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जयपुर नगर निगम में बीजेपी को बहुमत मिला है। ऐसे में अब मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए नेताओं ने लॉबिंग शुरू कर दी है। जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बनाने की चर्चा सबसे ज्यादा है। वहीं डिप्टी मेयर के पद के लिए ब्राह्मण और राजपूत नेताओं ने भी लॉबिंग शुरू कर दी है। इसके साथ ही पार्टी मूल ओबीसी से भी डिप्टी मेयर बना सकती है। बाड़ेबंदी में बंद बीजेपी पार्षदों से भी इस बारे में रायशुमारी की गई है। वहीं दूसरी तरफ जयपुर शहर के विधायकों ने प्रदेश नेतृत्व को साफ कह दिया है कि मेयर उनकी विधानसभा क्षेत्र से नहीं बनाया जाए। विधायकों का कहना है कि जहां पार्टी विधायक नहीं हैं, उस विधानसभा से विधायक बनाने को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि विधायकों की इस राय को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक नहीं चाहते हैं कि उनकी विधानसभा में कोई उनका प्रतिद्वंदी पैदा हो। मेयर पद के लिए सुनील कोठारी-पुनीत कर्नावट में मुकाबला दरअसल, वैश्य समाज से मेयर बनाने के पीछे बड़ी वजह सोशल इंजीनियरिंग है। जयपुर शहर से तीन ब्राह्मण, दो राजपूत, एक वैश्य और एक दलित कोटे से विधायक हैं। वहीं ब्राह्मण कोटे से सीएम भजनलाल शर्मा और राजपूत कोटे से दो मंत्री भी जयपुर शहर से ही हैं। जयपुर शहर से एक मात्र वैश्य विधायक कालीचरण सराफ को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। ऐसे में पार्टी इस बार पर वैश्य समाज से खासतौर पर जैन समुदाय से मेयर बनाने पर विचार कर रही है। विधायकों की राय, पार्षदों से हुई रायशुमारी, वरिष्ठता और वित्तीय स्थिति के आंकलन के बाद पार्टी की पहली पसंद इस पद पर सुनील कोठारी हैं। लेकिन निर्वतमान डिप्टी मेयर पुनीत कर्नावट उन्हें टक्कर दे रहे हैं। कर्नवाट भी जैन समुदाय से आते हैं। वहीं उन्हें सीएम भजनलाल शर्मा का करीबी माना जाता है। लेकिन संभवत विधायक कालीचरण सराफ नहीं चाहेंगे कि वे मेयर बने। टिकट बंटवारे में भी इसके संकेत मिल चुके हैं। पार्टी ने पुनीत कर्नावट को टिकट दिया था, लेकिन कालीचरण सराफ ने कुलदीप मिश्रा को पार्टी सिंबल दे दिया। जिसके बाद पार्टी के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई थी। ब्राह्मण समाज से बन सकता है डिप्टी मेयर वैश्य समाज से मेयर बनाने के बाद पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरे को डिप्टी मेयर बनाने पर विचार कर रही हैं। इसे लेकर भी पार्टी स्तर पर मंथन चल रहा हैं। दरअसल जयपुर शहर में पार्टी का सबसे बड़ा वोट बैंक ब्राह्मण हैं। वहीं इस बार बड़ी संख्या में ब्राह्मण पार्षद भी जीतकर पहुंचे हैं। इसके अलावा जयपुर नगर निगम के इतिहास को देखें तो इस सीट पर कभी ब्राह्मण मेयर फुल टाइम के लिए नहीं बना। केवल 2009 में करीब 5 महीने के लिए पंकज जोशी मेयर पद पर रहे थे। वहीं पवन शर्मा और घनश्याम शर्मा कार्यवाहक मेयर रहे हैं। ऐसे में पार्टी मेयर ना सही, लेकिन अपने बड़े कोर वोट बैंक को साधने के लिए डिप्टी मेयर ब्राह्मण समाज से बना सकती है। डिप्टी मेयर के लिए शैलेन्द्र भार्गव सबसे प्रबल दावेदार शैलेन्द्र