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स्मोकिंग की लत में पड़े लोगों के लिए हरिद्वार के एक आयुर्वेदिक कॉलेज के डॉक्टरों ने हर्बल सिगरेट तैयार की है। इसमें निकोटीन और तंबाकू की जगह 15 आयुर्वेदिक औषधियों का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है। नॉर्मल बीड़ी-सिगरेट जैसी दिखने वाली इस हर्बल दंडिका का इस्तेमाल डॉक्टरों की निगरानी और काउंसलिंग के साथ कराया जा रहा है। अब तक 40 लोग धूम्रपान छोड़ने के लिए इसके प्रयोग से जुड़ चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर कुछ लोगों ने सिगरेट की तलब यानी क्रेविंग और लंबे समय से रहने वाले कफ में कमी की बात कही है। हालांकि अभी 40 लोगों का डाटा पूरा किया जाना है, जिसके बाद उसका एनालिसिस होगा। इसलिए फिलहाल इसके असर को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। इसी बीच योग गुरु स्वामी रामदेव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे हर्बल हुक्के के जरिए औषधीय धूमपान का प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। हालांकि यह प्रयोग आयुर्वेदिक कॉलेज की हर्बल सिगरेट के शोध से अलग है।
पहले हर्बल सिगरेट के बारे में जानिए… तंबाकू और निकोटीन की जगह 15 आयुर्वेदिक औषधियां हरिद्वार में स्थित ऋषिकुल राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक कॉलेज की रिसर्चर डॉ. प्रगति नेगी के मुताबिक हर्बल दंडिका में करीब 15 औषधियों का संयोजन इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए आयुर्वेद की संहिताओं को आधार बनाया गया। इनमें मुलेठी और पंचवल्कल जैसी औषधियां शामिल हैं। पंचवल्कल में पीपल और बरगद जैसी छालों का इस्तेमाल किया जाता है। दंडिका का बाहरी आवरण तैयार करने के लिए तेंदू के पत्ते राजस्थान से मंगाए जा रहे हैं। वहीं इसमें इस्तेमाल होने वाली औषधियों का संयोजन शोध टीम ने तैयार किया है। इसमें किसी भी तरह का तंबाकू या निकोटीन नहीं है। एक दंडिका तैयार करने में करीब 7 से 8 रुपये का खर्च आता है। फिलहाल कॉलेज की ओर से धूम्रपान छोड़ने के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को इसे निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। नशामुक्ति के विषय से भी आया हर्बल दंडिका बनाने का विचार डॉ. प्रगति नेगी बताती हैं कि वह अगद तंत्र विभाग से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। उनके सिलेबस में नशामुक्ति से जुड़े विषय भी शामिल हैं। इसी दौरान उन्होंने देखा कि धूम्रपान की समस्या किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। युवा से लेकर मध्यम आयु और बुजुर्ग तक इसकी चपेट में हैं। उनके मुताबिक इसी सामाजिक समस्या को देखते हुए यह विचार आया कि ऐसा विकल्प तैयार किया जाए जो धूम्रपान की आदत से बाहर निकलने की प्रक्रिया में लोगों की मदद कर सके। इसके लिए चरक, सुश्रुत और अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में दिए गए संदर्भों का अध्ययन किया गया और औषधियों का संयोजन तैयार किया गया। डॉक्टर भावना बोलीं- नशे की समस्या स्वास्थ्य के साथ सामाजिक बुराई भी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भावना मित्तल के मुताबिक नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बुराई भी है। नशे से पीड़ित व्यक्ति खुद प्रभावित होता है, जबकि उसके परिवार के लोग भी पैसिव स्मोकर्स बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अगद तंत्र विभाग की पूरी टीम ने यह रिसर्च और डिजाइन तैयार किया। विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश चंद तिवारी, डॉ. वेद भूषण शर्मा, शोधार्थी डॉ. प्रगति नेगी और विभाग की पूरी टीम इस काम से जुड़ी है। डॉ. भावना के मुताबिक टीम ने आयुर्वेद में आचार्यों द्वारा वर्णित धूमपान विधि के सिद्धांत को आधार बनाकर ‘शमन धूमपान’ डिजाइन किया है। इसमें इस्तेमाल होने वाली 15 औषधियां तंबाकू या निकोटीन का विकल्प नहीं, बल्कि इस हर्बल संयोजन का हिस्सा हैं। पहले काउंसलिंग, फिर तय होता है दंडिका का इस्तेमाल कॉलेज में आने वाले व्यक्ति को सीधे हर्बल दंडिका नहीं दी जाती। उसे पहले ओपीडी में 10 रुपये की पर्ची कटवानी होती है। इसके बाद चिकित्सक उसकी काउंसलिंग करते हैं। इसमें उम्र, परिवार की स्थिति, कितने वर्षों से धूम्रपान कर रहा है और रोजाना कितनी मात्रा में धूम्रपान करता है, जैसी जानकारी ली जाती है। इसके अलावा ब्रीथ टेस्ट, वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर