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Sonipat Gangster Rahul Shahpuria Case |Ankit Baliyan murder case


हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान मर्डर केस की जांच गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के गांव शाहपुर तक भी पहुंच गई है। भोलू शाहपुरिया ने ही सोशल मीडिया पोस्ट डालकर इस मर्डर की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद से यूपी पुलिस की लगातार रेड इस गांव में जारी है।

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पुलिस के डर से हालात ऐसे हो गए है कि गांव के करीब 20 युवा अपना कामकाज, नौकरी आदि छोड़कर अंडरग्राउंड हो गए है। आमतौर पर चहल-पहल वाली गलियां अब सूनसान सी नजर आती हैं।ग्रामीण बताते हैं कि रात होते ही पुलिस की गाड़ियां और सिविल ड्रेस में आने वाले लोगों को देखकर लोग सतर्क हो जाते हैं।

इसी माहौल को लेकर मंगलवार को गांव में पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें अंकित की मौत पर दुख तो जताया गया, साथ ही पुलिस से बेगुनाह युवाओं को परेशान नहीं करने की मांग रखी गई। दैनिक भास्कर टीम इस दहशत की हकीकत जाने के लिए गांव पहुंची तो कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं।

ग्रामीणों की माने तो रात में ड्रोन दिखाई देते हैं। गलियों में रात में हल्की सी भी आहट दिल-दिमाग में बेचैनी बढ़ा जाती है। खासकर गांव के उन युवाओं में, जिनका इस मामले से दूर तक कोई लेना देना नहीं है, लेकिन कामकाज छोड़कर अपने ही घरों में कैद हो गए हैं। ज्यादातर तो अंडरग्राउंड है। गांव के हालात उजागर करती पूरी खबर पढ़ें…

सुमेर ने कहा कि 45 साल की उम्र में उन्होंने गांव में ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा।

सुमेर ने कहा कि 45 साल की उम्र में उन्होंने गांव में ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा।

गांव शाहपुर में दहशत की कहानी, ग्रामीणों की जुबानी…

  • रात में गाड़ियां आती हैं, पहचानना मुश्किल: गांव शाहपुर की दूरी सोनीपत जिला मुख्या से करीब पांच किलोमीटर दूर है। गांव में एंट्री करते ही ग्रामीण सुमेर मिले। भोलू शाहपुरिया का नाम लेते ही तपाक से कहते हैं कि जब से भोलू के नाम से अंकित हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने की बात सामने आई है, तब से गांव में डर बढ़ गया है। रात में गाड़ियां घूमती रहती हैं। कई गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिनमें सिविल ड्रेस में लोग दिखाई देते हैं। ऐसे में गांव वालों को समझ नहीं आता कि सामने पुलिस है या कोई और। सुमेर सवाल उठाते हैं कि अभी तक भोलू के नाम वाली पोस्ट की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने गांव वालों में दहशत पैदा कर दी है। 45 साल की उम्र में उन्होंने गांव में ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा।
  • रात में ड्रोन देखकर लोग घरों में सिमट जाते हैं: कुछ दूर चलने पर कर्म सिंह मिले। गांव के माहौल का जिक्र करते हुए कहते हैं कि पुलिस कभी भी रात में पहुंच जाती है। उनका दावा है कि रात के समय ड्रोन भी उड़ाए जाते हैं और निगरानी रखी जाती है। वे कहते हैं कि सिविल ड्रेस में आने वाले लोगों को पहचानना मुश्किल होता है, इसलिए ग्रामीणों में बेचैनी बनी रहती है।
  • नौकरी करने वाले कई लड़के गांव से बाहर: एक और ग्रामीण दिलावर बताते हैं कि गांव के करीब 20 से 25 युवक सरकारी और प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि पुलिस की लगातार रेड के डर से कई लड़के गांव छोड़कर चले गए हैं। डर यह है कि कहीं किसी को गलत मामले में न फंसा दिया जाए। वह कहते हैं कि भोलू से गांव का कोई लेना-देना नहीं है और परिवार ने भी उससे नाता तोड़ रखा है। गांव पहले शांत था, लेकिन अब एक व्यक्ति के मामले का असर पूरे गांव पर पड़ रहा है।

अगर भोलू ने अपराध किया है तो सजा मिले: गांव के भीतरी हिस्स में 60 साल से अधिक उम्र के जयकिशन शर्मा मिले। वे बताते हैं कि अगर भोलू ने अपराध किया है तो उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पुलिस का बार-बार गांव की गलियों में आना लोगों को परेशान कर रहा है। भोलू का छोटा भाई भी घर से चला गया है। वह अपनी मां का सहारा था। भोलू अपने पिता की मौत पर भी घर नहीं आया था। शर्मा की मांग है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को गांव में जांच करनी है तो वर्दी में आए और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पूछताछ करें। गांव जांच में पूरा सहयोग करेगा।

