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लोकमंथन यात्रा पहुंची गोविंदसर:ग्रामीणों ने ढोल, घूमर और बैलगाड़ी से किया स्वागत; स्वदेशी जीवनशैली अपनाने की अपील




लोकमंथन दर्शन यात्रा राजस्थान गुरुवार को आदर्श गांव गोविंदसर पहुंची। ग्रामीणों ने ढोल, घूमर, तिलक, साफा और फूलों की मालाओं से यात्रा का पारंपरिक स्वागत किया। करणी माता मंदिर में दर्शन के बाद बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी से गांव का भ्रमण कराया गया। बैलगाड़ी और ऊंटगाड़ी से गांव का भ्रमण महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, जबकि बालिकाओं ने घूमर की प्रस्तुति देकर राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक दिखाई। गांव की आत्मनिर्भर और स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं ने बड़ी-पापड़, चक्की और चरखे का प्रदर्शन किया। पुरुषों ने खींप की डोरियां, जेवड़ी और बटियां बनाने की पारंपरिक कला दिखाई। पुरुषों ने खींप की डोरियां, बटियां बांधने की कला बताई ग्राम पंचायत भवन में ग्रामीण खेल चुठिया-दड़ी का आयोजन किया गया। बालिकाओं ने राजस्थानी परंपराओं पर आधारित नाटक, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। लोकदर्शन परिक्रमा यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने बताया कि लोकमंथन का मकसद गांवों की पुरानी परंपराओं, लोकज्ञान और संस्कृति को सामने लाना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे बुजुर्गों के अनुभव और पुरानी कहानियां मोबाइल से रिकॉर्ड करें। छात्रों से गांव का इतिहास और लोकगीत लिखने, साथ ही पुराने तालाबों, बावड़ियों और लोकदेवता स्थलों को बचाने का आह्वान किया। लोकदेवता स्थलों को बचाने का आह्वान उन्होंने यह भी बताया कि 4 से 6 दिसंबर तक जयपुर के जवाहर कला केंद्र में लोकमंथन का राष्ट्रीय कार्यक्रम होगा। सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी जसवंत सिंह खत्री ने महिलाओं और बालिकाओं की भागीदारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को सम्मान देना भारतीय संस्कृति की पुरानी परंपरा है। भारत में महिलाओं को शक्ति और देवी के रूप में माना जाता है। गोविंदसर ने स्वागत से लेकर गांव के भ्रमण, स्वरोजगार, मंच संचालन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से इस परंपरा को जीवंत किया। खत्री ने इसे वैभवशाली भारतीय जीवन पद्धति की झलक बताया। उन्होंने पश्चिमी और भारतीय खान-पान, पहनावे, बोलचाल और व्यवहार के अंतर का जिक्र करते हुए स्वदेशी जीवनशैली अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में टेकचंद बरडिया, रिछपाल सिंह, जगजीतेंद्र सिंह, संजीव प्रचारक, विनायक कुमार, हितेश कुमार, प्रदीप कुमार, नरसिंह, हीरालाल, हेमराज, श्रीनारायण, महेंद्र समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, बच्चे और विद्यार्थी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।



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