Headlines

Brahma Chellaney Column | China Expansionist Policy & Tibet Identity


  • Hindi News
  • Opinion
  • Brahma Chellaney Column | China Expansionist Policy & Tibet Identity

6 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
ब्रह्मा चेलानी पॉलिसी फॉर सेंटर रिसर्च के प्रोफेसर एमेरिटस - Dainik Bhaskar

ब्रह्मा चेलानी पॉलिसी फॉर सेंटर रिसर्च के प्रोफेसर एमेरिटस

विगत 2 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर निर्वासित तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रंगजेन द्वारा आत्मदाह कर लेना किसी व्यक्तिगत निराशा की अभिव्यक्ति नहीं थी। यह हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में से एक- तिब्बत को नष्ट किए जाने के प्रति दुनिया की बढ़ती उदासीनता को झकझोरने का एक हताश प्रयास था।

पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के तुरंत बाद चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। इसे अकसर मानवाधिकारों के परिप्रेक्ष्य से देखा जाता है, और इसके ठोस कारण भी हैं। लेकिन इसे एशिया की सबसे मूल्यवान भू-राजनीतिक संपत्तियों में से एक पर दावा जताने के प्रयास के रूप में भी समझा जाना चाहिए। विशाल और संसाधनों से समृद्ध तिब्बती पठार हिमालय की गोद में बसा है। इसमें एशिया की महान नदियों का उद्गम स्थल है। और यह दक्षिण, मध्य और दक्षिण पूर्व एशिया के परिप्रेक्ष्य से सामरिक महत्व का स्थान है।

हाल के दशकों में, चीन ने तिब्बत में भारी निवेश किया है। वहां पर व्यापक सैन्य बुनियादी ढांचे और विशाल बांधों का निर्माण किया है और रणनीतिक महत्व के खनिजों के खनन को भी विस्तार दिया है। लेकिन शी जिनपिंग के लिए तिब्बत पर भौतिक नियंत्रण ही पर्याप्त नहीं। वे पूरे तिब्बती पठार पर पूर्ण और स्थायी नियंत्रण चाहते हैं।

शी ने निष्कर्ष निकाला है कि इसे हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका वहां के लोगों की पहचान को मिटा देना है। तिब्बती लोग एक विशिष्ट जातीय समूह हैं, जिनकी अपनी भाषा, परंपराएं, भोजन और पोशाक है। तिब्बतियों से उनकी पहचान छीनना और यह सुनिश्चित करना कि वे अब खुद को तिब्बती न मानें- इसका एक ही लक्ष्य है : ‘विश्व की छत’ पर स्थायी चीनी शासन के विरुद्ध तमाम प्रतिरोधों को खत्म करना।

अपने इसी मकसद को पूरा करने के लिए चीन ने सरकारी छात्रावासों की प्रणाली का विस्तार किया है और तिब्बती बच्चों को कम उम्र में ही वहां भेजना शुरू कर दिया है। चीन इन आवासीय स्कूलों को विकास के इंजन बताता है। जबकि हकीकत यह है कि इनका पाठ्यक्रम बच्चों की तिब्बती पहचान को मिटाने और उसकी जगह चीन के प्रति निष्ठा पैदा करने के लिए बनाया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की रिपोर्ट है कि 6-18 वर्ष की आयु के दस लाख से अधिक तिब्बती बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते हैं। उन्हें साल के अधिकांश समय अपने परिवारों और संस्कृति से अलग रखा जाता है, मंदारिन भाषा में पढ़ाया जाता है, हान संस्कृति के संपर्क में लाया जाता है और उन्हें अपनी ही संस्कृति, धर्म और भाषा को हीन समझने के लिए तैयार किया जाता है। दूसरे शब्दों में, चीन तिब्बतियों की ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहा है, जो चीन में घुल-मिल जाए और अपनी संस्कृति भुला दे।

तिब्बत को मिटाने के लिए चीन ने अन्य कदम भी उठाए हैं। 2023 के अंत से, चीन ने अपने सरकारी दस्तावेजों, राजनयिक संचार और मीडिया में तिब्बत के आधिकारिक नाम को बदलकर शिजांग कर दिया है। यह नाम तिब्बत के लिए मंचू किंग राजवंश की शब्दावली से लिया गया है। इसे अपनाना इस बात पर जोर देने के लिए है कि तिब्बत एक अलग ऐतिहासिक इकाई नहीं है, बल्कि चीन का एक अंग ही है।

देखें तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इन प्रयासों में मदद ही की है। चीन के बाहर कुछ संग्रहालयों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों ने इस साम्राज्यवादी नाम-परिवर्तन को स्वीकार कर लिया है। पेरिस के एक संग्रहालय ने तिब्बती कलाकृतियों को शिजांग से आई हुई के रूप में लेबल किया है। ब्रिटिश संग्रहालय ने सिल्क रोड पर एक प्रदर्शनी में तिब्बत या शिजांग स्वायत्त क्षेत्र का उल्लेख किया है।

अब तो चीन इस प्रयास को अगले स्तर पर ले जा रहा है। 1 जुलाई को जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाला एक नया कानून लागू हो गया है, जो शी की उस मुहिम के अनुरूप है, जिसके तहत तिब्बतियों और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों को कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी पर केंद्रित चीनी पहचान में घुलने-मिलने के लिए मजबूर किया जाएगा। जातीय एकता के लिए कथित खतरों को अपराध घोषित करके यह कानून एक और हथियार के रूप में तिब्बती कार्यकर्ताओं, विद्वानों और प्रवासी समुदायों को डराने-धमकाने का काम कर सकता है।

चीन द्वारा दस लाख से भी अधिक तिब्बती बच्चों को मंदारिन भाषा में पढ़ाया जा रहा है, हान संस्कृति के संपर्क में लाया जा रहा है और उन्हें अपनी वास्तविक संस्कृति, धर्म और भाषा को हीन समझने के लिए तैयार किया जा रहा है।

(@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *