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सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट सुधारने के लिए छात्रों के विषय बदलवाने का मामला सामने आया है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कुछ सरकारी स्कूलों में छात्रों को अंग्रेजी विषय लेने से रोका जा रहा है। इसके बदले 9वीं और 11वीं में बैंकिंग-फाइनेंस जैसे विषय लेने के लिए कहा जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड के कमजोर रिजल्ट के कारण स्कूलों के प्राचार्यों पर कार्रवाई और तबादले हो रहे हैं। इसके चलते स्कूलों में रिजल्ट सुधारने का दबाव है। इसी वजह से अंग्रेजी में कम नंबर आने की आशंका को देखते हुए छात्रों को यह विषय नहीं लेने देने की शिकायत मिली है। अंग्रेजी नहीं होगी तो आगे पढ़ाई में परेशानी एसोसिएशन ने कहा कि 12वीं में अंग्रेजी विषय नहीं होने से छात्रों को आगे की पढ़ाई में परेशानी हो सकती है। नर्सिंग और फार्मेसी जैसे कोर्स में 12वीं में अंग्रेजी विषय जरूरी होता है। ऐसे में सरकारी स्कूल के बच्चे इन कोर्स में प्रवेश से बाहर हो सकते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब परिवारों के बच्चों को होगा, क्योंकि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। रिजल्ट के लिए बच्चों की पसंद नहीं बदलें पत्र में कहा गया है कि सिर्फ बोर्ड रिजल्ट अच्छा दिखाने के लिए छात्रों को उनकी पसंद का विषय नहीं चुनने देना सही नहीं है। इससे स्कूल का रिजल्ट तो बेहतर हो सकता है, लेकिन बच्चों की आगे की पढ़ाई और करियर प्रभावित होगा। हर बच्चे को पसंद का विषय देने की मांग एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने का मौका दिया जाए। साथ ही अंग्रेजी विषय लेने से रोकने और दूसरे विषय लेने के लिए दबाव बनाने की शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
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सरकारी-स्कूलों में अंग्रेजी सबजेक्ट लेने से रोकने का आरोप:प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने लिखा मंत्री को पत्र;कहा-बोर्ड रिजल्ट अच्छा दिखाने के लिए किया जा रहा
