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यमुनानगर के फाइनेंसर मर्डर केस में हथियार सप्लायरों का एनकाउंटर:2 बदमाशों के पैर में लगी गोली, गिरफ्तार; हरभजन सिंह को मारी थीं गोलियां




यमुनानगर के मॉडल टाउन में फाइनेंसर एवं ट्रांसपोर्टर हरभजन सिंह हत्याकांड की जांच में पुलिस ने एनकांउटर किया है। गुरुवार को थाना छप्पर क्षेत्र में CIA-2 और थाना छप्पर पुलिस की संयुक्त टीम की बदमाशों से मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो बदमाशों के पैर में गोली लगी। दोनों की पहचान कुरुक्षेत्र निवासी राकेश और आर्यन के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को काबू कर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस के अनुसार, दोनों बदमाशों पर हरभजन सिंह की हत्या में शामिल शूटरों को हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस टीम दोनों की तलाश में थी। गुरुवार देर रात थाना छप्पर क्षेत्र में उनका सामना पुलिस टीम से हो गया। पुलिस के मुताबिक बदमाशों की ओर से फायरिंग की गई, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। गोली लगने से दोनों बदमाश घायल हो गए। शूटरों तक पहुंचने में कामयाबी की आशंका हरभजन हत्याकांड में पुलिस अब तक शूटरों और उनके मददगारों की तलाश में जुटी थी। राकेश और आर्यन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने हत्याकांड की कड़ी को जोड़ने का एक अहम रास्ता खुला है। पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि दोनों ने हथियार किससे लिए थे और किन शूटरों को उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि दोनों की भूमिका केवल हथियार सप्लाई करने तक थी या उन्हें हरभजन सिंह की हत्या की साजिश और वारदात के बारे में पहले से जानकारी थी। 3 सितंबर को जिम से निकलते ही मारी थीं गोलियां हरभजन सिंह की हत्या 3 सितंबर को मॉडल टाउन क्षेत्र में हुई थी। वह जिम से बाहर निकले ही थे कि बाइक सवार दो शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से हरभजन सिंह की मौत हो गई थी। वारदात के बाद दोनों शूटर मौके से फरार हो गए थे। हत्या के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ अंबाला यूनिट को भी जांच में शामिल किया गया था। सोशल मीडिया पोस्ट ली थी हत्या की जिम्मेदारी हत्या के बाद इस मामले में गैंगस्टर कनेक्शन भी सामने आया था। सोशल मीडिया पर सामने आई एक पोस्ट में काला राणा ग्रुप से जुड़े एक लाख रुपए के इनामी शुभम पंडित के नाम से हरभजन सिंह की हत्या की जिम्मेदारी लिए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच को गैंगवार और संगठित अपराध के एंगल से भी आगे बढ़ाया। अब हथियारों के नेटवर्क की जांच मुठभेड़ में घायल हुए राकेश और आर्यन से पूछताछ के बाद पुलिस का फोकस अब हथियार सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क पर रहेगा। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि हत्या में इस्तेमाल हथियार कहां से आए, उन्हें किसने उपलब्ध कराया और हथियारों को शूटरों तक पहुंचाने में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी शूटरों तक पहुंचना और हत्या की पूरी साजिश का खुलासा करना है। दोनों आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटेगी कि हरभजन सिंह की हत्या की योजना किसने बनाई थी और वारदात के पीछे असली सूत्रधार कौन था।



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