रीवा में संजय गांधी अस्पताल में 22 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा का आरोप है कि उन्हें पहले 50 लाख रुपए और इसके बाद एक करोड़ रुपए में मामला खत्म करने का ऑफर दिया गया।
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पिता रामशिरोमणि मिश्रा के मुताबिक रविवार रात एक व्यक्ति से फोन पर उनकी बातचीत कराई गई। उनका दावा है कि परिचित गौतम जी ने अपने फोन से संबंधित व्यक्ति से उनकी बात कराई।
बातचीत में मामले को ‘ले-देकर’ खत्म करने की बात कही गई। इस बातचीत से जुड़ा एक वीडियो भी भास्कर के हाथ लगा है, जिसमें कल्पना के पिता फोन पर संबंधित व्यक्ति से बात करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
पिता ने बातचीत के दौरान कहा- “तुम मेरी बेटी को पैसे से तौल रहे हो। मैं क्या अपनी बेटी की मौत का सौदा करने के लिए बैठा हूं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि दोबारा उनकी बेटी की मौत का सौदा करने की कोशिश की गई तो वह इसका विरोध करेंगे।

कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा को दिलासा देती हुई परिजन।
पहले पढ़िए बातचीत के अंश, पिता रामशिरोमणि मिश्रा बोले- मुझे मंत्री, विधायक से कोई मतलब नहीं
- नेता: क्या मांग है आपकी, क्या बजट चाहते हैं बताइए।
- पिता: आप ये सब क्या बात कर रहे हैं?
- नेता: नहीं, मैं आपका शुभचिंतक हूं, इसलिए जनरल बात कर रहा हूं।
- पिता: नहीं जनरल बात नहीं, आपका फोन मेरे कई करीबियों के पास भी गया है।
- नेता: अच्छा।
- पिता: नहीं, मैं इन सब कामों से बिल्कुल नफरत करता हूं।
- नेता: हां।
- पिता: पहले मेरी बात सुनिए, आप बीजेपी में होंगे तो बीजेपी में रहे आइए।
- नेता: नहीं, वो बात नहीं है।
- पिता: हमको किसी पार्टी से कोई लेनादेना नहीं है, हमको सिर्फ और सिर्फ न्याय से मतलब है।
- नेता: समझिए बात को।
- पिता: न हमको किसी मंत्री से मतलब, न किसी विधायक से मतलब और न किसी सांसद से। हमें केवल और केवल न्याय से मतलब है।
- नेता: हमने तो आपकी मांग जानना चाहा है, बातचीत तो हो ही रही है हमारी आपकी अभी।
- पिता: गौतम जी ने मुझे खुद फोन दिया है, आप क्यों बात छिपा रहे हैं?
- नेता: हम आपके शुभचिंतक हैं, आप न पहचाने तो अलग बात।
- पिता: उन्होंने नाम नहीं बताया, उन्होंने बस इतना कहा कि मामा, एक सम्मानित व्यक्ति का फोन है, लीजिए बात करिए।
- नेता: हां।
- पिता: वो कह रहे थे कि जो मांग हो बताकर, ले-देकर, मामले को रफा-दफा करिए।
- नेता: हूं।
- पिता: अरे मेरी 22 साल की लड़की खत्म हो गई लापरवाही से, उसकी हत्या कर दी गई। शर्म आनी चाहिए उस आदमी को, जो सौदाबाजी कर रहा है।
- नेता: हूं।
- पिता: ऐसे आदमी को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए।
- पिता: चाहे वो व्यक्ति गांव का हो या शहर का।
- नेता: अगर आपको पसंद नहीं, तो अब आपसे बात नहीं करूंगा।
- पिता: हां, तो अब करिएगा भी नहीं, अगर आपको पर्याप्त डोज मिल गया हो तो। न ही अब सौदेबाजी के संबंध में मैं किसी से बात करूंगा, जो लिखा होगा, अब वो हो जाएगा।

अस्पताल में कल्पना बचाने की गुहार लगाती रही।
छठवें दिन भी भूख हड़ताल, बोले- शरीर जवाब देने लगा है
कल्पना के पिता न्याय की मांग को लेकर सोमवार को छठवें दिन भी सिरमौर चौराहे पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा- ईश्वर साक्षी है कि पानी के अलावा अन्न को हाथ तक नहीं लगाया है।
पिता का कहना है कि बेटी के साथ घटना होने के बाद भी उन्होंने कई दिन तक खाना नहीं खाया था। अब लगातार अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य कमजोर हो रहा है।
उन्होंने कहा- शरीर बूढ़ा हो गया है और जवाब देने लगा है। लेकिन इकलौती बेटी के जाने का दर्द ऐसा है कि कम होने का नाम नहीं लेता। अब यह लड़ाई केवल मेरी बेटी की लड़ाई नहीं है, बल्कि समाज की हर बेटी अब मेरी बेटी है। हर बेटी की जान मेरी बेटी जितनी ही कीमती है। किसी दूसरी बेटी के साथ ऐसा न हो, इसके लिए कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही चेतावनी दी- अगर न्याय नहीं मिला तो मैं इसी सिरमौर चौराहे पर बैठकर अपने प्राण त्याग दूंगा।

