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Supreme Court Seeks EC Timeline on TMC Name & Symbol Controversy


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नई दिल्ली 8 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (EC) से पूछा कि TMC के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न का विवाद कब तक सुलझाया जाएगा।

यह विवाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच है। कोर्ट ने इस मामले में ममता बनर्जी की याचिका पर 28 सितंबर को सुनवाई तय की है।

ममता बनर्जी ने EC के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें TMC का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज किया गया था। यह मामला 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले सामने आया है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

बेंच ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डी.एस. नायडू से विवाद पर अंतिम फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा।

ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वह चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर सकते। जस्टिस बागची ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।

सिब्बल ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान EC ने यह फैसला लिया। इससे ममता बनर्जी के पास फ्रीज करने के आदेश को चुनौती देने का कोई रास्ता नहीं बचा।

चीफ जस्टिस ने कहा कि EC को मामले की सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने सबूत और दावे पेश करने का मौका दिया जाए। इसके बाद आयोग मामले पर फैसला ले।

21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए उसे सूचीबद्ध करने पर सहमति दी थी।

EC ने अपने अंतरिम फैसले के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए थे। आयोग ने दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था।

चुनाव आयोग ने ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को विवाद पर अंतिम फैसला होने तक सुरक्षित रखा है।

EC ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की सुनवाई की थी। इसके बाद आयोग ने कहा कि मामले पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत अंतिम फैसला जरूरी है।



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