहतर है। लेकिन किसी नतीजे पर पहुंचने की बजाय, आइए समस्या को थोड़ा संतुलन और समझदारी के साथ समझने की कोशिश करते हैं।

प्यार और कंट्रोल में क्या फर्क है?

पहले यह समझें कि प्यार और कंट्रोल, दोनों एक ही चीज नहीं हैं। पार्टनर का फिक्र करना, परवाह करना तो सामान्य है। लेकिन फिक्र करने और कंट्रोल करने में बहुत फर्क है।

अगर कोई बार-बार यह तय करे कि आप क्या कपड़े पहनेंगी, किससे मिलेंगी, किससे बात करेंगी और अपना समय कैसे बिताएंगी, तो यह सिर्फ प्यार और परवाह नहीं है। यह कंट्रोलिंग बिहेवियर है।

एक स्वस्थ रिश्ते में दो लोगों को अपनी पसंद और फैसलों की आजादी होती है। पार्टनर अपनी राय व्यक्त कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला आपका होता है।

किसी रिश्ते में रहने के लिए अपनी आजादी से समझौता करना पड़े और फिर भी आपको लगे कि आप पर्याप्त नहीं हैं, तो यह गंभीर संकेत है।

घुटन महसूस होना मामूली समस्या नहीं

आपने लिखा है कि आपको इस रिश्ते में हर समय घुटन महसूस होती है। इस भावना को नजरअंदाज न करें।

मनोविज्ञान बताता है कि लंबे समय तक नियंत्रण झेलने से व्यक्ति अपनी पसंद और फैसलों पर भरोसा खो देता है। धीरे-धीरे वह हर फैसले से पहले पार्टनर की प्रतिक्रिया के बारे में सोचने लगता है। वह खुद से पूछता है–

  • “वो इस बात को अप्रूव करेगा या नहीं?”
  • “कहीं उसे बुरा तो नहीं लगेगा?”
  • “मैं इस दोस्त से मिलूं या नहीं?”
  • “अगर मैंने अपनी बात रखी तो झगड़ा होगा?”

ऐसे में व्यक्ति अपने जीवन का केंद्र खुद नहीं रह जाता। वह पार्टनर की प्रतिक्रिया के हिसाब से जीने लगता है। यह एक स्वस्थ रिश्ते की निशानी तो बिल्कुल भी नहीं है।

कैसे समझें कि पार्टनर कंट्रोलिंग है?

कंट्रोलिंग पार्टनर का व्यवहार हमेशा शुरू से बहुत साफ नहीं होता। कई बार यह चिंता, प्यार या सुरक्षा के नाम पर आता है और धीरे-धीरे कंट्रोल में बदल जाता है। समस्या तब शुरू होती है, जब एक व्यक्ति दूसरे की आजादी, पसंद और फैसलों पर लगातार अपना अधिकार जमाने लगे। ऐसे व्यवहार को समय रहते पहचानना जरूरी है।

सबसे बड़ा डर शायद रिश्ता नहीं, अकेलापन है

आपके सवाल में एक महत्वपूर्ण बात है। आप रिश्ता इसलिए नहीं बचाना चाहतीं कि इसमें आपको खुशी मिल रही है। आप इसलिए रुकने के बारे में सोच रही हैं क्योंकि डर है कि “33 की उम्र में कोई और नहीं मिलेगा।”

यह डर समझ में आता है। लेकिन यह भविष्य की सिर्फ एक आशंका है। यह कोई फैक्ट नहीं है। उम्र बढ़ने के बाद भी कोई प्यार करने वाला साथी मिल सकता है और जवानी में भी टॉक्सिक पार्टनर मिल सकता है।

पार्टनरशिप का, शादी का, रिश्ते का मतलब प्यार और खुशी होता है। एक ऐसे रिश्ते में रहना, जहां पार्टनर को आपकी परवाह हो। एक ऐसा रिश्ता, जिसमें सम्मान और बराबरी हो। इसलिए उम्र बढ़ने के डर शादी के लिए हां नहीं कहना चाहिए। हां कहने से पहले खुद से ये 6 जरूरी सवाल पूछने चाहिए-

एक और मौका दें, लेकिन इन शर्तों पर

अगर आपको लगता है कि रिश्ता तुरंत खत्म करने की बजाय आप एक आखिरी कोशिश करना चाहती हैं, तो सिर्फ “अब सब ठीक रहेगा” पर भरोसा न करें।

स्पष्ट सीमाएं तय करें। उन्हें बताएं कि आपके कपड़े, दोस्त और निजी फैसले आपका अधिकार हैं। यह भी स्पष्ट करें कि असहमति का मतलब अपमान करना नहीं है। आपसे अपमानजनक तरीके से बात नहीं की जा सकती। इसके बाद पार्टनर के व्यवहार को ऑब्जर्व करें-

  • क्या वे आपकी बात समझते हैं?
  • क्या वे अपनी गलती स्वीकार करते हैं?
  • क्या वे व्यवहार बदलने की कोशिश करते हैं?
  • या कुछ दिन ठीक रहने के बाद फिर वही नियंत्रण शुरू हो जाता है?

बदलाव शब्दों से नहीं, लगातार व्यवहार से दिखाई देता है।

दबाव में कोई फैसला नहीं

परिवार की चिंता समझी जा सकती है। लेकिन शादी का फैसला कभी भी जल्दबाजी और दबाव में नहीं लेना चाहिए।

अगर परिवार कहता है, “उम्र निकल रही है,” तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप ऐसा रिश्ता स्वीकार कर लें, जिसमें आप खुश नहीं हैं।

इसलिए परिवार से खुलकर बात करें और उन्हें अपना पक्ष समझाएं। आप कह सकती हैं-

“मैं शादी करना चाहती हूं, लेकिन सिर्फ शादी के लिए अपनी मानसिक शांति और आजादी नहीं छोड़ सकती। मुझे सही फैसला लेने के लिए थोड़ा समय चाहिए।”

आखिर में फैसला कैसे लें?

इस सवाल का जवाब सिर्फ “रिश्ता बचाएं” या “ब्रेकअप करें” में नहीं है। पहले यह देखें कि क्या आपका पार्टनर अपनी गलती समझने और व्यवहार बदलने के लिए तैयार है।

अगर वह आपकी सीमाओं का सम्मान करता है और लगातार बदलाव दिखाता है, तो रिश्ते पर काम किया जा सकता है।

लेकिन अगर वह आपको नियंत्रित करता है, आपकी आजादी छीनता है और आपकी बात को लगातार खारिज करता है, तो सिर्फ उम्र के डर से रिश्ते में रहना सही वजह नहीं है।

अकेले रहना और अकेला महसूस करना अलग बातें हैं। कई बार व्यक्ति रिश्ते में रहकर भी बहुत अकेला होता है। और कई बार अकेले रहने के बावजूद वह अपना आत्मविश्वास, दोस्त और अपनी पहचान वापस पा लेता है। इसलिए रिश्ते से पहले खुद को चुनें।

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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा

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