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- The Municipal Corporation And JUSCO Are At Loggerheads Over Installing New Streetlights, With Most Lights 6 Years Old And Out Of Order; The Capital Plunges Into Darkness.
रांची20 घंटे पहले
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राजधानी में स्ट्रीट लाइटों के रख-रखाव को लेकर रांची नगर निगम और झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जुडको) आमने-सामने आ गए हैं। निगम ने जुडको की ओर से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए जारी टेंडर पर आपत्ति जताते हुए उसे तत्काल रद्द करने को कहा है।
निगम का कहना है कि निगम क्षेत्र में विकास और रखरखाव से जुड़े काम निगम के माध्यम से ही कराया जाना है। इसलिए स्ट्रीट लाइट के रखरखाव के लिए जुडको की ओर से अलग टेंडर निकालना उचित नहीं है। पत्र में कहा गया है कि स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए एजेंसी का चयन अब निगम अपने स्तर से करेगा। इसके लिए जल्द टेंडर जारी किया जाएगा। चयनित एजेंसी को मरम्मत, रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।
हालांकि, विडंबना यह है कि निगम क्षेत्र अन्तर्गत आने वाले 53 वार्डों में मानसून के दौरान हजारों स्ट्रीट लाइटें खराब है। इन खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरूस्त करने की सुध निगम के अधिकारियों को नहीं है। इसका नतीजा है कि शाम ढलते ही शहर के कई हिस्सों में अंधेरा छा जाता है। प्रमुख सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक खराब लाइटें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब पुरानी लाइटों का ही रखरखाव ठीक से नहीं हो पा रहा है, तो नई लाइट लगाने पर निगम क्यों खींचतान कर रहा है।
निगम और जुडको के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद नया नहीं है। शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की कटाई और उनकी मरम्मत को लेकर भी दोनों एजेंसियों के बीच खींचतान सामने आ चुकी है।
सभी 53 वार्डों में 10 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें खराब
रांची नगर निगम के 53 वार्डों में 10 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि इन लाइटों को वर्ष 2020 से पहले लगाया गया था। इसके बाद से मेंटेनेंस के नाम पर भी खानापूर्ति ही हुई। जो लाइटें खराब हो गईं, उनकी जगह पर नई लाइटें भी बहुत कम लगीं। क्योंकि निगम का चुनाव 2022 के बाद 2026 में ही हुआ। चार साल तक निगम के अफसर ही काम करा रहे थे। अभी हर वार्ड में 150 से 200 स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। लेकिन फंड नहीं होने से मरम्मत नहीं हो पा रही है।

