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इंदौर में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दी। मंगलवार को न्यायमूर्ति संजीव भट्ट की एकलपीठ में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। बुधवार को कोर्ट ने आदेश जारी कर याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता का दावा- कालरा OBC श्रेणी में नहीं आते
याचिका सुनील यादव ने दायर की थी। इसमें दावा किया गया था कि वार्ड 65 से पार्षद कमलेश कालरा ने नामांकन के साथ OBC का जाति प्रमाण-पत्र लगाया है, जबकि वे इस श्रेणी में नहीं आते। याचिकाकर्ता ने प्रमाण-पत्र को गलत बताते हुए उसे चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि मामला केवल प्रमाण-पत्र जारी होने तक सीमित नहीं है। यह भी जांचना जरूरी है कि जारी किया गया प्रमाण-पत्र सही है या गलत। निर्वाचन को चुनौती देनी है तो चुनाव याचिका दायर करें
शासन की ओर से दलील दी गई कि यदि याचिकाकर्ता पार्षद कमलेश कालरा के निर्वाचन को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए थी। शासन के अनुसार, याचिकाकर्ता ने ऐसा नहीं किया। दो अन्य OBC प्रमाण-पत्रों का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान कमलेश कालरा की ओर से अपने समर्थन में चंद्र कुमार और जयेश राजानी के नाम से जारी OBC जाति प्रमाण-पत्रों का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि दोनों प्रमाण-पत्र एसडीएम जूनी इंदौर के आदेश से पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं। ऐसे में इन्हें कालरा के जाति प्रमाण-पत्र के समर्थन में आधार नहीं बनाया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुरक्षित रखा था। बुधवार को आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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इंदौर में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को राहत:हाईकोर्ट से OBC प्रमाणपत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
