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रानी सराय में 160 पेड़ हटाने का मामला:इंदौर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा; दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं




रानी सराय क्षेत्र में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए पेड़ों को हटाने और पक्षियों के प्राकृतिक आवास से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। मामले में द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे की ओर से एडवोकेटअभिनव पी. धनोडकर ने पक्ष रखा। हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए करीब 160 पुराने पेड़ों को हटाए जाने की संभावित कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है। संस्था ने इन पेड़ों पर निर्भर पक्षियों के प्राकृतिक आवास और शहरी जैव विविधता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को भी न्यायालय के समक्ष रखा है। आवेदन में कुछ पेड़ों पर रोज-रिंग्ड पैराकीट यानी हरे तोते और उनके घोंसलों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। एक दिन के सर्वे पर उठाया सवाल सुनवाई के दौरान पक्षियों के आवास के वैज्ञानिक मूल्यांकन का मुद्दा भी सामने आया। संस्था की ओर से तर्क दिया गया कि केवल एक दिन के निरीक्षण के आधार पर किसी क्षेत्र के पक्षी आवास के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संस्था ने पुराने पेड़ों में मौजूद प्राकृतिक खोखले स्थानों और संभावित nesting sites का वैज्ञानिक सर्वे कराने तथा स्वतंत्र पक्षी विशेषज्ञ या एवियन इकोलॉजिस्ट से अध्ययन कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। पुराने पेड़ों के पारिस्थितिक महत्व का हवाला संस्था की ओर से कहा गया कि परिपक्व पेड़ केवल हरियाली का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे पक्षियों को छाया, आश्रय, भोजन और घोंसले के लिए प्राकृतिक स्थान उपलब्ध कराते हैं। पुराने पेड़ों में मौजूद प्राकृतिक कैविटिज को नए पौधों के रोपण से तत्काल प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर किसी भी पेड़ को हटाने से पहले उसके पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किए जाने की आवश्यकता बताई गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अब कोर्ट के आगामी आदेश से यह स्पष्ट होगा कि पेड़ों की कटाई, पक्षियों के आवास और हस्तक्षेप आवेदन से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर क्या दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।



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