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धर्मशाला स्मार्ट सिटी के विकास के दावे सड़कों की हालत देखकर खोखले लग रहे हैं। 18 करोड़ रुपए से शुरू हुई स्मार्ट रोड की लागत 25.17 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, लेकिन यह सड़क अब भी जगह-जगह धंस रही है। बस स्टैंड से शिक्षा बोर्ड तक बनी इस सड़क पर सचिवालय के मुख्यद्वार और एसपी कार्यालय के सामने का बड़ा हिस्सा धंस गया है। कई जगहों पर विभागों और निजी भवन बनाने वालों की खुदाई के बाद सड़क गड्ढों में बदल गई है। मानसून के कारण स्थिति और खराब हो गई है। एक रोड सेफ्टी बैठक में एनजीओ प्रतिनिधि अरविंद शर्मा ने सड़क की खराब हालत का मुद्दा उठाया। इस पर कांगड़ा के डीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म हो चुका है। अब संबंधित विभाग को ही सड़क ठीक करवानी होगी। डेढ़ महीने पहले निर्माण कंपनी को दिया था नोटिस स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने करीब डेढ़ महीने पहले निर्माण कंपनी एमसीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें कंपनी को तुरंत मरम्मत करने के निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन एसडीओ ने बताया था कि धंसे हुए हिस्सों में जल शक्ति विभाग की पीने के पानी और सीवरेज लाइनें हैं। इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की ही है। देरी की वजह बिटुमेन प्लांट का बंद होना बताया गया था। 30 जून तक तकनीकी खामियां दूर करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। मरम्मत का काम ठेकेदार कर रहा: नगर निगम नगर निगम कमिश्नर जफर इकबाल के मुताबिक, सड़क की खुदाई करने वाले विभागों और लोगों पर जुर्माना लगाया गया है। मानसून में कई जगह सड़क धंसी है और अभी इसकी मरम्मत का काम ठेकेदार कर रहा है। साल 2019 में स्मार्ट रोड के लिए 18 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। यह काम आकाश कंस्ट्रक्शन को मिला था, लेकिन कंपनी काम अधूरा छोड़कर चली गई। दावा है कि इसके बावजूद उसे पूरा भुगतान कर दिया गया। 7 करोड़ से ज्यादा लागत बढ़ी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की बजाय उसका ठेका खत्म कर दिया गया। बाद में काम फिर से शुरू हुआ और लागत बढ़कर 25.17 करोड़ रुपए हो गई। अब सवाल यह है कि 7 करोड़ से ज्यादा लागत बढ़ने के बाद भी सड़क की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है?
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धर्मशाला में 25 करोड़ की स्मार्ट रोड धंसी:25.17 करोड़ तक पहुंची लागत; कई जगह पड़े गड्ढे; DC बोले-विभाग जल्द करे रिपेयरिंग
