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पंजाब, चंडीगढ़ समेत 26 जगह पर ईडी रेड अभी तक जारी है। मंगलवार सुबह नौ बजे से शुरू होकर यह रेड शुरू हुई थी, जो कि अभी तक चल रही है। एक तरफ मोहाली के फेज-आठ स्थित पुडा भवन में जहां रात भर टीमें जांच करती रही है। वहीं, चंडीगढ़ स्थित गमाडा के पूर्व सीए व पंजाब पुलिस के आईएएस अधिकारी चंडीगढ़ स्थित घर भी ईडी की टीम पहुंची है। ईडी की जांच सीएलयू से जुड़े मुद्दे पर हो रही है ।ED के अनुसार इससे कंपनियों को हुआ संदिग्ध फायदा और सरकारी खजाने को हुआ नुकसान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। जिसकी जांच चल रही है। माना जा रहा है कि आज ईडी इस बारे में कुछ बड़ा खुलासा सकती है। हालांकि इस पर राजनीति भी गरमाई हुई है। विरोधी दल के लोग आम आदमी पार्टी की सरकार पर सवाल उठा रहे है। तो दूसरी तरफ आप ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए पंजाब सरकार के अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और गमाडा के कामकाज में रुकावट डालने की कोशिश हो रही है। पार्टी ने कहा कि मावां-धियां सत्कार योजना समेत सरकार की कल्याणकारी योजनाएं और मोहाली के विकास कार्य जारी रहेंगे।
अब ईडी के एक्शन को तीन पाइंटों में जाने 1. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे शुरू किया है। यह कार्रवाई तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में की जा रही है। कंपनी के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के लोगों के ठिकानों पर भी कार्रवाई चल रही है। इनमें रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, मेरा बाबा रियलिटी एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। 2. ED ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और पंजाब सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के दफ्तरों में भी PMLA की धारा 16 के तहत सर्वे शुरू किया है। इसका मकसद GMADA से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों की कंपनियों से संबंधित रिकॉर्ड जुटाना है। ED के मुताबिक, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के प्रमोटर्स ही रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स और एमबी इंफ्राबिल्ड समेत कुछ अन्य कंपनियों को भी नियंत्रित करते हैं। इन कंपनियों ने GMADA से मोहाली में दो प्रमुख नीलामी वाली साइटें खरीदी थीं। 3. जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों को GMADA को चुकाई जाने वाली रकम में बड़ी वित्तीय राहत मिली। ED के अनुसार इससे कंपनियों को हुआ संदिग्ध फायदा और सरकारी खजाने को हुआ नुकसान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। ED तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े एक कंसल्टेंसी फर्म टीला कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों की भी तलाशी ले रही है। यह फर्म GMADA के विभिन्न कंसल्टेंसी कार्यों से जुड़ी है और ED को इसके कथित तौर पर मामले में मध्यस्थ के रूप में काम करने का संदेह है। तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स पर दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित रेडिसन ब्लू होटल प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में CBI और ED की कार्रवाई भी चल रही है।
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रातभर चली ED की रेड, मोहाली में टीमें मौजूद:मंगलवार सुबह शुरू हुई थी, चंडीगढ़ में पूर्व GMADA अधिकारी के घर भी पहुंची टीम
