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फतेहाबाद जिले के टोहाना से विधायक एवं पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पंचायतों के अधिकार, विकास निधि और ठेकेदार प्रथा को लेकर सरकार की आलोचना की। विधायक मंगलवार को गांव तलवाड़ा में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। परमवीर सिंह ने कहा कि जब गांवों में पंचायतों के चुनाव होते हैं, तो उन्हें विकास कार्यों के लिए पूरे अधिकार और फंड भी मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर पंचायतों के पास पैसा और अधिकार नहीं होंगे, तो चुने हुए प्रतिनिधि गांवों का विकास कैसे करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली पंचायतों के साथ भी न्याय नहीं हुआ और उन्हें अपने स्तर पर विकास कार्य करवाने का मौका नहीं मिला। पंचायतों को मिले विकास कार्यों पर फैसला लेने का अधिकार: विधायक विधायक ने अधिकारियों से पंचायतों के खातों में मौजूद फंड की जानकारी लेने की बात कही। उनका कहना था कि अगर किसी पंचायत के खाते में विकास का पैसा है, तो उसे उसी गांव की पंचायत के जरिए खर्च किया जाना चाहिए। परमवीर सिंह ने ठेकेदार प्रथा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए मिलने वाला पैसा पहले पंचायत के खाते में आता है। लेकिन, विकास कार्यों को पंचायत के बजाय बीडीपीओ कार्यालय या ठेकेदारों के जरिए करवाने की व्यवस्था ठीक नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि गांव का पैसा गांव की पंचायत ही लगाए और पंचायत को अपने विकास कार्यों पर फैसला लेने का अधिकार मिले। ’12-15 लाख के काम का एस्टीमेट 80 लाख कैसे’ उन्होंने विकास कार्यों के एस्टीमेट (अनुमानित लागत) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई काम करीब 12 से 15 लाख रुपए में पूरा हो सकता है, तो उसका एस्टीमेट 80 लाख रुपए तक कैसे पहुंच जाता है। उन्होंने ऐसे मामलों में लागत तय करने और विकास कार्यों की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की जरूरत बताई। परमवीर सिंह ने जोर देकर कहा कि पंचायतों को मजबूत करने के बजाय अगर उनके अधिकार कम कर दिए जाएं और विकास निधि के इस्तेमाल का अधिकार भी उनके पास न हो, तो पंचायत चुनाव करवाने का मकसद ही खत्म हो जाता है।
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टोहाना विधायक ने पंचायतों के अधिकार-फंड पर उठाए सवाल:बोले-बीडीपीओ या ठेकेदार नहीं, पंचायत तय करे विकास कार्य, नहीं तो विकास कैसे होगा
