इंफाल/गुवाहाटी20 मिनट पहले
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कांगपोकपी में बाजार बंद के बीच नगा-कुकी समुदाय के लोगों में पत्थरबाजी हुई।
मणिपुर में कुकी और नगा समुदाय में तनाव के बीच पहाड़ी इलाकों में जनजीवन प्रभावित है। 7 दिन से कई जगह स्कूल और बाजार बंद हैं। 7 पहाड़ी जिलों से संपर्क प्रभावित है। सड़कों और हाईवे पर नाकेबंदी के कारण सामान्य आवाजाही मुश्किल हो गई है।
हिंसा के चलते जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी ₹400-450 किलो तक बिक रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लोग डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। खेतों में जाना और मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल या एयरपोर्ट पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
इधर, पिछले 4 दिनों में 4 महिलाओं समेत 6 कुकी लोगों की हत्या का आरोप है। कुकी संगठनों ने इन हत्याओं के लिए नगा समुदाय को जिम्मेदार ठहराया है। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुई हिंसा के बाद इस साल अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है।

बुधवार को नगा समुदाय के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव के कई घरों में आग लगा दी गई थी।
सड़कों पर नगा समुदाय की नाकेबंदी, बिना सुरक्षा लोग नहीं जा पा रहे
उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल नगा बहुल जिले हैं, जबकि चूराचांदपुर, कांगपोकपी और फिरजॉल कुकी बहुल हैं। कांगपोकपी समेत 4 जिलों में दोनों समुदायों के लोग रहते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाईवे और दूसरी प्रमुख सड़कों पर कई जगह नगा समुदाय के लोगों ने नाकेबंदी कर रखी है। चेक पॉइंट बनाए गए हैं। बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के निजी वाहन चलाना मुश्किल है।
मेडिकल इमरजेंसी के लिए भी इजाजत लेनी पड़ रही
कांगपोकपी की 53 साल के मार्गरेट ने बताया कि जिला मुख्यालय में होने की वजह से उन्हें जरूरी सामान किसी तरह मिल रहा है, लेकिन गांवों में हालात ज्यादा खराब हैं। कुछ जगहों पर एक किलो चीनी ₹400-450 में मिल रही है।
35 साल के डेविड ने बताया कि लोग खेतों में भी नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं से भी अचानक गोली चल सकती है। उनके मुताबिक, मेडिकल इमरजेंसी या एयरपोर्ट जाने के लिए भी कई जगह नगा समुदाय के सब-डिविजनल ऑफिसर की मंजूरी लेनी पड़ रही है।

चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव के कई घरों पर फायरिंग भी की गई। दीवारों पर बुलेट्स के निशान देखे जा सकते हैं।
चावांगकिनिंग में घर जलाए, दीवारों पर गोलियों के निशान
बुधवार को कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में कई घरों में आग लगाए जाने की घटना सामने आई। कुछ घरों पर फायरिंग भी हुई। दीवारों पर गोलियों के निशान मिले हैं।
इससे पहले मंगलवार रात करीब 10:30 बजे संदिग्ध हथियारबंद उग्रवादियों ने चावांगकिनिंग नागा गांव पर हमला किया था। अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में आधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों ने गांव में फायरिंग की।
पास में तैनात CRPF जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। करीब 6 घंटे तक रुक-रुककर फायरिंग होती रही और सुबह 4:30 बजे तक गोलीबारी जारी रही। इस दौरान गांव के बाहरी हिस्से में बने दो लकड़ी के घर जला दिए गए। CRPF ने उग्रवादियों को गांव में घुसने से रोक दिया।
लीसांगफाई में दो कुकी महिलाओं की हत्या
तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कई फार्महाउसों में भी आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
एक कुकी विधायक ने दोनों महिलाओं की हत्या की निंदा की। उन्होंने वारदात में NSCN-IM और ZUF-K कैडर के शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मणिपुर में 2023 से हिंसा, इस साल फरवरी से तनाव बढ़ा
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 को हिंसा शुरू हुई थी। उसके बाद से अब तक राज्य में तनाव की स्थिति रही है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। बीच-बीच में फायरिंग, आगजनी और झड़पों की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इस साल फरवरी में उखरुल के लिटन गांव से कुकी और नगा समुदायों के बीच नया तनाव शुरू हुआ। इसके बाद पहाड़ी इलाकों में हिंसा बढ़ती गई। सितंबर में तामेंगलोंग और कांगपोकपी में हत्या, फायरिंग और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी से अब तक इस संघर्ष में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।
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