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हाईकोर्ट बोला ₹1000 प्रति गज के हिसाब से मिलेगी जमीन:ऑपरेशन ब्लू स्टार के 133 पीड़ितों को राहत, 38,400 प्रति गज के रेट पर रोक




पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अमृतसर में दुकानें और कारोबार उजड़ने के बाद पिछले करीब 42 वर्षों से अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे 133 प्रभावित दुकानदारों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों को अमृतसर की मालमंडी में वैकल्पिक जगह पुराने निर्धारित रेट के आधार पर उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने साफ किया कि प्रभावितों को 1988 में गलियारा परियोजना के तहत तय किए गए 1000 रुपए प्रति गज के आधार पर जमीन उपलब्ध कराने का रास्ता अपनाया जाए। इस फैसले से उन 133 परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्ष 1984 की घटनाओं के बाद से पुनर्वास और अपनी संपत्ति से जुड़े अधिकार के लिए लगातार अदालतों के चक्कर काट रहे थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उजड़ी दुकान-कारोबार ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अमृतसर में कई दुकानदारों और व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ था। दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के उजड़ने के बाद प्रभावित लोग लंबे समय से अपने पुनर्वास और वैकल्पिक जगह की मांग कर रहे थे। इन लोगों के लिए मालमंडी में वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने का मामला वर्षों तक अलग-अलग स्तरों पर चलता रहा। लंबे समय तक विवाद अदालतों और सरकारी स्तर पर लंबित रहा, जिसके कारण प्रभावित परिवारों को अपने हक के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मालमंडी में वैकल्पिक जगह मिलने की उम्मीद फिर से जगी है। सरकार के बढ़ाए गए जमीन के रेट पर हाईकोर्ट सख्त मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से जमीन के बढ़ाए गए रेट को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने माना कि ये लोग करीब 42 वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय से प्रभावित और विस्थापित लोगों के मामले पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए था। अदालत ने पुराने निर्धारित रेट के आधार पर ही प्रभावितों को वैकल्पिक जगह देने के निर्देश जारी किए। सरकार द्वारा बाद में बढ़ाए गए जमीन के रेट का बोझ प्रभावित लोगों पर डालने के मामले में अदालत ने राहत देते हुए पुराने आधार पर आवंटन का रास्ता साफ किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नहीं सुलझा मामला पीड़ितों के अनुसार, यह मामला लंबे समय तक अलग-अलग अदालतों और सरकारी स्तर पर चलता रहा। वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों को 10 हजार रुपए प्रति गज के आधार पर राशि जमा करवाने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामला वापस हाईकोर्ट भेजा गया था। मामले में आगे जनवरी 2020 में 14,450 रुपए प्रति गज के हिसाब से जमीन के आवंटन का फैसला किया गया। हालांकि, इसके बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। जुलाई 2022 में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने जमीन का रेट बढ़ाकर 38,400 रुपए प्रति गज कर दिया। जमीन के रेट में इस भारी बढ़ोतरी के बाद 133 प्रभावितों के सामने एक बार फिर बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। पीड़ितों का कहना था कि वे पहले ही कई दशकों से विस्थापन और कानूनी लड़ाई का सामना कर रहे हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते जमीन के रेट का बोझ उन पर डालना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बाद प्रभावित लोगों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने बढ़ाए गए रेट को कम करने और पुराने निर्धारित आधार पर राहत देने की मांग की। बढ़ते रेट का बोझ डालना न्यायसंगत नहीं पीड़ितों की ओर से अधिवक्ता सौरव खुराना और अन्य वकीलों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि करीब चार दशक से विस्थापित लोगों पर लगातार बढ़ते जमीन के रेट का बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। वकीलों ने अदालत के सामने प्रभावित लोगों की लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई और उनके पुनर्वास के मामले को रखा। उनका कहना था कि 42 साल तक इंतजार करने वाले लोगों को अब बढ़ी हुई कीमतों के कारण राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद प्रभावितों की मांग स्वीकार कर ली। 38,400 रुपए प्रति गज के रेट पर रोक हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के बढ़े हुए 38,400 रुपए प्रति गज के रेट को लेकर राहत देते हुए पुराने निर्धारित आधार पर वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश के बाद अब 133 प्रभावित परिवारों को अमृतसर की मालमंडी में वैकल्पिक जगह मिलने की उम्मीद है। हाईकोर्ट का यह फैसला उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो वर्ष 1984 के बाद से अपने पुनर्वास और संपत्ति से जुड़े अधिकार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 42 साल के इंतजार के बाद जगी पुनर्वास की उम्मीद करीब चार दशक से अधिक समय तक चले इस विवाद में हाईकोर्ट का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत लेकर आया है। वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रहे 133 प्रभावितों को अब मालमंडी में वैकल्पिक जगह मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उजड़े दुकानदारों और कारोबारियों के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि जमीन के रेट को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद उनके पुनर्वास में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था।



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