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पाटन तहसीलदार की कुर्सी के ऊपर गिरी छत का प्लास्टर:टेबल-कंप्यूटर मलबे में दबे; रात में हादसा होने से बची जान




तहसील कार्यालय में बुधवार रात अचानक छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। प्लास्टर सीधे तहसीलदार की कुर्सी के ठीक ऊपर गिरा और नीचे रखी टेबल, कंप्यूटर समेत अन्य सामान इसकी चपेट में आ गया। जिस जगह यह प्लास्टर गिरा, वहां दिन के समय तहसीलदार के साथ रीडर और बाबू बैठकर सरकारी कामकाज करते हैं। घटना रात में हुई, इसलिए कार्यालय में कोई अधिकारी-कर्मचारी मौजूद नहीं था और बड़ा हादसा टल गया। सुबह जब कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो तहसीलदार की कुर्सी के आसपास छत का मलबा और टूटा हुआ प्लास्टर बिखरा मिला। टेबल पर रखा कंप्यूटर और अन्य सामान भी मलबे की चपेट में आने से नुकसान हुआ है। हालांकि, अभी नुकसान कितना हुआ है, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। जिस जगह छत का प्लास्टर गिरा है, वहां सामान्य दिनों में लगातार काम होता है। तहसीलदार इसी जगह बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और राजस्व से जुड़े मामलों की सुनवाई और दूसरे जरूरी काम निपटाए जाते हैं। उनके साथ रीडर और बाबू भी इसी कार्यालय में बैठते हैं। ऐसे में अगर यह घटना दिन के समय होती तो कई लोगों के इसकी चपेट में आने की आशंका थी। पहले देखिए तस्वीरें…
पुराना भवन, रखरखाव पर उठे सवाल
पाटन तहसील कार्यालय का भवन काफी पुराना बताया जा रहा है। लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे इस भवन में छत और दूसरे हिस्सों की हालत को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस छत के नीचे रोजाना अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में आम लोग बैठते हैं, उसकी समय रहते जांच क्यों नहीं हुई? सरकारी कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने काम के लिए पहुंचते हैं। तहसील कार्यालय में जमीन, नामांतरण, बंटवारा, आय, जाति, निवास और दूसरे राजस्व से जुड़े काम होते हैं। इसके चलते यहां पूरे दिन लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में भवन की मजबूती सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। जर्जर भवन को लेकर जल्द जांच की मांग
हादसे के बाद अब कार्यालय भवन की पूरी जांच कराने की मांग की जा रही है। केवल जिस जगह प्लास्टर गिरा है, उसकी मरम्मत के बजाय छत और भवन के दूसरे हिस्सों की भी जांच जरूरी है, ताकि कहीं कोई और हिस्सा कमजोर हो तो उसे समय रहते ठीक किया जा सके। एक घटना ने खोल दी बड़ी समस्या
पाटन तहसील कार्यालय में हुआ यह हादसा सिर्फ छत का प्लास्टर गिरने की घटना नहीं है, बल्कि सरकारी भवनों के रखरखाव पर भी सवाल खड़ा करता है। हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन अगर यही घटना कुछ घंटे पहले होती तो तस्वीर पूरी तरह अलग हो सकती थी। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर भवन की स्थिति की जांच करे और जरूरी मरम्मत कराए। ताकि अगली बार किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की नौबत न आए।



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