आहट होते ही दरवाजे खुल जाते हैं: जयकिशन शर्मा गांव के बदले माहौल का एक और दृश्य बताते हैं। वह कहते हैं कि अब गली में थोड़ी सी भी आहट होती है तो लोग घरों से निकलकर देखने लगते हैं। महिलाएं अकेले घर में रहने से घबराती हैं और बच्चों में भी डर बैठ गया है। उन्होंने बताया कि गांव की आबादी करीब 2500 है और लगभग 1580 वोट हैं। बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को लेकर भी लोगों में चिंता है कि आखिर इनमें कौन आ रहा है और किस काम से।

अजीत सिंह ने नम आंखों के साथ कहा कि हम अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं।

अजीत सिंह ने नम आंखों के साथ कहा कि हम अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं।

हम अपने गांव में ही कैद होकर रह गए:अजीत सिंह बताते हैं कि उनका भतीजा आरके कॉलोनी में दुकान करता है और मुरथल से गांव लौटते समय उससे भी पूछताछ होती है। उन्होंने एक घटना बताते हुए कहा कि शाम को पति-पत्नी गांव से बाहर घूमने निकले तो गांव के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोककर वापस जाने को कहा। अजीत कहते हैं कि कभी वर्दी में तो कभी सिविल ड्रेस में लोग दिखाई देते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों में यह डर है कि कहीं उनके बच्चों को भी उठाकर किसी मामले से न जोड़ दिया जाए। वह कहते हैं कि गांव के अलग-अलग चौक-चौराहों पर निगरानी की जा रही है और लोग खुद को अपने ही गांव में कैद महसूस कर रहे हैं। अजीत सिंह ने नम आंखों के साथ कहा कि हम अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं।

दिन में आए पुलिस, स्थानीय पुलिस को साथ लाए: धर्मवीर कहते हैं कि मौजूदा माहौल का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। उनकी सीधी मांग है कि पुलिस को अगर पूछताछ या कोई कार्रवाई करनी है तो दिन के समय करे और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर आए। वह कहते हैं कि गांव पुलिस का विरोध नहीं कर रहा। जांच में ग्रामीण पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे निर्दोष लोगों में डर पैदा न हो।

भोलू की मां राजपति बताती हैं कि भोलू ने 12वीं तक पढ़ाई की और पढ़ाई में अच्छा था।

भोलू की मां राजपति बताती हैं कि भोलू ने 12वीं तक पढ़ाई की और पढ़ाई में अच्छा था।

अब जानिए राहुल उर्फ भोलू की मां राजपति ने क्या कहा

चार साल से गांव नहीं आया भोलू

भोलू की मां राजपति बताती हैं कि भोलू ने 12वीं तक पढ़ाई की और पढ़ाई में अच्छा था। करीब चार साल पहले वह काम के लिए बाहर गया था। इसी दौरान कुमासपुर के एक विवाद में उसका नाम आया और बाद में हत्या के मामले में भी नाम जुड़ गया। इसके बाद से वह गांव नहीं आया।

राजपति आगे बताती हैं कि उनके परिवार में चार बेटियां शादीशुदा हैं और दूसरा बेटा रितेश भी अब घर पर नहीं है। उनके पति सुरेश खेती करते थे। रितेश प्रॉपर्टी डीलिंग करता था, लेकिन करीब 10 महीने से पिता की सेवा के लिए काम छोड़ रखा था।

राजपति के मुताबिक सुरेश की 26 जुलाई को मौत हुई। इस दौरान श्मशान के आसपास रातभर पुलिस मौजूद रही, जिसकी वजह से भोलू पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आया। वह साफ कहती हैं कि अब परिवार का भोलू से कोई नाता नहीं है।

चाचा बोले- चिराग दोषी है तो उसे भी सजा मिले

भोलू के चाचा रमेश ने पंचायत में कहा कि अंकित बालियान हत्याकांड में उसके बेटे चिराग का नाम भी सामने आया है, जबकि वह पढ़ाई के लिए तीन साल से कनाडा में है। उनकी चिराग से बात होती है, वो बताता है कि उसका इस केस में कुछ लेना-देना नहीं है। अगर चिराग दोषी है तो उसे भी सजा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा उनका कहना है कि पुलिस बार-बार गांव आ रही है, जिससे पूरा गांव डरा हुआ है। पुलिस की ज्यादती से परेशान कोई युवा सुसाइड जैसा कदम ना उठा ले, यह चिंता से गांव के कई परिवारों की है।

शाहपुर गांव में मंगलवार को हुई पंचायत में पहुंचे लोग।

शाहपुर गांव में मंगलवार को हुई पंचायत में पहुंचे लोग।

पंचायत में अंकित के परिवार के साथ खड़े होने का दावा

मंगलवार की पंचायत में ग्रामीणों ने अंकित बालियान की हत्या पर दुख जताया और उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना था कि अंकित की मौत से पूरा गांव दुखी है। पूरा गांव उसके परिवार के साथ खड़ा है।

पंचायत में फैसला लिया गया कि ग्रामीण अंकित हत्याकांड के दोषियों को पकड़वाने में पुलिस की मदद करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने पुलिस से कहा कि कार्रवाई अपराधी तक सीमित रहे और किसी निर्दोष युवक को केवल रिश्तेदारी या गांव से संबंध के आधार पर परेशान न किया जाए।

भोलू शाहपुरिया की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट…

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