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कई सामाजिक संगठनों ने मिलकर बुधवार 23 सितंबर को अंबेडकर चौक से एक सायकिल यात्रा शुरू की। यह यात्रा ‘सामाजिक परिवर्तन से व्यवस्था परिवर्तन’ का संदेश पूरे जिले में पहुंचाएगी। यात्रा शुरू करने से पहले संगठन के पदाधिकारियों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर पर माला चढ़ाकर उन्हें याद किया। इसके बाद ‘जय भीम’ के नारों के साथ सायकिल यात्रा आगे बढ़ी। यात्रा का नेतृत्व कर रहे युवा आदर्श बौद्ध ने बताया कि इसका मकसद आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समाज को शिक्षा, अधिकार और संविधान में मिले कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है। साथ ही, सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करना, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ लोगों को जागरूक करना भी इसका उद्देश्य है। वे ओबीसी की जातिगत जनगणना, आदिवासी मृतक बच्चों को न्याय और आबादी के हिसाब से अधिकार, अवसर और प्रतिनिधित्व की मांग को लोगों तक पहुंचाएंगे। यात्रा के दौरान गांव-गांव पहुंचकर आम लोगों से सीधी बात की जाएगी। उन्हें लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने की कोशिश होगी। इस यात्रा का लक्ष्य सिर्फ जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि सबको बराबर मानने वाले, लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण समाज बनाने की कोशिश है, जिससे सामाजिक परिवर्तन के जरिए व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाए जा सकें। यह यात्रा 23 सितंबर को बालाघाट के अंबेडकर चौक से शुरू होकर 24 सितंबर को डोंगरमाली, 25 को मोवाड़, 26 को मेंहकेपार, 27 को कटंगी, 28 को वारासिवनी, 29 को लालबर्रा, 30 को लामता, 1 अक्टूबर को परसवाड़ा, 2 को बैहर, 3 को मलाजखंड, 4 को सालेटेकरी, 5 को देबरबेली, 6 को लांजी, 7 को भानेगांव, 8 को रजेगांव और 9 अक्टूबर को हट्टा पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा वापस बालाघाट आएगी। वापसी पर, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन देंगे।
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बालाघाट में सायकिल यात्रा शुरू:आदिवासी बच्चों को न्याय की मांग, नारे लगाते हुए कार्यकर्ता हुए रवाना
