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IIIT प्रयागराज में दो नए डुअल डिग्री प्रोग्राम प्रस्तावित:बायोमेडिकल और क्वांटम आईटी में एमटेक-पीएचडी, 2027-28 से एडमिशन




प्रयागराज के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में अब बायोमेडिकल एनालिटिक्स एंड इंजीनियरिंग और क्वांटम इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में एमटेक-पीएचडी डुअल डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2027-28 से दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सीनेट से प्रस्तावित पाठ्यक्रम को मंजूरी मिल चुकी है। अब आखिरी मंजूरी के लिए प्रस्ताव बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सामने भेजा गया है। दोनों कार्यक्रम ट्रिपलआईटी के अप्लाइड साइंसेज विभाग के अंतर्गत चलाए जाएंगे। प्रस्तावित डुअल डिग्री में पहले साल छात्रों को एमटेक की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके बाद दूसरे साल से छात्र पीएचडी में प्रवेश लेकर शोध कार्य शुरू कर सकेंगे। पहले साल एमटेक के दौरान स्कॉलरशिप देने का प्रस्ताव है, जबकि पीएचडी में प्रवेश के बाद नियमों के मुताबिक शोध छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। डीन एकेडमिक प्रो. पवन चक्रवर्ती के अनुसार, बायोमेडिकल एनालिटिक्स एंड इंजीनियरिंग में 15 और क्वांटम इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी में 25 सीटें प्रस्तावित हैं। दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश गेट स्कोर के आधार पर होगा। इससे इंजीनियरिंग और विज्ञान पृष्ठभूमि के छात्रों को नई तकनीकों और शोध के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिलेगा। वहीं, ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने बताया कि संस्थान में पहले 12 एमटेक कार्यक्रम चल रहे थे। इस साल क्वांटम इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजीज 13वां एमटेक कार्यक्रम शुरू किया गया है। प्रो. प्रमोद कुमार इसके समन्वयक हैं। उन्होंने बताया कि 25 सीटों वाला यह कार्यक्रम शुरू होते ही पूरी तरह भर गया। निदेशक के अनुसार, यह मंत्रालय प्रायोजित कार्यक्रम है और नेशनल क्वांटम मिशन के तहत शुरू किया गया है। प्रो. सुतावने ने बताया कि यह एक सहयोगी एमटेक कार्यक्रम है, जिसमें ट्रिपलआईटी के साथ सी-डैक पुणे, आईबीएम और आईआईटी बॉम्बे शामिल हैं। उन्होंने इसे देश में पहली बार शुरू किया गया ऐसा सहयोगी एमटेक कार्यक्रम बताया। संस्थान के अनुसार, दोनों नए एमटेक-पीएचडी कार्यक्रमों का मकसद छात्रों को उच्च शिक्षा के साथ शोध के उभरते क्षेत्रों से जोड़ना है। आखिरी मंजूरी मिलने के बाद 2027-28 सत्र से इन दोनों कार्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



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