Headlines

979 करोड़ का जेजेएम घोटाला, 6 अफसरों पर चलेगा केस:कोर्ट में तय होगा जिम्मेदारों ने क्या की गड़बड़ी, जानिए- ACB के पास कौनसे सबूत




करीब 979 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में सरकार ने जलदाय विभाग के 7 अफसरों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इनमे से 6 आरोपी जेल में बंद हैं। ACB आरोपियों के खिलाफ जुटाए पुख्ता सबूत पहले ही चार्जशीट के जरिए पेश कर चुकी है। अब कोर्ट में उन सबूतों के आधार पर ही तय होगा कि जिम्मेदारों ने कहां क्या गड़बड़ी की। फर्जी टेंडर से जुड़े इस घोटाले में कौनसे अफसर पर क्या आरोप हैं? ACB के पास कौनसे पुख्ता सबूत हैं जो इनके लिए मुसीबत बन सकते हैं? पढ़िए इस स्पेशल स्टोरी में… सबसे पहले जानिए क्या था जेजेएम घोटाला? सितंबर-2023 में केंद्र सरकार की योजना ‘जल जीवन मिशन’ के तहत राजस्थान में 979.27 करोड़ के फर्जी टेंडर हुए थे। आरोप है जयपुर की दो कंपनियों मै. श्याम ट्यूबवैल और मै. गणपति ट्यूबवेल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से ये टेंडर हासिल किए थे। विभाग में इनके खिलाफ कई बार शिकायत हुई। लेकिन बावजूद इसके बिना एक्शन लिए कंपनियों को टेंडर जारी कर दिए। मामला पहली बार तब पकड़ में आया जब ACB ने रेड मारते हुए जलदाय विभाग के एक इंजीनियर मायालाल सैनी को दबोचा। इसके बाद घोटाला सामने आया था। ACB के बाद ईडी और सीबीआई भी जांच कर चुकी हैं। रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल (तत्कालीन एसीएस जलदाय विभाग), पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार होकर जेल में हैं। एसीबी ने चार्जशीट में लगाए आरोप राजस्थान एसीबी ने जेजेएम घोटाले में 4 जून 2026 को करीब 17,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इससे पहले 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर चुकी थी। चार्जशीट में शामिल आरोपी दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, नीरिल कुमार, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक और सुबोध अग्रवाल हैं। इससे पहले ACB की एसआईटी ने सभी आरोपियों को 17 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। केवल एक आरोपी अरुण श्रीवास्तव को कोर्ट से बेल मिली है। बाकी सभी 10 आरोपी अभी-भी जेल में बंद हैं। जेल में बंद 7 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हाल ही में सरकार ने दी है। सिलसिलेवार जानते हैं, किस आरोपी पर क्या आरोप हैं और ACB के पास इनके खिलाफ कौनसे पुख्ता सबूत हैं? 1. कृष्ण दीप गुप्ता, तत्कालीन मुख्य अभियंता, ग्रामीण आरोप क्या : टेंडर प्रक्रिया में फर्जी अनुभव और वर्क-कम्प्लीशन प्रमाणपत्रों के आधार पर कंपनियों को पात्र मानने और कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर ठेके दिलाने में भूमिका। ACB के पास सबूत क्या? फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर फर्मों की पात्रता और टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़ी फाइलें-दस्तावेज ACB के रिकॉर्ड में है। 2. शुभांशु दीक्षित, तत्कालीन सचिव, राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड आरोप क्या : फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर देने की प्रक्रिया में अधिकारियों की मिलीभगत में शामिल। नियमों को दरकिनार कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाया। ACB के पास सबूत क्या? टेंडर प्रक्रिया और संबंधित निर्णयों में प्रशासनिक भूमिका, ACBका आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और नियमों की अनदेखी हुई। 3. दिनेश गोयल, तत्कालीन मुख्य अभियंता, विशिष्ट परियोजना-जेजेएम आरोप क्या : मिलीभगत में शामिल, टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की, जबकि पता था की आवेदक कंपनी के लगाए दस्तावेज फर्जी हैं। 17 फरवरी को उदयपुर में एक होटल से गिरफ्तार किया। ACB के पास सबूत क्या? टेंडर नंबर 73/2022-23 और 74/2022-23 में दोनों फर्मों के अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच करनी थी। ACB को पड़ताल के दौरान विभाग को दी ऐसी कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। 4. अरुण श्रीवास्तव, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता, प्रथम आरोप क्या : टेंडर जारी करने वाली कमेटी के मेंबर थे। एसीबी ने अनुसार इन्हें पता था कि दस्तावेज फर्जी हैं उसके बाद भी कोई आपत्ति नहीं की और टेंडर जारी कर दिए। आरोपी को दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। ACB के पास सबूत क्या? फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए फर्जी ई-मेल आईडी पर ई-मेल भेजे गए। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में ACB ने इसे जानबूझकर किया गया कृत्य बताया है। 5. महेंद्र प्रकाश सोनी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, अजमेर आरोप क्या : फर्जी अनुभव और वर्क-कम्प्लीशन प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों को पात्र बनाने और कथित अनियमितताओं में भूमिका रही, ACB ने इन के खिलाफ अलग से भी FIR में नामजद किया था। ACB के पास सबूत क्या? फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों को स्वीकार करने और उनके आधार पर कंपनियों को पात्रता देने की प्रक्रिया में भूमिका के सबूत हैं। 6. दिलीप कुमार गौड़, तत्कालीन मुख्य अभियंता/तकनीकी सदस्य आरोप क्या : कंपनी के फर्जी डॉक्यूमेंट होने के बावजूद तकनीकी स्तर पर टेंडर प्रक्रिया को मंजूरी दे दी। किसी भी प्रकार से उसे रोकने की कोशिश नहीं की। न ही सरकारी एजेंसियों को सूचना दी। जयपुर से गिरफ्तार किये गए। ACB के पास सबूत क्या? : फर्जी प्रमाणपत्रों के बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, चाहते तो टेंडर होने से रोक भी सकते थे, ऐसी कोई टिप्पणी एसीबी को नहीं मिली है। 7. विशाल सक्सेना, पद- तत्कालीन अधिशासी अभियंता, शाहपुरा आरोप क्या : फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच के बाद उन्हें सही बताने वाली रिपोर्ट तैयार करने और उसके आधार पर आगे की टेंडर प्रक्रिया को बढ़ाने में भूमिका का आरोप। जांच में ACB ने आरोप लगाया कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर कंपनियों को करीब 979 करोड़ रुपए के टेंडर मिले। एसीबी की टीम ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन से इन्हें गिरफ्तार किया था। ACB के पास सबूत क्या? फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच के बाद उन्हें सही मानने वाली रिपोर्ट ही सबसे बड़ा सबूत है। इसी प्रक्रिया के जरिए संबंधित कंपनियों को टेंडर हासिल करने में मदद मिली थी। कंपनी ने मेल भेजकर बताया, फिर भी एक्शन नहीं जेजेएम घोटाले में करीब 979.27 करोड़ रुपए की बंदरबांट हुई। एसीबी की पड़ताल के अनुसार टेंडर की शर्तों में कथित तौर पर नियमों के विपरीत 50 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट में साइट विजिट सर्टिफिकेट की अनिवार्यता जोड़ी गई। इससे टेंडर में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। इस बीच जयपुर की दोनों फर्मों ने IRCON इंटरनेशनल के फर्जी लेटर हेड पर अनुभव और वर्क-कम्प्लीशन सर्टिफिकेट तैयार किया। एसीबी का मानना है कि टेंडर से पहले ही इसकी प्लानिंग हो चुकी थी। इसके बाद जब कंपनी IRCON को इस फर्जीवाड़े का पता चला तो उसने 16 फरवरी 2023 को ई-मेल के जरिए विभाग को शिकायत भेजी। लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने कोई एक्शन नहीं लिया गया। क्या सभी अधिकारियों को नौकरी से टर्मिनेट किया जाएगा? लीगल मामलों के जानकार के अनुसार अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद तुरंत नौकरी से टर्मिनेट किया जाना जरूरी नहीं हैं। आरोपियों के खिलाफ केस चलना और विभागीय कार्रवाई दोनों अलग-अलग प्रक्रिया हैं। सरकार या विभाग सेवा नियमों के तहत निलंबन, विभागीय जांच और अन्य कार्रवाई का निर्णय ले सकती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *