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CMO ने 8 गैरहाजिर डॉक्टरों का वेतन रोका:मुरादाबाद में मुख्य चिकित्साधिकारी ने वीडियो कॉल से चेक की डॉक्टरों की उपस्थिति




मुरादाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह ने मंगलवार को अनोखे तरीके से डॉक्टरों की उपस्थिति चेक की। औचक निरीक्षण के दौरान ड्यूटी से नदारद मिले 8 चिकित्साधिकारियों का एक दिन का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इसके साथ ही सभी अनुपस्थित डॉक्टरों को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियो कॉल से खुली पोल सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने स्वास्थ्य केंद्रों की जमीनी हकीकत जानने के लिए तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने जनपद में तैनात डॉक्टरों की उपस्थिति जांचने के लिए उनके मोबाइल नंबरों पर सीधे वीडियो कॉल की। इस डिजिटल औचक निरीक्षण में कई डॉक्टर अपने निर्धारित कार्यस्थल से गायब मिले। वीडियो कॉल के जरिए की गई इस औचक जांच से अनुपस्थित डॉक्टरों में हड़कंप मच गया। ये 8 डॉक्टर पाए गए अनुपस्थित: निरीक्षण के दौरान अपने कर्तव्य स्थल पर गैरहाजिर रहने वाले डॉक्टरों की सूची इस प्रकार है: डॉ. नेहा सिंह – एपीएचसी रतनपुरकलां डॉ. संजीव कुमार – पीएचसी जाँगीरपुर डॉ. आशीष कुमार सिंह – पीएचसी सिहालीखद्दर व डिलारी डॉ. भारती – एपीएचसी रतनपुरकलां डॉ. देवेश प्रताप सिंह – पीएचसी उमरीकलां, कांठ डॉ. नितिन आनंद पंत – पीएचसी बुढ़हानपुर, भोजपुर डॉ. सुनील हरिऔध – पीएचसी भगतपुर टांडा, भोजपुर डॉ. रेखा सागर – पीएचसी देवीपुरा, भोजपुर वेतन रोकने के साथ स्पष्टीकरण तलब मुख्य चिकित्साधिकारी ने इस घोर लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अनुपस्थित पाए गए सभी 8 डॉक्टरों का दिनांक 22 सितम्बर 2026 का एक दिन का वेतन अग्रिम आदेशों तक बाधित (रोकने) करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, सभी संबंधित डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी अनुपस्थिति का ठोस कारण बताते हुए तीन दिनों के भीतर अपने-अपने नोडल अधिकारी के माध्यम से लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। “मरीजों की सेवा में कोताही बर्दाश्त नहीं” — सीएमओ सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा: “जनपद की स्वास्थ्य इकाइयों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की समय पर उपस्थिति मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ इलाज देने के लिए अत्यंत आवश्यक है। मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को प्रभावी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।” इस सख्त कार्रवाई के बाद से स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों और डॉक्टरों में हड़कंप का माहौल है। प्रशासन के इस कदम की आम जनता द्वारा सराहना की जा रही है, क्योंकि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने की उम्मीद है।



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