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बक्सर के सदर अस्पताल में आईसीयू शुरू करने की तैयारी चल रही है। इसी बीच, आयुर्वेद और होम्योपैथी पद्धति के चार डॉक्टरों को आईसीयू की ड्यूटी में लगाए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। सिविल सर्जन के आदेश के बाद मरीजों की सुरक्षा और गंभीर स्थिति में इलाज की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आईसीयू सामान्य वार्ड से अलग होता है। यहां भर्ती मरीजों की हालत कभी भी गंभीर हो सकती है और कई बार तुरंत मेडिकल फैसले लेने पड़ते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आईसीयू में तैनात आयुष डॉक्टरों की क्या भूमिका होगी और इमरजेंसी में आखिरी मेडिकल फैसला कौन लेगा। बक्सर के समाजसेवी रामजी सिंह ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी इलाज पद्धति से विरोध नहीं है, लेकिन आईसीयू में मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की भूमिका साफ होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि गंभीर मरीजों के इलाज और इमरजेंसी संभालने के लिए डॉक्टरों की योग्यता, ट्रेनिंग और अनुभव साफ-साफ बताया जाना चाहिए। ट्रेनिंग वाले डॉक्टरों की लगेगी ड्यूटी रामजी सिंह ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि आईसीयू शुरू करने से पहले यह बताया जाए कि वहां किस योग्यता और ट्रेनिंग वाले डॉक्टरों की ड्यूटी लगेगी। उन्होंने कहा कि जनता को सिर्फ आईसीयू का बोर्ड नहीं, बल्कि सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का इलाज चाहिए। उन्होंने साफ किया कि उनका सवाल व्यवस्था से है, किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत योग्यता पर नहीं। वहीं, सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने आयुष डॉक्टरों की भूमिका साफ की है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने कहा कि आयुष डॉक्टर आईसीयू में मरीजों का मुख्य इलाज नहीं करेंगे। MBBS डॉक्टर ही आईसीयू में करेंगे देखभाल सिविल सर्जन ने कहा कि संबंधित एमबीबीएस डॉक्टर ही मरीज का इलाज और आईसीयू में उसकी देखरेख करेंगे। आयुष डॉक्टर सिर्फ सहयोग करेंगे। हालांकि, सीएस ने यह साफ नहीं किया कि आईसीयू में कौन से एमबीबीएस डॉक्टर और कौन से आयुष डॉक्टर तैनात रहेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता ने कसा तंज मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने भी अस्पताल प्रशासन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बक्सर सदर अस्पताल के आईसीयू का इंचार्ज आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टरों को बनाया जाना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इसे लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए
अस्पताल प्रशासन की सफाई के बाद आयुष चिकित्सकों की भूमिका को लेकर स्थिति कुछ स्पष्ट हुई है, लेकिन आईसीयू शुरू होने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गंभीर मरीजों के लिए एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता किस तरह सुनिश्चित की जाती है। मरीजों और उनके परिजनों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय निर्णय लेने वाला प्रशिक्षित डॉक्टर हर समय उपलब्ध रहे। लंंबे समय से करोड़ो की मशीन फांक रही धूल बक्सर सदर अस्पताल का 10 बेड का आधुनिक आईसीयू लंबे समय से तैयार होने के बावजूद केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण चालू नहीं हो पा रहा था। जिससे करोड़ों की जीवनरक्षक मशीनें धूल फांक रही थी। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय युवाओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार विरोध-प्रदर्शन और विधानसभा में सवाल भी उठाए गए आईसीयू में डॉक्टरों की तैनाती का मुद्दा अब केवल चिकित्सा पद्धति का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि मरीज की सुरक्षा, चिकित्सकीय जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़ा विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की ओर से आईसीयू की ड्यूटी व्यवस्था और चिकित्सकों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना मरीजों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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