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आगरा खंड स्नातक एमएलसी सीट का चुनाव इस बार भाजपा के लिए पिछली जीत बचाने की चुनौती लेकर आया है। भाजपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह गुरुजी पर लगातार दूसरी बार भरोसा जताया है। उनके सामने समाजवादी पार्टी ने एटा के शशांक यादव को उतारा है। वहीं, अवागढ़ रियासत से जुड़े और मजबूत राजनीतिक-सामाजिक पहचान रखने वाले अमरीश पाल सिंह के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुकाबले का समीकरण और दिलचस्प हो गया है। खास बात यह है कि अमरीश पाल सिंह के मैदान में आने से सजातीय मतदाताओं के बीच भी उनकी सक्रियता और प्रभाव की चर्चा है।
आगरा खंड स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और छह अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। सात अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और नौ अक्टूबर तक नाम वापसी होगी। 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
12 जिलों में फैला है चुनावी मैदान
यह चुनाव सिर्फ अलीगढ़ या आगरा तक सीमित नहीं है। आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, इटावा, फर्रुखाबाद, कासगंज, हाथरस, औरैया और कन्नौज, यानी कुल 12 जिले शामिल हैं। इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले इस चुनाव में संगठन, मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन प्रत्याशियों के लिए अहम रहेगा।
2020 में सपा से छीनी थी सीट
डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने 2020 में पहली बार चुनाव लड़कर इस सीट पर भाजपा का खाता खोला था। उस समय उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी तत्कालीन एमएलसी असीम यादव को करीब छह हजार वोटों के अंतर से हराया था। करीब 1.80 लाख मतदाताओं वाले उस चुनाव में भाजपा को पहली बार इस सीट पर जीत मिली थी। इस बार भाजपा ने उसी जीत को दोहराने के लिए मौजूदा एमएलसी को ही मैदान में उतारा है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही मानवेंद्र प्रताप सिंह ने 12 जिलों में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं।
सपा ने चेहरा बदला, शशांक यादव पर दांव
समाजवादी पार्टी ने इस बार प्रत्याशी बदला है। एटा के शशांक यादव को पार्टी ने मैदान में उतारा है। ऐसे में सपा अपने संगठन और पारंपरिक कैडर के सहारे भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में है। पिछले चुनाव के मुकाबले नए चेहरे के साथ सपा का चुनावी अभियान किस तरह आकार लेता है, यह भी इस मुकाबले का अहम पहलू रहेगा।
अमरीश पाल के उतरने से सजातीय वोटों पर नजर
इस चुनाव की सबसे खास चर्चा अमरीश पाल सिंह को लेकर है। एटा के अवागढ़ रियासत से आने वाले अमरीश पाल सिंह की क्षेत्र में अपनी सामाजिक पहचान और मजबूत व्यक्तित्व है। कभी भाजपा समर्थक खेमे से जुड़े माने जाने वाले अमरीश पाल अब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं।
उनके चुनाव लड़ने से सबसे ज्यादा चर्चा सजातीय मतदाताओं के बीच उनके प्रभाव को लेकर है। राजनीतिक रूप से यह माना जा रहा है कि वह जिन मतदाताओं तक पहुंच बना रहे हैं, उनमें एक हिस्सा मानवेंद्र प्रताप सिंह के संभावित वोट बैंक से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान और परिणाम में कितना दिखाई देगा, यह 23 अक्टूबर के मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
मानवेंद्र बोले- पिछली बार से ज्यादा मजबूत हैं
चुनावी तैयारियों को लेकर डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि 2020 में पहली बार चुनाव लड़ने के कारण परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन इस बार संगठन पहले से ज्यादा मजबूत है। उन्होंने कहा कि योगी-मोदी के नेतृत्व में भाजपा का कैडर 12 जिलों में चुनाव के लिए पूरी तरह सक्रिय है। उनके मुताबिक हर बूथ पर करीब 20 कार्यकर्ताओं की टीम तैयार की गई है। उनका दावा है कि भाजपा इस बार पिछली बार से अधिक मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और बेहतर वोटों से जीत दर्ज करेगी।
‘अमरीश पाल का अपना कैडर नहीं’
अमरीश पाल सिंह के चुनाव मैदान में उतरने के सवाल पर मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उनका अपना कोई कैडर नहीं है और वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल होने के कारण अपने संगठन और कैडर के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। मानवेंद्र का कहना है कि इसके बावजूद भाजपा की बूथ स्तर तक मजबूत तैयारी है।
जैन जी के जंतर-मंतर धरने का भी उठाया सवाल
बातचीत के दौरान जैन जी द्वारा जंतर-मंतर पर किए गए धरने से जुड़े मुद्दे पर भी मानवेंद्र प्रताप सिंह से सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि जैन जी के मुद्दे का इस एमएलसी स्नातक चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जैसे दिल्ली धरने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने चुनाव जीता है। इसी तरह उनका दावा है कि ऐसे मुद्दों का चुनावी परिणाम पर प्रभाव दिखाई नहीं देगा और भाजपा अपने संगठन व कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ेगी।
करीब 1.95 लाख मतदाता, 15 हजार का इजाफा
इस बार आगरा खंड स्नातक सीट पर मतदाताओं की संख्या करीब 1.90 से 1.95 लाख के आसपास बताई जा रही है। पिछले चुनाव की तुलना में करीब 15 हजार मतदाता बढ़े हैं। मानवेंद्र प्रताप सिंह का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या में वोट भाजपा कार्यकर्ताओं ने बनवाए हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उन्होंने सभी 12 जिलों के दौरे तय कर लिए हैं। अब उनकी टीम बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क और प्रचार व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटी है।
अब मुकाबले में तीन अलग-अलग समीकरण दिखाई दे रहे हैं, भाजपा के मौजूदा एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह अपनी पिछली जीत दोहराने की कोशिश में हैं, सपा नए चेहरे शशांक यादव के जरिए वापसी की तैयारी में है और अवागढ़ रियासत से जुड़े अमरीश पाल सिंह की मौजूदगी सजातीय वोटों के समीकरण को प्रभावित करने की कोशिश करती दिख रही है। बता दें कि मानवेंद्र प्रताप सिंह एबीवीपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं और लंबे समय से संघ व भाजपा में सियासत कर रहे हैं।
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आगरा खंड स्नातक सीट पर इस बार तिकोना मुकाबला:अलीगढ़ के मानवेंद्र प्रताप सिंह गुरुजी के सामने सपा से एटा के शशांक और सजातीय अमरीश पाल दे रहे टक्कर
