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Rishi Panchami 2026 | Saptarishi Puja Vidhi & Significance in Ujjain


5 घंटे पहले

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आज (15 सितंबर) ऋषि पंचमी व्रत है। यह सौभाग्य बढ़ाने वाला व्रत माना गया है, पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि पर सात ऋषियों की पूजा करने से भक्त को सौभाग्य मिलता है और जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल से मुक्ति मिलती है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। इस तिथि पर सप्तऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ की पूजा करने की परंपरा है।

मत्स्य अवतार से जुड़ी है सप्तऋषियों की कथा – भगवान विष्णु का पहला अवतार था मत्स्य। मत्स्य यानी मछली। उस समय धरती पर जलप्रलय आया था और भगवान के मत्स्य अवतार ने राजा मनु, सप्तऋषियों और अन्य जीवों की रक्षा की थी।

ऐसे कर सकते हैं ऋषि पंचमी व्रत

ऋषि पंचमी पर स्नान के बाद भगवान के सामने ऋषि पंचमी व्रत के साथ सप्तऋषियों की पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए।

पूजा में मिट्टी या तांबे के कलश में जौ भरकर घर के मंदिर में रखा जाता है।

कलश के पास अष्टदल कमल बनाकर, उसके दलों में सप्तऋषियों और उनकी पत्नियों का ध्यान किया जाता है। इसके बाद सभी सप्त ऋषियों का पूजन करते हैं।

घर में पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ऐसे मंदिर, जहां सप्तऋषियों की प्रतिमाएं हों, वहां पूजा की जा सकती है।

सप्तऋषियों से जुड़ी खास बातें

कश्यप ऋषि – इनकी 17 पत्नियां थीं। अदिति नाम की पत्नी से सभी देवता और दिति नाम की पत्नी से दैत्यों का जन्म हुआ था। कद्रु से नाग और विनता से गरुड़देव का जन्म हुआ था। अन्य पत्नियों से भी अलग-अलग जीवों की उत्पत्ति (जन्म) हुआ था।

अत्रि ऋषि – रामायण के मुताबिक श्रीराम, लक्ष्मण और सीता वनवास के समय अत्रि ऋषि के आश्रम भी गए थे। अत्रि मुनि की पत्नी अनुसूया थीं। अत्रि ऋषि और अनुसूया के पुत्र भगवान दत्तात्रेय हैं।

भारद्वाज ऋषि – भारद्वाज ऋषि ने आयुर्वेद ग्रंथ की रचना की थी। द्वापर युग में इनके पुत्र के रूप में द्रोणाचार्य का जन्म हुआ था।

विश्वामित्र ऋषि – विश्वामित्र मुनि से जुड़ी कई कथाएं हैं। इनकी कथाएं सतयुग में राजा हरिश्चंद्र, त्रेतायुग में श्रीराम-लक्ष्मण से जुड़ी हैं। इन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी।

गौतम ऋषि – गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या थीं। गौतम ऋषि के शाप की वजह से अहिल्या पत्थर बन गई थीं। श्रीराम ने अहिल्या पर कृपा की और उन्हें पत्थर से फिर से इंसान बना दिया था।

जमदग्नि ऋषि – जमदग्नि की पत्नी रेणुका थीं। इन दोनों के पुत्र थे भगवान परशुराम। परशुराम का जिक्र रामायण और महाभारत में भी है और वे अष्टचिरंजीवियों में शामिल हैं।

वशिष्ठ ऋषि – रामायण के मुताबिक श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को प्रारंभिक शिक्षा वशिष्ठ मुनि ने ही दी थी।

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