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कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के कोलिहामुड़ा गांव में तालाब का पानी लंबे समय से लाल बना हुआ है। पानी का रंग लगातार बदलता रहता है और कई बार यह मटमैला भी दिखाई देता है। पानी को देखकर ग्रामीणों ने डर के कारण तालाब का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई साल से समस्या बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। यह तालाब गोपालपुर में चैतमा से करीब एक किलोमीटर दूर है। ग्रामीणों के मुताबिक, पानी साफ करने के लिए कई बार तालाब में चूना डाला गया, लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा। पानी आज भी लाल और मटमैला दिखाई देता है। बांध के पानी के रिसाव की आशंका ग्राम पंचायत के सरपंच राम सिंह कंवर ने बताया कि तालाब का पानी कई सालों से लाल है। ग्रामीणों का मानना है कि पास के बांध से पानी के रिसाव के कारण तालाब में काई जम रही है। इसी वजह से पानी का रंग लाल हो सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, दोपहर और शाम के समय पानी का रंग और ज्यादा बदलता दिखाई देता है। चैतमा के सीपी जायसवाल ने बताया कि समस्या काफी पुरानी है। कई बार चूना डालने के बाद भी पानी साफ नहीं हुआ। ग्रामीण आधार सिंह गोंड और राम सिंह गोंड ने भी बांध से पानी रिसने और काई जमने की आशंका जताई है। वैज्ञानिक जांच की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाब के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी में आयरन और दूसरे रासायनिक तत्वों की जांच होनी चाहिए। जांच से ही पता चल सकेगा कि पानी लाल होने की असली वजह क्या है। जानकारों के मुताबिक, पानी का रंग लाल या लाल-भूरा होने की एक वजह पानी में आयरन की ज्यादा मात्रा भी हो सकती है। आसपास की मिट्टी या चट्टानों से लोहे के तत्व पानी में मिलने पर पानी का रंग बदल सकता है। हालांकि, तालाब के पानी के लाल होने का सही कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जांच कराकर समस्या का स्थायी समाधान करने और तालाब को दोबारा उपयोग के लायक बनाने की मांग की है।
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कोरबा में तालाब का पानी 12 महीने से लाल:चूना छिड़काव बेअसर, ग्रामीणों ने बंद किया इस्तेमाल; जांच की मांग, आयरन की अधिकता भी संभव