मामले की जानकारी लगते ही पुलिस जांच करने पहुंची थी।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, दो सप्ताह में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच गया है। आयोग के दस्तावेज के अनुसार शिकायतकर्ता डॉ. दिव्यांश द्विवेदी की 31 अगस्त की शिकायत को 3 सितंबर को आयोग के समक्ष रखा गया।
आयोग की पीठ ने मामले में संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और रीवा कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। दोनों से मामले में दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। दस्तावेज में मामले का केस नंबर 1823/12/36/2026 दर्ज है।
शिकायत में चिकित्सा लापरवाही, कर्तव्य में लापरवाही और जीवन एवं गरिमा के अधिकार के उल्लंघन जैसे आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में स्वतंत्र जांच कराने, मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सुरक्षित रखने तथा मातृ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का व्यवस्थित ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।
आयोग के आदेश में शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बताया गया है।

अस्पताल में स्ट्रेचर पर रखा था नवजात का शव।
महिला आयोग में भी शिकायत, सात सदस्यीय जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल
मामला महिला आयोग तक भी पहुंच चुका है। यहां शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा हैं। शिकायत की रसीद क्रमांक 2014111847959 है।
शिकायतकर्ता ने कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल से रीवा पहुंची सात सदस्यीय जांच टीम की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। विभागीय जांच टीम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
इस तरह मामला अब केवल अस्पताल की विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग तक शिकायत पहुंचने के बाद स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग और तेज हो गई है।

दिग्विजय सिंह बोले- कभी जीवित व्यक्ति का पोस्टमॉर्टम, कभी प्रसूता-नवजात की मौत
संजय गांधी अस्पताल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि रीवा के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल में कभी जीवित व्यक्ति का पोस्टमॉर्टम करने की कोशिश की जाती है तो कभी प्रसूता और नवजात की जान चली जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह व्यापमं से हुई भर्तियों का नतीजा तो नहीं, जिनकी वजह से ऐसी गंभीर गलतियां सामने आ रही हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की असफलता के कारण प्रदेशभर में कई बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता के लिए लड़ाई लड़ रही है। दिग्विजय सिंह ने नर्सिंग भर्तियों को लेकर भी प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए।

उपमुख्यमंत्री अनशन स्थल पहुंचे, पिता ने कहा- केवल औपचारिक आश्वासन
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल भी अनशन स्थल पहुंचे। उन्होंने कल्पना के परिजनों से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और पिता से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। हालांकि कल्पना के पिता ने कार्रवाई होने तक भूख हड़ताल खत्म करने से साफ इनकार कर दिया।
पिता का कहना था कि डिप्टी सीएम की ओर से केवल औपचारिक बातें की गई हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस तरह डिप्टी सीएम की मुलाकात के बाद भी अनशन खत्म नहीं हुआ।

डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल भी अनशन स्थल पहुंचे थे।
सोशल मीडिया पर भी गूंजा ‘जस्टिस फॉर कल्पना’
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में न्याय की मांग अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। ‘जस्टिस फॉर कल्पना’ अभियान के तहत लोग पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें साझा कर परिवार के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
कल्पना की मौत से पहले सामने आए वीडियो और मामले में हुई कार्रवाई के बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ी है। अलग-अलग सामाजिक संगठनों और आम लोगों की ओर से भी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। रीवा में चल रहे धरने को भी लगातार समर्थन मिल रहा है।
कल्पना-नवजात मौत मामले में सरकार पर तीन स्तर से बढ़ा दबाव
- पहला — परिवार न्याय की मांग को लेकर छठवें दिन भी अनशन पर है और कथित सौदेबाजी के ऑफर का दावा कर रहा है।
- दूसरा — अस्पताल में छह लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिनमें चार निलंबित हैं तथा अधीक्षक और डीन को पद से हटाया गया है।
- तीसरा — राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और रीवा कलेक्टर से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है, जबकि महिला आयोग में भी शिकायत कर विभागीय सात सदस्यीय जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।

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पोस्टमार्टम में कारण अभी स्पष्ट नहीं
जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। दोनों की मौत की वजह अभी साफ नहीं हुई है।
मां कल्पना मिश्रा की रिपोर्ट में मौत का कारण तय नहीं किया गया है और हिस्टोपैथोलॉजी, जांच व इलाज से जुड़े पूरे रिकॉर्ड मिलने के बाद राय देने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़िए…