भार्गव इस सीट पर सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी में शहर बीजेपी के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है, लेकिन पार्टी ने उन्हें अभी तक कोई बड़ा पद नहीं दिया है। उन्हें टिकट मिलने के साथ ही मेयर-डिप्टी मेयर पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं अगर पार्टी किसी युवा चेहरे को डिप्टी मेयर बनाने पर विचार करती है तो सीएम के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी प्रतिभा शर्मा और सिविल लाइन विधानसभा के वार्ड से पार्षद बने शशि प्रकाश शर्मा के नाम को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। राजपूत समाज ने लॉबिंग शुरू की इसके अलावा डिप्टी मेयर के पद के लिए राजपूत समाज के नेताओं ने भी लॉबिंग शुरू कर दी हैं। राजपूत समाज से कभी मेयर और डिप्टी मेयर नहीं बना। वहीं यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर समाज में पार्टी को लेकर नाराजगी भी है। इसका खामियाजा पार्टी को निकाय चुनावों में भी उठाना पड़ा है। ऐसे में पार्टी डैमेज कंट्रोल के तहत राजपूत समाज से भी डिप्टी मेयर बनाने पर विचार कर सकती है। कुमावत समाज को डिप्टी मेयर पर विचार हो सकता है वहीं एक संभावना मूल ओबीसी में माली और कुमावत समाज से किसी को डिप्टी मेयर बनाने की भी है। दरअसल जयपुर में इन दोनों समाजों की बड़ी संख्या है और यह दोनों समाज हमेशा से बीजेपी के साथ रहे हैं। पार्टी ने इस बार इन दोनों समुदाय के लोगों को भी खूब टिकट दिए हैं। इसके साथ ही पिछली बार मेयर की सीट ओबीसी रिजर्व होने पर भी पार्टी ने इन दोनों समाजों से मेयर नहीं बनाकर गुर्जर समाज से मेयर बनाया था। ऐसे में इस बार डिप्टी मेयर पर इस समीकरण पर भी विचार किया जा सकता है। —————– ये खबर भी पढ़िए… जयपुर में मेयर की रेस में सुनील-पुनीत सहित 4 नाम:उदयपुर में कटारिया के रिश्तेदार, कोटा में स्पीकर की पसंद अहम; जानिए निगमों के प्रमुख दावेदार नगर निकाय चुनावों के नतीजे आ गए हैं। प्रदेश के 10 नगर निगमों में से बीजेपी 4 में आसानी से बोर्ड बनाते हुए नजर आ रही है। वहीं, कांग्रेस को बीकानेर नगर निगम में पूर्ण बहुमत मिला है और पाली में निर्दलीयों की मदद से आसानी से बोर्ड बना लेगी। अलवर में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। जोधपुर, अजमेर और भरतपुर नगर निगम में स्थिति फिलहाल साफ नहीं है। (पढ़िए पूरी खबर) ———— जयपुर में भाजपा-कांग्रेस में कौन मेयर का सबसे बड़ा दावेदार:BJP में वैश्य समाज को साधने की रणनीति, कांग्रेस में जेन-जी को मिल सकता है मौका जयपुर निगम के 150 वार्डों के लिए सोमवार को बीजेपी प्रत्याशियों ने नामांकन भर दिया है। अगर बीजेपी को बहुमत मिलता है तो बीजेपी के पास मेयर पद के लिए कई बड़े चेहरे हैं। लेकिन सामाजिक और जातिगत समीकरण के लिहाज से माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार जयपुर में वैश्य समाज से मेयर बना सकती है। (पढ़िए पूरी खबर)
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जयपुर में मेयर के लिए सुनील कोठारी-पुनीत कर्नावट में मुकाबला:बाड़ेबंदी में पार्षदों से ली गई राय, डिप्टी मेयर के लिए राजपूत नेता कर रहे लॉबिंग