सहित जरूरी स्वास्थ्य जांच की जाती हैं। जांच और काउंसलिंग के बाद चिकित्सक तय करते हैं कि संबंधित व्यक्ति के लिए हर्बल दंडिका का इस्तेमाल किया जाना है या नहीं। यानी कॉलेज में इसे केवल सिगरेट के बदले दूसरी चीज देकर छोड़ देने की प्रक्रिया नहीं बनाया गया है। व्यक्ति की धूम्रपान की आदत, स्वास्थ्य स्थिति और नशा छोड़ने की इच्छा को देखते हुए पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। CTRI में पंजीकृत है शोध, 40 लोगों का डाटा होगा पूरा डॉ. भावना मित्तल के मुताबिक यह अभी रिसर्च वर्क है। इसे वैज्ञानिक आधार देने के लिए क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री-इंडिया (CTRI) में पंजीकृत कराया गया है। उन्होंने बताया कि टीम 40 मरीजों का डाटा पूरा करेगी। इसके बाद सभी आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण किया जाएगा। विश्लेषण से जो परिणाम सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे इसे सार्वजनिक स्तर पर लाने को लेकर निर्णय लिया जाएगा। डॉ. भावना के मुताबिक अभी तक लोगों की ओर से काफी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली है। समाचार पत्रों की कटिंग और सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो व रील्स देखकर लोग खुद कॉलेज पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि सबसे सकारात्मक बात यह है कि कई लोग अपनी इच्छा से धूम्रपान छोड़ने के लिए आ रहे हैं। डॉ. बोलीं- स्मोकर्स कफ में कमी की बात कह रहे लोग डॉ. प्रगति नेगी के मुताबिक हर्बल दंडिका इस्तेमाल करने वाले लोगों से शुरुआती स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। कुछ लोगों ने धूम्रपान की तलब यानी क्रेविंग कम होने और लंबे समय से रहने वाले कफ में सुधार की बात कही है। हालांकि अभी ये शुरुआती प्रतिक्रियाएं हैं और शोध पूरा होने के बाद ही इसके प्रभाव को लेकर ठोस निष्कर्ष सामने आएगा। 12-15 साल से धूम्रपान कर रहे हेमा नंद ने भी शुरू किया इस्तेमाल इस प्रयोग में शामिल हेमा नंद भट्ट बताते हैं कि वह 12 से 15 साल से नियमित रूप से धूम्रपान कर रहे थे। उनका कहना है कि लंबे समय तक उनके मन में इसे छोड़ने का विचार नहीं आया, लेकिन वायरल फीवर और कफ की परेशानी के दौरान धूम्रपान छोड़ने की इच्छा हुई। हेमा नंद के मुताबिक उनकी डॉक्टर वेद भूषण शर्मा से लगातार बातचीत होती थी। उन्होंने कॉलेज में एक अन्य मरीज पर चल रहे इस प्रयोग को देखा था। इसके बाद उनकी भी इच्छा हुई कि वह इसे आजमाएं। डॉक्टर शर्मा ने उन्हें डॉ. भावना मित्तल से मिलवाया, जिसके बाद उनकी स्टडी और जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई। रामदेव भी हर्बल हुक्का पिलाते नजर आए… वहीं, हरिद्वार से ही योग गुरु स्वामी रामदेव का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में रामदेव अपनी संस्था की योग शिक्षिका के साथ पीतल के हुक्के का इस्तेमाल करते हैं। वह खुद चिलम में प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और मसाले मिलाते हैं। वीडियो में चिलम तैयार करते समय मुलेठी, हल्दी यानी करक्यूमिन, थोड़ी राई, अजवाइन और देशी कपूर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद रामदेव ‘काकड़ासिंगी’ नाम की जड़ी-बूटी डालते हैं और इसे सांस से जुड़ी बीमारियों के लिए उपयोगी बताते हैं। वह पतंजलि की ओर से बनाई जाने वाली ओरोग्रिट, करक्यूमिन गोल्ड, ब्रोन्कोम, श्वासारि और कंठामृत जैसी श्वसन संबंधी औषधियों का भी जिक्र करते हैं। कभी गले से तो कभी नाक से करवाया इनहेल प्रदर्शन में योग शिक्षिका पहले हुक्के की पाइप से धुआं अंदर लेती हैं और फिर रामदेव के निर्देश पर एक-एक नाक के छिद्र को दबाकर धुआं अंदर-बाहर लेती हैं। वीडियो में वह बताती हैं कि इससे श्वास नली अंदर तक साफ होने और राहत मिलने जैसा महसूस हो रहा है। रामदेव इस दौरान युवाओं के सिगरेट पीने के चलन पर टिप्पणी करते हुए इसे सामान्य हुक्का या नशे के लिए किया जाने वाला धूम्रपान नहीं बताते। वह मजाकिया अंदाज में यह भी कहते हैं कि कोई यह न समझे कि उनकी योग शिक्षिका हुक्का पी रही हैं या उन्होंने हुक्का बार खोल लिया है, बल्कि यह औषधीय प्रयोग का प्रदर्शन है। —————————
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स्मोकिंग की लत छुड़ाएगी उत्तराखंड में तैयार 'हर्बल सिगरेट':तंबाकू-निकोटीन की जगह 15 आयुर्वेदिक औषधियां; बाबा रामदेव भी 'हर्बल हुक्का' पिलाते दिखे
