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CSJMU कर्मचारी एसोसिएशन…जिस नियमावली से चुनाव हुआ वह पंजीकृत नहीं:डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाएटी ने रिकार्ड मांगा, पद के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई




छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कर्मचारी एसोसिएशन के चुनाव और पदाधिकारियों को लेकर चल रहे विवाद में फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के डिप्टी रजिस्ट्रार ने अहम निर्देश दिए हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने साफ किया है कि एसोसिएशन जिस नियमावली के आधार पर अपनी चुनाव प्रक्रिया को सही बता रही है, वह कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। ऐसे में उस नियमावली के आधार पर की गई कार्रवाई को फिलहाल मान्य नहीं माना जा सकता। सक्षम स्तर से मान्यता मिलने तक पद का इस्तेमाल नहीं
डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जब तक सक्षम स्तर से एसोसिएशन को वैधता प्रदान नहीं की जाती, तब तक कोई कर्मचारी यूनियन के पद का इस्तेमाल नहीं करेगा और न ही यूनियन की गतिविधियों में भाग लेगा। पत्र में एसोसिएशन की फाइल और उसके पास मौजूद पंजीकृत नियमावली की जांच का हवाला दिया है। 1971 में रजिस्टर्ड हुई थी संस्था पत्र में बताया गया कि एसोसिएशन का पंजीकरण 16 अप्रैल 1971 को हुआ था। उस समय संस्था का स्मृतिपत्र और नियमावली पंजीकृत की गई थी। इसके बाद किसी दूसरी या संशोधित नियमावली को कार्यालय में पंजीकृत नहीं कराया गया।
जिस नियमावली से चुनाव हुआ, वही सवालों के घेरे में
डिप्टी रजिस्ट्रार के अनुसार एसोसिएशन ने अपने पत्राचार में जिस नियमावली का उल्लेख किया है, वह कार्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इसलिए उस नियमावली के आधार पर किए गए चुनाव या अन्य कार्रवाई को अपने आप वैध नहीं माना जा सकता। पंजीकृत नियमावली में महामंत्री का पद नहीं
चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। कार्यालय के मुताबिक पंजीकृत नियमावली की धारा 3, 4 और 5 के अनुसार चुनाव संबंधी प्रक्रिया पूरी किए जाने के प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा पंजीकृत नियमावली में महामंत्री पद का उल्लेख भी नहीं है। ऐसे में मौजूदा चुनाव प्रक्रिया और पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
एक महीने में देना होगा पूरा रिकॉर्ड
डिप्टी रजिस्ट्रार ने एसोसिएशन को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर सामान्य सभा के सदस्यों की सूची निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ संस्था के मूल दस्तावेज भी जांच के लिए प्रस्तुत करने होंगे। इनमें कार्रवाई रजिस्टर, एजेंडा रजिस्टर, सदस्यता रजिस्टर, बैंक पासबुक, कैशबुक और सदस्यता रसीद बुक प्रमुख हैं। इन रिकॉर्ड की जांच के बाद सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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