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मोदी के जन्मदिन के पहले 2500 करोड़ का कर्ज:8 से 22 साल में ब्याज के जरिए कर्ज अदायगी करेगी, RBI के माध्यम से नीलामी




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के एक दिन पहले सरकार ने एक महीने तक चलने वाले सेवा कार्यक्रमों को देखते हुए बुधवार को फिर 2500 करोड़ रुपए के तीन अलग-अलग कर्ज लिए हैं। यह कर्ज सरकारी सिक्योरिटी और री इश्यू के माध्यम से आरबीआई के जरिये हुए नीलामी द्वारा लिए गए हैं। इसके लिए मंगलवार को नीलामी के बाद बुधवार को सरकार को पेमेंट किया गया है। हालांकि सरकार ने कर्ज लेने की वजह विकास योजनाओं और परियोजनाओं के वित्त पोषण बताई है। इसके पहले राज्य सरकार विकास और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के नाम पर एक सितम्बर को ₹ 3,600 करोड़ का कर्ज लिया था। बुधवार को लिए गए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में कर्ज का कुल आंकड़ा 53900 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वहीं नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपए हो गया है। 700 करोड़ का कर्ज 8 साल के लिए सरकार ने 7.39% ब्याज दर वाली मध्य प्रदेश सरकारी सिक्योरिटी 2034 की री-इश्यू के जरिए 700 करोड़ रुपये जुटाए। यह प्रतिभूति 22 जुलाई 2026 को जारी की गई थी और इसकी अवधि 8 साल है। इसका मूलधन 22 जुलाई 2034 को चुकाया जाएगा। इस पर ब्याज सालाना 7.39% की दर से होगा और भुगतान हर छह महीने में 22 जनवरी और 22 जुलाई को किया जाएगा। 900 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए दूसरी कर्ज राशि सरकारी प्रतिभूति के अंतर्गत 900 करोड़ रुपये की है। इसकी ब्याज दर 7.58% सालाना है और अवधि 12 साल है। यह प्रतिभूति भी 22 जुलाई 2026 से प्रभावी है। इसका पूरा मूलधन 22 जुलाई 2038 को चुकाया जाना है। इस पर भी ब्याज का भुगतान साल में दो बार 22 जनवरी और 22 जुलाई को किया जाएगा। सबसे लंबी अवधि का 900 करोड़ का कर्ज सरकार ने 22 साल की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूति के जरिए भी 900 करोड़ रुपये जुटाने का फैसला किया है। इस पर ब्याज दर 7.66% सालाना है। यह प्रतिभूति 19 अगस्त 2026 से प्रभावी है और इसका मूलधन 19 अगस्त 2048 को वापस किया जाएगा। यानी इस कर्ज की अदायगी के लिए सरकार को करीब 22 साल का समय मिलेगा। ब्याज का भुगतान साल में दो बार 19 फरवरी और 19 अगस्त को किया जाएगा। सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार कर्ज का उद्देश्य विकास कार्यों के लिए वित्त जुटाना बताया गया है। इन प्रतिभूतियों में निवेश बैंकों के लिए Statutory Liquidity Ratio (SLR) के तहत पात्र निवेश के रूप में माना जाएगा। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि ये प्रतिभूतियां रेडी फॉरवर्ड फैसिलिटी के लिए योग्य होंगी।



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