Headlines

ठेकेदारों ने बनाया एक्स्ट्रा भुगतान का दबाव…काम किया बंद:बिलासपुर में बिलो रेट और शर्तों पर लिया काम, अब लागत बढ़ने का बनाया बहाना




बिलासपुर नगर निगम में करीब 70 करोड़ के सड़क डामरीकरण के काम में ठेकेदारों ने बाधा खड़ी कर दी है। ठेकेदारों ने डामर, इमल्शन के रेट में दोगुनी वृद्धि को लेकर काम करने से इनकार कर दिया है। दरअसल, बिलो दर पर काम का ठेका लेने वाले ठेकेदारों ने टेंडर की शर्तों का पालन करने का अनुबंध किया था। लेकिन, अब महंगाई का बहाना बनाया जा रहा है। ऐसे में अनुबंध के मुताबिक काम नहीं होने पर निगम प्रशासन ठेकेदारों के खिलाफ पेनाल्टी की कार्रवाई कर सकता है। संघ का कहना है कि बढ़ी दरों पर काम करना संभव नहीं है, इसलिए ठेकेदारों को अतिरिक्त मूल्यवृद्धि दी जाए। संघ ने पत्र में अलग-अलग निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने का उल्लेख करते हुए बताया है कि डामर और इमल्शन की दर करीब 100 प्रतिशत, एलडीओ की 75 प्रतिशत, थर्मो प्लास्टिक पेंट की 50 प्रतिशत और डीजल की करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इन सामग्रियों का उपयोग सड़क निर्माण में होता है। सामग्री की लागत बढ़ने से काम की लागत प्रभावित ठेकेदारों के अनुसार, टेंडर के समय तय दरों पर काम करने के बावजूद सामग्री की लागत बढ़ने से काम की लागत प्रभावित हो रही है। संघ ने अपने पत्र में दावा किया है कि पूर्व में पीडब्ल्यूडी में भी ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त मूल्यवृद्धि प्रदान की गई है। पत्र के अनुसार मुंगेली, बिलासपुर और सक्ती डिवीजन में पीडब्ल्यूडी द्वारा अंतर की राशि का भुगतान किया गया है। उन्होंने निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे से मिलकर उन्हें विभागीय मंत्री एवं डिप्टी सीएम अरूण साव के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें पीडब्ल्यूडी की तर्ज पर मूल्य वृद्धि देने की मांग की। ठेकेदारों के प्रतिनिधिमंडल में आलोक सिंह ठाकुर, सौरभ मिश्रा, राजकुमार तिवारी, संजय कुमार के़डिया, गजराज इंजीनियरिंग, अविनाश बिल्डकॉन अशोक तिवारी, वैभव अग्रवाल सहित अन्य शामिल थे। समय पर काम पूरा करने की जिम्मेदारी निगम के कई निर्माण कार्यों में ठेकेदारों की मनमानी और समय-सीमा के भीतर काम पूरा नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार काम की गति धीमी रहती है और समय निकलने के बाद ठेकेदार अतिरिक्त समय या अन्य कारणों का हवाला देते हैं। ऐसे में यदि ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते और बाद में निर्माण सामग्री महंगी होने का तर्क देकर अतिरिक्त भुगतान मांगते हैं तो इसका सीधा दबाव निगम के बजट पर पड़ता है। ठेका लेने के बाद काम समय पर पूरा करना ठेकेदार की जिम्मेदारी है, पर ऐसा नहीं कर रहे हैं। ठेकेदारों ने काम नहीं करने बनाया दबाव, निर्माण कार्यों पर होगा सीधा असर नगर निगम के डामरीकरण कार्यों में अब ठेकेदारों की ओर से बढ़ी निर्माण सामग्री की कीमतों का हवाला देकर अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है। नगर निगम ठेकेदार संघ ने आयुक्त प्रकार कुमार सर्वे को पत्र देकर डामर, इमल्शन, एलडीओ, डीजल और थर्मोप्लास्टिक पेंट के दाम बढ़ने का उल्लेख करते हुए अतिरिक्त मूल्यवृद्धि देने की मांग की है। ठेकेदारों का तर्क है कि मौजूदा दरों पर काम करना संभव नहीं है। लेकिन, अब बात यह भी आ रही है कि जब ठेकेदारों ने टेंडर लिया था, तब उसकी दरें, नियम-शर्तें और काम पूरा करने की समय-सीमा पहले से निर्धारित थी। इन्हीं शर्तों को स्वीकार करने के बाद ठेकेदारों ने निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लिया और काम हासिल किया। काम छोड़ने से निगम पर दोहरा बोझ निर्माण कार्य अधूरे छोड़ने या समय पर पूरा नहीं करने की स्थिति में निगम को कई बार दोबारा प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। इससे एक ओर नागरिकों को सड़क और विकास कार्यों का लाभ समय पर नहीं मिलेगा, वहीं दूसरी ओर निगम पर दोबारा टेंडर, लागत और निगरानी का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। अब ठेकेदारों की अतिरिक्त राशि की मांग से बढ़ी लागत का पूरा भार शासन या निगम पर डालने की व्यवस्था आखिर कब तक चलेगी। टेंडर लेते समय जोखिम स्वीकार करने वाले ठेकेदारों को पहले समय-सीमा में काम पूरा करने की जवाबदेही निभानी होगी। कमिश्नर ने कहा- शासन से लेंगे मार्गदर्शन नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे का कहना है कि शहर में सड़क निर्माण के विभिन्न कार्यों के लिए अलग अलग समय निर्धारित है। डामरीकरण के कार्य 15 अक्टूबर के बाद होंगे, लेकिन अनुबंध की अवधि में कार्य नहीं करने पर पेनाल्टी लगाने के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों के प्रतिनिधिमंडल ने डामरीकरण के कार्यों के लिए दर वृद्धि की मांग की है। इसके विषय में उनकी मांग प्रदेश स्तर पर चल रही है, इसलिए इस बारे में शासन स्तर पर मार्गदर्शन लिया जाएगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *