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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में जेंडर ऐप के जरिए लोगों को फंसाने और ब्लैकमेल करने के मामले में कार्रवाई के बाद हॉस्टलों में चल रही जांच और सीलिंग अब विवाद में बदल गई है। वकारुल मुल्क हॉल में सील किए गए कमरों को खुलवाने और कमरा आवंटित कराने के लिए प्रॉक्टर कार्यालय में कथित तौर पर दबाव बनाने, गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में तीन युवकों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया है। इनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई भी की गई है। सीओ तृतीय सर्वम सिंह के मुताबिक, मामले में आगे की अन्य कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, इसी सीलिंग कार्रवाई के विरोध में वीएम हॉल के चार पूर्व छात्र शनिवार देर शाम प्रॉक्टर कार्यालय पहुंच गए थे। उन्होंने अपने कमरों को सील किए जाने पर आपत्ति जताई और इसका कारण पूछा। विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें बताया गया कि वे वर्तमान में हॉल में रहने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इस दौरान बहस होने पर चारों को प्रॉक्टर कार्यालय में रोक लिया गया और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस उन्हें सिविल लाइंस थाने ले गई।
जेंडर ऐप मामले के बाद शुरू हुई हॉस्टल की जांच
AMU के वीएम हॉल में जेंडर ऐप के जरिए लोगों को फंसाने और ब्लैकमेल किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रॉक्टर टीम ने हॉस्टलों में जांच और कार्रवाई शुरू की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टलों में रह रहे बाहरी लोगों और ऐसे पूर्व छात्रों की भी जांच की, जिनके पास वर्तमान में हॉल में रहने की अनुमति नहीं है। इसी अभियान के दौरान वीएम हॉल समेत अन्य हॉस्टलों में कई कमरों को सील किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि हॉस्टल में रहने की अनुमति केवल अधिकृत छात्रों को है। जिन लोगों का वर्तमान में हॉल आवंटन नहीं है, उनके कमरों को खाली कराकर सील किया गया।
सील कमरों का विरोध करने पहुंचे पूर्व छात्र
शुक्रवार रात हुई कार्रवाई के बाद शनिवार देर शाम वीएम हॉल के चार पूर्व छात्र प्रॉक्टर कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने कमरों में सील लगाने पर आपत्ति जताई और अधिकारियों से इसका कारण पूछा। प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से उन्हें बताया गया कि वे पूर्व छात्र हैं और वर्तमान में हॉल में रहने के लिए अधिकृत नहीं हैं। आरोप है कि इसी बात को लेकर कार्यालय में बहस हो गई। इसके बाद चारों को वहीं रोक लिया गया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस चारों को सिविल लाइंस थाने ले गई। प्रॉक्टर प्रो. नवेद खान की ओर से पुलिस को बताया गया कि चारों पूर्व छात्र हैं और उन्हें वर्तमान में हॉल में रहने की अनुमति नहीं है।
वकारुल मुल्क हॉल में तीन युवकों पर दबाव बनाने का आरोप
इसी सीलिंग कार्रवाई के बाद वकारुल मुल्क हॉल में भी विरोध सामने आया। हॉल के प्रोवोस्ट/छात्रावास अध्यक्ष सरफराज अहमद ने सिविल लाइंस थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया कि 12 सितंबर को दोपहर करीब 3:30 बजे तीन युवक उनके कार्यालय में पहुंचे। तहरीर के मुताबिक, तीनों ने बिना अनुमति कार्यालय में प्रवेश किया। उन्होंने Ph.D. स्कॉलर मोहम्मद सुफियान, वेस्ट एशियन एंड नॉर्थ अफ्रीकन स्टडीज विभाग, के कमरे के आवंटन को लेकर प्रोवोस्ट पर दबाव बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि युवकों ने हॉल प्रशासन द्वारा सील किए गए कमरों को खोलने के लिए भी दबाव बनाया। प्रोवोस्ट ने उन्हें स्पष्ट किया कि कमरे का आवंटन किसी दबाव या बाहरी प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के नियमों और सक्षम अधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
बात बढ़ी तो गाली-गलौज और धमकी का आरोप
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की बात कहे जाने के बाद तीनों युवक उत्तेजित हो गए और उन्होंने प्रोवोस्ट के साथ गाली-गलौज व अभद्रता की। आरोप है कि तीनों ने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। शिकायत में बिलाल चौधरी पर राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर धमकाने का आरोप लगाया गया है। तहरीर के अनुसार, उसने अपने पिता के राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए प्रोवोस्ट को झूठे पुलिस मुकदमों में फंसाने और नौकरी-कैरियर खराब करने की धमकी दी।
गुफरान, बाबर और बिलाल नामजद
तहरीर में तीनों की पहचान गुफरान पुत्र इमरान खान निवासी जसौला, मुजफ्फरनगर, बाबर पवार पुत्र मशकूर निवासी मजरी, रामपुर मनिहारान और बिलाल चौधरी पुत्र जनाब अली निवासी कैराना, शामली के रूप में की गई है।
प्रोवोस्ट की ओर से पुलिस से तीनों के खिलाफ अनधिकृत प्रवेश, अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी और विश्वविद्यालयीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की मांग की गई है।
तीनों हिरासत में, शांति भंग की कार्रवाई
सीओ तृतीय सर्वम सिंह ने बताया कि प्रॉक्टर की ओर से तीनों के हॉल में अनधिकृत रूप से रहने और सीलिंग कार्रवाई के बाद विवाद की बात कही गई है। तीनों आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई भी की गई है। मामले में अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि जेंडर ऐप मामले के बाद शुरू हुई हॉस्टल की जांच और अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ सीलिंग कार्रवाई के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित छात्रों के बीच विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। हालांकि, तहरीर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
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जेंडर ऐप मामले के बाद हॉस्टल सीलिंग का विरोध:AMU के वीएम हॉल प्रोवोस्ट पर बनाया दबावा, 3 पूर्व छात्रों पर FIR, तीनों हिरासत में
