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अंबिकापुर की देवेश्वर कॉलोनी में चल रहे एक कार्यक्रम में डीजे के तेज साउंड से निजी अस्पताल में भर्ती प्रसूता की तबीयत बिगड़ गई। तेज आवाज के कारण उसका बीपी काफी बढ़ गया। करीब 4 से 5 घंटे तक डॉक्टर प्रसूता की हालत सामान्य करने की कोशिश करते रहे। अस्पताल की संचालक ने नर्स के जरिए आयोजकों से डीजे की आवाज कम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। आरोप है कि इसके बाद डीजे की आवाज और तेज कर दी गई। डीजे बंद होने के बाद प्रसूता की हालत में सुधार आया और उसका बीपी सामान्य हो गया। जानकारी के मुताबिक, रविवार को देवेश्वर कॉलोनी स्थित आरोग्य निकेतन हॉस्पिटल में एक महिला की डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद करीब दोपहर 3.30 बजे महिला और उसके नवजात बच्चे को वार्ड में शिफ्ट किया गया। कुछ देर बाद महिला का बीपी अचानक बढ़ने लगा। डॉक्टरों ने उसका ब्लड प्रेशर नार्मल करने के लिए इलाज शुरू किया और लगातार निगरानी करते रहे। डीजे की तेज आवाज से बिगड़ी हालत हॉस्पिटल की प्रबंधक डॉ. किरण अग्रवाल ने बताया कि प्रसूता का ब्लड प्रेशर बढ़कर 180/120 तक पहुंच गया था। उसकी हालत को देखते हुए उन्होंने गणेश पंडाल में तेज आवाज में बज रहे भजन-कीर्तन और डीजे का साउंड कम करने के लिए अपनी नर्स को भेजा। नर्स ने आयोजनकर्ताओं को मरीज की हालत के बारे में बताया और साउंड कम करने के लिए कहा। आरोप है कि आयोजनकर्ताओं ने साउंड कम करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर परेशानी हो रही है तो मरीज को दूसरी तरफ शिफ्ट कर दें। इसके बाद डीजे की आवाज और तेज कर दी गई। प्रबंधन का कहना है कि सभी खिड़की और दरवाजे बंद करने के बाद भी डीजे की तेज आवाज कम नहीं हुई। कार्यक्रम शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक चलता रहा। इस दौरान प्रसूता की हालत को लेकर डॉक्टर और परिजन लगातार परेशान रहे। डॉक्टरों के साथ परिजन भी मरीज के पास बैठे रहे और उसकी देखभाल करते रहे। रात में डीजे बंद होने के बाद धीरे-धीरे प्रसूता की हालत में सुधार आया और वह सामान्य हो गई। होनी चाहिए मानवता-डा. किरण आरोग्य निकेतन की डा. किरण अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक आयोजन का हम विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन एक मरीज की जान तेज डीजे के कारण खतरे में पड़ गई थी। मैं स्वयं मरीज के पास बैठी थी। पेसेंट का बीपी लगातार बढ़ने से ब्रेन हेमरेज और जान का खतरा था। ऐसे मामलों में कम से कम मानवता होनी चाहिए। कार्डियक अरेस्ट का होता है खतरा ईएनटी विशेषज्ञ डा. शैलेंद्र गुप्ता ने कहा कि डीजे की तेज आवाज 120 डेसिबल से ऊपर यदि लगातार कान में जाती है तो मरीज का हार्ट रेट बढ़ जाता है, कार्डियक अरेस्ट के साथ ही बीपी बढ़ने से खून की नली फटने की आशंका रहती है। अस्पताल साइलेंस जोन है। ऐसे में इन क्षेत्रों में इसका पालन होना चाहिए। इसे लेकर सख्त नियम हैं। लगातार हो रही कार्रवाई-एसपी SSP राजेश अग्रवाल ने कहा कि तेज आवाज में डीजे बजाने के मामले में शिकायत मिलने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। यदि इस मामले में शिकायत आती है तो निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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डीजे की तेज-आवाज से चार-घंटे तक खतरे में रही प्रसूता:हॉस्पिटल के पास भजन कार्यक्रम, आयोजकों ने कम करने के बजाय बढ़ाया साउंड
