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किन्नौर जिले में आवारा कुत्तों की नसबंदी का दो हफ्ते का अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह अभियान किन्नौर पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन (विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) और कांगड़ा के पीपल फार्म (एनजीओ) के सहयोग से चलाया गया। इस दौरान जिले के अलग-अलग इलाकों में कुल 239 कुत्तों की नसबंदी की गई। अभियान के तहत रिकांगपिओ क्षेत्र में 190 कुत्तों की नसबंदी हुई। इसमें सब्जी मोहल्ला और बस स्टैंड पर 20, आयुर्वेदिक अस्पताल में 18, कोठी में 21, मीट मार्केट में 19, कल्पा होटल में 17, कल्पा गांव में 17, ख्वागी/शुदारंग में 24, पॉवरी में 19, पुलिस लाइन में 19 और आईटीबीपी कॉलोनी में 15 कुत्ते शामिल थे। इसके अलावा, पूह खंड के लिप्पा गांव में 31 और निचार खंड के भाबानगर में 19 कुत्तों की नसबंदी की गई। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान वैज्ञानिक रूप से बहुत जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड इसे आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका मानते हैं। नसबंदी के साथ-साथ एंटी-रेबीज़ टीकाकरण भी किया गया, जिससे कुत्तों की संख्या नियंत्रित होने के साथ-साथ रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारी के फैलने पर भी रोक लगेगी। 2030 तक देश को रेबीज़ मुक्त करना लक्ष्य भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश को रेबीज़ मुक्त करना है। किन्नौर में चला यह अभियान इसी राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम है। पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन के उप निदेशक डॉ. अजय नेगी ने बताया कि पूरे किन्नौर में 239 आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई है। इस दौरान एंटी-रेबीज़ टीकाकरण भी किया गया। उन्होंने पीपल फार्म एनजीओ की पूरी टीम की तारीफ की और उनका आभार जताया। कई विभागों का मिला सहयोग डॉ. नेगी ने अभियान को सफल बनाने में डॉ. अरविंद नेगी (वेटरनरी सर्जन), ग्राम पंचायत लिप्पा और सुंगरा के प्रधानों, साथी फाउंडेशन किन्नौर, उड़ान समाज सेवा किन्नौर, काबिल कीर्ति फाउंडेशन किन्नौर, स्वर्णिम भारत समाज कल्याण फाउंडेशन (भारत) और मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज नगर समिति भावानगर के सहयोग की भी सराहना की।
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किन्नौर में 2 सप्ताह में 239 कुत्तों की नसबंदी:एंटी-रेबीज टीकाकरण भी किया; कई विभागों ने मिलकर चलाया अभियान
