Headlines

सवाईमाधोपुर में कोर वोटर ने बचाई भाजपा की साख:दोपहर बाद बदला वोटिंग का रुख, पढ़ें कैसे 33 सीटों पर पहुंची पार्टी




सवाई माधोपुर नगर परिषद में भाजपा की 33 सीटों की जीत के पीछे आखिरी समय में कोर वोटर का पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा होना सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। शुरुआत में UGC रोलबैक आंदोलन, स्थानीय मुद्दों और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी के चलते भाजपा 20-25 सीटों तक सिमटती नजर आ रही थी, लेकिन मतदान के दौरान दोपहर बाद वोटिंग का रुख बदला। संगठन की वार्डवार रणनीति के साथ कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के सक्रिय होने को भी भाजपा की वापसी की अहम वजह माना जा रहा है। नतीजों में पार्टी 33 सीटों के साथ बहुमत हासिल करने में सफल रही। शुरुआती नाराजगी के बावजूद कोर वोटर ने नहीं छोड़ा भाजपा का साथ सवाई माधोपुर में UGC रोलबैक को लेकर सर्वण समाज में नाराजगी का माहौल था। 2 सितंबर को इस मुद्दे को लेकर सर्वण समाज की बड़ी बैठक होनी थी, लेकिन प्रशासन ने आचार संहिता का हवाला देते हुए बैठक पर रोक लगा दी। इस दौरान सर्वण समाज की ओर से संचालित किए जा रहे कुछ व्हाट्सएप ग्रुप भी निष्क्रिय कर दिए गए। इन घटनाओं का चुनाव पर असर पड़ने की चर्चा थी। शुरुआती आकलन में भाजपा को 20 से 25 सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही थीं, लेकिन चुनावी नतीजों में पार्टी ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की। इसे भाजपा के कोर वोटर के अंतिम समय में पार्टी के साथ मजबूती से खड़े होने से जोड़कर देखा जा रहा है। टिकट वितरण को लेकर नाराजगी और स्थानीय मुद्दों के बावजूद पार्टी का परंपरागत वोट बैंक अंत में भाजपा के पक्ष में गया। किरोड़ी लाल मीणा ने संभाला मोर्चा भाजपा के चुनाव में पिछड़ने के संकेत मिलने के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने वार्डों में जाकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की और कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। भाजपा की इस वापसी में उन्हें भी महत्वपूर्ण श्रेय दिया जा रहा है। हालांकि, जीत का पूरा श्रेय किसी एक व्यक्ति को देने के बजाय संगठन की वार्डवार रणनीति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और कोर वोटर के एकजुट होने को भी अहम माना जा रहा है। दोपहर तक बदला वोटर का मूड 9 सितंबर को मतदान के दौरान शुरुआती दौर में निर्दलीय प्रत्याशियों की वजह से वोटर कुछ कंफ्यूज नजर आया। हालांकि, दोपहर 12 बजे के बाद कई वार्डों में भाजपा के पक्ष में वोटिंग का रुख मजबूत होता दिखाई दिया। इसके बाद पार्टी के कोर वोटर ने एकजुट होकर भाजपा को वोट किया। इसी वजह से कई वार्डों में भाजपा को बड़ी जीत मिली। हर वार्ड में दो कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी भाजपा ने नगर परिषद के 60 वार्डों में दो-दो कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी थी। ये कार्यकर्ता पूरे चुनाव के दौरान वार्डों में सक्रिय रहे। चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत भी लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहे। मतदान के दिन उन्होंने अलग-अलग वार्डों में जाकर कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया। वार्ड स्तर पर संगठन की यह सक्रियता भी भाजपा की जीत के समीकरण का हिस्सा रही। टिकट विवाद में लाइव करने का भी उल्टा असर टिकट वितरण को लेकर बजरंग दल के नेता नरेश सिंधी ने लाइव आकर भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। इससे भाजपा के कोर वोटरों में नाराजगी की चर्चा रही। हालांकि, चुनाव के अंतिम दौर में यही नाराजगी पार्टी से दूरी बनाने के बजाय भाजपा के पक्ष में वोट के रूप में सामने आई। कोर वोटर ने पार्टी प्रत्याशियों का साथ दिया और भाजपा को 33 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत दिलाया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *