13 सितंबर, रविवार। पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन में एक घर के अंदर प्रेयर चल रही थी। अचानक 40-45 लोग आए और प्रेयर रोकने के लिए कहा। आरोप है कि महिलाओं से बदसलूकी और घर में तोड़फोड़ की गई। तीन महीने पहले आसनसोल के बर्णपुर में भी भीड़ ने ऐसे ही हमला किया था
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7 जून से 13 सितंबर के बीच 15 रविवार आए, इनमें 11 रविवार को प्रेयर मीटिंग पर भीड़ ने हमला किया या विरोध की वजह से प्रेयर रोकनी पड़ी। भीड़ में शामिल लोगों की दलील है कि प्रेयर मीट की आड़ में धर्मांतरण किया जा रहा है। बार-बार हमलों की वजह से कई जगह हाउस चर्च में प्रेयर बंद कर दी गई।
ईसाई संगठनों के मुताबिक, बीते दो महीने में कुल 22 मामले सामने आए। 9 में FIR हुई है, जिनमें दो FIR पास्टर के खिलाफ हैं।
पहले दो लड़के आए, वीडियो बनाया, फिर भीड़ जुटी
7 जून को बर्णपुर में हुई घटना इस विवाद की शुरुआत समझने के लिए अहम है। उस दिन एक हॉल में करीब 60-70 लोग रविवार की प्रार्थना के लिए जुटे थे। सभा चल रही थी। पास्टर साएन सेनगुप्ता के मुताबिक, दो युवक आए और वीडियो बनाने लगे। मैंने उनसे बैठने के लिए कहा।
प्रार्थना के दौरान युवकों ने कुछ सवाल पूछने की बात कही। मैंने कहा कि प्रार्थना खत्म होने के बाद सभी सवालों के जवाब दूंगा। सभा खत्म हुई। तभी बाहर कुछ लोग जुट गए और प्रार्थना सभा का विरोध करने लगे। बोले कि यहां पैसे देकर धर्मांतरण किया जा रहा है। विवाद बढ़ा, तो पुलिस बुलानी पड़ी।
पुलिस के सामने कहा- पास्टर को मारो, अब मोबाइल पर हो रही प्रेयर
पास्टर सेनगुप्ता बताते हैं, ‘मैंने पुलिस से कहा कि सभा में मौजूद लोगों से पूछ सकते हैं कि क्या उन्हें लालच दिया गया है। तभी भीड़ में से कुछ लोग पुलिस के सामने ही मुझे मारने की बात कहने लगे। पुलिस ने उन्हें शांत कराया और मुझे हीरापुर थाने ले गई। रात करीब 11 बजे तक थाने में रखा।’
पास्टर ने किसी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं कराई। वे बताते हैं कि घटना के बाद बर्णपुर में रविवार की सामूहिक प्रार्थना बंद हो गई है। अब इसे ऑनलाइन करते हैं। इससे सभी लोग प्रेयर में शामिल नहीं हो पाते। किसी के पास मोबाइल नहीं है, किसी के इलाके में नेटवर्क नहीं है।

ईसाई संगठनों ने पास्टर्स को ऑनलाइन हाउस चर्च करने की सलाह दी है। इसके बाद से पास्टर मोबाइल पर प्रेयर करवा रहे हैं।
हमने घटना के वक्त चर्च में मौजूद डॉली कौर से बात की। वे सिख धर्म से हैं। डॉली बताती हैं कि मैं अकेले ही प्रार्थना में जाती हूं। उस दिन लोग मुझसे कह रहे थे कि सिख हो कर चर्च क्यों आती हो। एक सिख लड़का था, वो लगातार चिल्ला रहा था। मैरिज हॉल के बाहर पति मेरा इंतजार कर रहे थे। लोग उनसे पूछने लगे, इन्हें चर्च क्यों आने देते हैं। गुरुद्वारा छोड़कर आप लोग यहां क्यों आ रहे हैं।
बर्णपुर मामले में शिकायत नहीं, दांतन की घटना में FIR दर्ज
हीरापुर थाने के ऑफिसर इंचार्ज अखिलेश सिंह बताते हैं कि हंगामा धर्मांतरण को लेकर हो रहा था। छानबीन में जबरदस्ती धर्मांतरण का मामला नहीं मिला। इसके बाद माहौल शांत करके लोगों को घर जाने के लिए कहा गया।
वहीं, दांतन के चर्च में हुई घटना पर ऑफिसर इंचार्ज सुभीर माझी ने बताया कि चर्च में हमले को लेकर FIR दर्ज की है। इसमें चर्च की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है। फिलहाल जांच चल रही है। किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सोनारपुर के सुभाषग्राम में चर्च तोड़ने के मामले में भी FIR दर्ज है। इस पर पुलिस में बात करने से इनकार कर दिया।

दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में 5 जुलाई 2026 को एक चर्च में तोड़फोड़ की गई। भीड़ में शामिल लोगों ने क्रॉस को भी नुकसान पहुंचाया।
हिंदूवादी नेता बोले- धर्म के नहीं, धर्मांतरण के खिलाफ
बर्णपुर की घटना में जिन लोगों के नाम आए, उनमें उज्ज्वल मोदक भी हैं। वे वायरल वीडियो में भी दिख रहे हैं। खुद को सोशल वर्कर बताते हैं और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हैं। उनका आरोप है कि हॉल में लोगों से कहा जा रहा था कि चर्च आने से बीमारी ठीक हो सकती है।
उज्जवल कहते हैं, ‘कुछ कार्यकर्ता पहले प्रार्थना सभा में गए, वहां बैठे और फिर विरोध किया। इसके बाद मुझे बुलाया। पुलिस को भी सूचना दी गई। हमारा मकसद हंगामा करना नहीं था। हम पास्टर से बात करना चाहते थे। जानना चाहते थे कि क्या लोगों को लालच दिया जा रहा है। हमने प्रार्थना में शामिल लोगों से बात की। उनमें एक भी पैदाइशी ईसाई धर्म से नहीं था। ऐसे लोग भी थे, जिनके परिवार के लोग हिंदू धर्म मानते हैं।’

चेक शर्ट पहने ये शख्स उज्जवल मोदक हैं। उज्जवल पश्चिम बर्धवान जिले में सक्रिय हैं और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हैं।
विरोध के लिए रविवार ही क्यों चुना? उज्जवल जवाब देते हैं, ‘रविवार को सबसे ज्यादा लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं। अगर धर्मांतरण का शक है, तो पता करना आसान होता है। पहचानना आसान होता है कि कौन शहर का है और कौन बाहर से आया है।’ उज्जवल कहते हैं-
अगर कोई अपनी इच्छा से ईसाई धर्म को मानता है तो समस्या नहीं है। किसी व्यक्ति को पैसे, बीमारी ठीक करने या दूसरे लालच के जरिए धर्म बदलने के लिए तैयार किया जाता है, तो उसका विरोध करेंगे।

यही तर्क विश्व हिंदू परिषद के पश्चिम बंगाल ईस्ट रीजन के सचिव अमिया सरकार देते हैं। उनके मुताबिक, संगठन गांव-गांव में हिंदू जागरण का काम कर रहा है। बजरंग दल के कार्यकर्ता उन इलाकों पर नजर रखते हैं, जहां प्रार्थना सभाएं हो रही हैं।
अमिया दावा करते हैं कि पिछली सरकारों के दौरान धर्मांतरण का खुलकर विरोध करना मुश्किल था। अब गांव-गांव में संगठन पहुंच बढ़ा रहे हैं। वे बताते हैं, ‘बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच और दुर्गावाहिनी जैसे संगठन स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रहे हैं कि किस गांव में कौन आ रहा है, कहां प्रार्थना हो रही है और किन लोगों के घरों में धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं।
चर्च पर हमले के बाद मकान मालिक जगह देने से घबरा रहे
पश्चिम बर्धमान के जामुरिया में 28 जून को चर्च की बिल्डिंग पर हमला हुआ था। वे बताते हैं, ‘प्रार्थना के दौरान 10 से 15 लोग आए और कहने लगे यहां धर्मांतरण हो रहा है। पुलिस के आने के बाद दोबारा प्रार्थना शुरू हो पाई। हमने FIR तो दर्ज नहीं करवाई, लेकिन मैं कुछ समय के लिए बाहर चला गया।’

जामुरिया में प्रेयर के दौरान लोग चर्च में घुस गए। इसका वीडियो भी बनाया। उनका आरोप था कि यहां धर्मांतरण किया जा रहा है।
आसनसाल के एक मैरिज हॉल में 20 साल से रविवार की प्रार्थना सभा, चर्च के बाकी काम के अलावा क्रिसमस, ईस्टर सब मनाया जाता था। यहां के पास्टर नाम नहीं बताना चाहते थे। वे बताते हैं कि हमले की घटनाएं शुरू होने के बाद मैरिज हॉल के मालिक ने जगह देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा मैं अपनी प्रॉपर्टी का नुकसान नहीं कर सकता। अगर प्रार्थना करनी है, तो डीएम से परमिशन ले लीजिए।
डर का असर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं। दिनाजपुर के पास्टर सुशांत दावा करते हैं कि धर्मांतरण के नाम पर ज्यादातर हमले साउथ बंगाल में हो रहे हैं। इसलिए प्रशासन चौकन्ना हो गया है। हमारे इलाके में सिविक वॉलंटियर पास्टर से फोन करके चर्च की सारी जानकारी ले रहे हैं, जैसे पास्टर कौन है, चर्च में कितने लोग आते हैं, किस गांव से आते हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है।

ईसाई संगठन का दावा- हमले के 22 मामले, सिर्फ 9 में FIR दर्ज
पश्चिम बंगाल में ईसाइयों के सभी संप्रदायों के संयुक्त फोरम बंगिया ख्रिष्टन परिषद के जनरल सेक्रेटरी हैरद मल्लिक हमलों पर कहते हैं कि पिछले दो महीनों में ऐसे 22 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सिर्फ 9 में ही FIR दर्ज की गई है। इनमें दो पास्टर के खिलाफ और 7 हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं के खिलाफ है। पास्टर पर धर्मांतरण के आरोप में केस दर्ज हुआ है।
मल्लिक के मुताबिक, हाल के दिनों में हाउस चर्च पर अटैक किए गए। हर जगह चर्च की सुविधा नहीं है। इससे कई जगह कम्युनिटी हॉल, मैरिज हॉल, घरों में प्रार्थना सभा होती है। यहां धर्मांतरण का आरोप लगाकर लोगों पर हमला किया जा रहा है।
संगठन ने फिलहाल लोगों को संडे को ऑनलाइन चर्च करने की सलाह दी है। पास्टर्स से कहा है कि वे संडे की प्रेयर के बारे में पुलिस को सूचना दें। संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर ने इस बारे में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू से बात की। उन्होंने कहा कि मुझे या मेरे ऑफिस में अब तक ऐसी घटनाओं की शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है, तो जरूर कार्रवाई की जाएगी।
